कविता

पधारो सीता संग श्री राम

दोहा : मैं तो कुछ जानू नहीं, तुम जानो रघुनाथ।
सेवा पूजा वंदना सकल तुम्हारे हाथ।।

दोहा : श्रवण सुजसु सुन आयहु प्रभु भजन भव भीर।
त्राहि त्राहि आरती हरण शरण सुखद रघुवीर।

मु: पधारो -२ सीता संग श्री राम -२।
भजें (जपें) हम -२ नित दिन तेरा नाम।
पधारो -२ सीता संग श्री राम -२।

अं १: हम साधक ध्यान लगाय रहे हैं।
आपको भगवन मनाय रहे हैं।।
मि: अब दर्शन दो अविराम।
पधारो -२ सीता संग श्री राम -२।

अं २: पापी अधर्मी छाय रहे हैं।
संतो को खूब सताय रहे हैं।।
मि: लो अवतार अब दया निधान।
पधारो -२ सीता संग श्री राम -२।

अं ३: कल युग का प्रभाव बढ़ा है।
दया धर्म अब बहुत घटा है।।
मि: व्याकुल है तेरी संतान।
पधारो -२ सीता संग श्री राम -२।

अं ४: लक्ष्मण भैया के संग आओ।
वीर बजरंगी को संग में लाओ।।
मि: करो अब दुष्टों से संग्राम।।
पधारो -२ सीता संग श्री राम -२।

अं ५: नन्दो सीता राम पुकार रहे हैं ।
राकेश गुणगान गाये रहे हैं ।।
मि: रख लो भक्तों का सम्मान।
(फैराओ धर्म ध्वजा श्री राम )
पधारो -२ सीता संग श्री राम -२।