क्या हमारे देश को अभिशाप से मुकित मिलेगी

सुरेश गोयल धूप वाला

परमपिता परमात्मा की भारत भू: पर असीम कृपा रही है। भारतवर्ष धन-धान्य, बल, बुद्धि, कोशल ज्ञान-विज्ञान से परिपूर्ण एक सम्पूर्ण राष्ट्र रहा है। धर्म और अध्यात्म के मामले में भारत संसार में अध्यातिमक गुरू माना गया है। प्राकृतिक सम्पदा के अपार भंडार भी भारत भूमि पर ही रहे। पवित्र जल की नदियां, खेती योग्य उपजाउ भूमि, अनुकूल जलवायू, मौसम यह सभी परमात्मा की अनुकम्पा बगैर संभव नहीं हो सकते, यहां दूध-दही की नदियां बहती थी व भारत को सोने की चिडि़या कहा जाता था। यह सभी बातें समृध राष्ट्र की पहचान प्रदर्शित करती है।

परंतु न जाने दुर्भाग्य से लगभग एक हजार वर्ष पूर्व किसका अभिशाप लगा या किसकी नजर लगी कि भारत पर विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा हमले होने शुरू हो हुए। भारत की धनसंपदा लुटेरों द्वारा लूटकर ले जायी जाने लगी। भारत की संस्कृति सभ्यता का तहस-नहस किया जाने लगा। हूण, शक, पूर्तगाली, मुगल, अंग्रेजों ने भारत को जमकर लूटा। लूटा ही नहीं बलिक हमारे शासक बनकर भी बैठ गए। हमारे धन-संपदा भी लूटी और हमपर राज भी किया। हमलावरों ने इस देश को लहूलुहान करने में जरा भी कसर नहीं छोड़ी। परंतु यहां की वरिष्ठ सभ्यता और संस्कृति के कारण हमने टूटकर बिखरना नहीं सीखा। बड़े टकराव के बीच यह देश एकजुट होकर खड़ा रहा। इसे जीवंत बनाए रखने में विजय नगर साम्राज्य शिवाजी, महाराणा प्रताप, गुरू गोबिंद सिंह के अतिरिक्त अनेकों राष्ट्र नायकों के बलिदान एवं महानायकों की अक्षुण्ण भूमिका रही है। पिछली सदी में इस महान प्ररेणा की मशाल लेकर स्वामी दयानंद सरस्वती, महर्षि अरविंद्र, लोकमान्य तिलक, स्वामी विवेकानंद ने देश को गुलामी की जंजीरों से निकालने व भारतवासियों में जो ज्योतिगर्मय प्रकाश फैलाया। जिसमें बाद में महात्मा गांधी, सुभाषचंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद, भगतसिंह सुखदेव, वीर सावरकर, रामप्रसाद बिसमिल तथा अन्य महानायकों ने जन-जन तक भारतीयों की दूर्दशा को बाहर निकालने का प्रयास किया। इसे आगे बढ़ाने में डा0 हेडगेवार की भी अहम भूमिका रही है।

महानायकों के अथक प्रयास व लाखों भारत वीरों की कुर्बानी देकर स्वतंत्र हुए इस आशा के साथ कि अब हमारा देश की सोने की चिडि़या बनेगा। गांधी जी का राम राज्य की कल्पना अब अति शीघ्र ही पूरी होगी। देश में धर्म का राज्य स्थापित होगा। सभी भारतवासी मिलजुल कर देश उनिनत में भागीदार होंगे। भार्इचारा बढ़ेगा, भारत राष्ट्र परम वैभवशाली राष्ट्र का उदय होगा। भारत के लोग गरीबी, भूखमरी, बेरोजगारी से निजात पा लेंगे। रोटी, कपड़ा और मकान भारतवासियों के लिए अब कोर्इ समस्या नहीं रहेंगी। हमारा देश दुनिया का शकितशाली देश होगा। भारत के ज्ञान-विज्ञान का ध्वजारोहण पूरी दुनिया पर फहराएगा।

परंतु स्वराज मिलने से आज तक भारतवासियों के सपने को धाराशाही कर दिया गया। गोरों का शासन तो समाप्त हो गया परंतु काले अंग्रेजों ने सत्ता को हथिया लिया। आजादी के 65 वर्षों के बाद भी हम अंग्रेजी मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाये। देश के शासकों ने देश की आपार धन संपदा काला धन के रूप में विदेशों में जमा करा दी। अरबों रूपये के घोटाले आये दिन देश में उजागर होने लगे। देश के हितों के गोण कर व्यकितगत हित साधे जाने लगे। वोट बैंक की राजनीति ने देश के शासकों की बुद्धि को मलिन कर दिया। सत्ता कैसे प्राप्त हो यही राजनीतिज्ञों का लक्ष्य बनकर रह गया। देश को दोनों हाथों से लूटा जाने लगा। देश का हित किस बात में होगा यह बात गोण होकर रह गर्इ। आज पूरे देश में अंधेरा ही अंधेरा छा गया है। देश के रक्षक ही भक्षक बन चुके है। सत्तर के दशक में लोक नायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चलाया गया आंदोलन यधपि राष्ट्रीय जन आंदोलन का रूप ले चुका था देश की जनता को एक आशा की किरण भी उपजी थी परंतु उनका यह आंदोलन व्यवस्था परिवर्तन के स्थान पर सत्ता परिवर्तन तक ही सिमटकर रह गया।

अधिकतर राजनीतिक पार्टियों व राजनीतिज्ञों से आज देश की जनता का मोह भंग हो चुका है। आज राजनीतिक के क्षेत्र में काम करने वाले र्इमानदार, योग्य, तपस्वी लोगों की यधपि कोर्इ कमी नहीं है परंतु देश की जनता परिवर्तन के लिए ऐसे नेतृत्व की तलाश में भटकती रही जो निस्वार्थ भावना से उपर उठा ऐसा व्यकितत्व हो जो त्यागी, तपस्वी और देश की दबी कुंठा को समझने योग्य हो। आज देश के बच्चे-बच्चे में एक जोश जगा है और देश की कुव्यवस्था को उखाड़ फैंकने के लिए जिसमें देश की जनता को बहुत सताया और रूलाया है। क्रांति की अलख तो जल चुकी है परंतु हमारे देश को अभिशाप से कब मुकित मिलेगी यह सब र्इश्वर की कृपा पर निर्भर है।

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