कौन कहता है देश कतार में है ?

0
151

– अतुल तारेatm

कौन कहता है देश कतार में है? प्रसव हो या सृजन, निर्माण के क्षणों में एक पीड़ा होती ही है। यह घड़ी मंथन की है। अमृत छलकने में अभी समय है। यह घड़ी विष पान की हो सकती है और विष को पीने के लिए विशेष योग्यता की आवश्यकता होती है। अभिनंदन की पात्र है देश की जनता, जिसे हम आम आदमी (आप वाले आम  आदमी नहीं) कह कर पुकारते हैं, जानते हैं, ने फिर दिखा दिया कि देश का आम आदमी आम नहीं है, वह विशेष है, वह शंकर है, नीलकंठ है।

नरेन्द्र मोदी एक जीवट संकल्प शक्ति के साथ देश में व्याप्त अप संस्कृति के खिलाफ एक निर्णायक युद्ध की घोषणा कर चुके हैं। यह लड़ाई सामान्य नहीं है। यह लड़ाई असामान्य है, असाधारण है और देश यह अब अनुभव कर रहा है कि अब ये लड़ाई सिर्फ 500 या 1000 के नोट बंदी करने तक रुकने वाली नहीं है। आगरा में कल मोदी ने साफ कर दिया था कि बेईमानों की जिंदगी तबाह होती है तो हो, उन्हें इसकी कोई चिंता नहीं है। कारण वह संकेत पहले कर चुके थे। 30 सितम्बर 2016 कालाधन घोषित करने की अंतिम तिथि है, यह केन्द्र सरकार स्पष्ट कर चुकी थी पर ‘विनय न माने जलधि जड़, गए तीन दिन बीत’ की तरह प्रधानमंत्री ने भी लगभग 40 दिन और इंतजार किया इसलिए भय बिन होई न प्रीत का संदेश आवश्यक था।

प्रधानमंत्री जानते थे कि देश में लगभग 30 लाख करोड़ का कालाधन है। वे यह भी जानते थे कि 500 एवं 1000 के नोट में देश की कुल मुद्रा का लगभग 86 फीसदी है। वे यह भी जानते थे कि भारत में कुल करदाताओं का प्रतिशत मात्र 3 प्रतिशत है, इनमें से भी 5 लाख से कम  कर देने वालों की हिस्सेदारी 85 फीसदी के लगभग है। वे यह भी जानते थे कि देश के सकल घरेलू उत्पाद में कालेधन की मात्रा 20 फीसदी है और एक समानान्तर कालेधन की अर्थ व्यवस्था देश को घुन की तरह चाट रही है। अत: रातों रात एक सर्जिकल स्ट्राइक से देश में सीमित अंतराल के लिए आर्थिक अराजकता आ सकती है पर बावजूद इसके उन्होंने यह निर्णय लिया तो इसके पीछे उनका स्वयं पर तो विश्वास था ही वहीं उनका अदम्य विश्वास देश के आम आदमी पर भी था। वे जानते थे कि यह देश सिर्फ चंद पूंजीपतियों  का देश नहीं है, जिनके नाम यदाकदा फोब्र्स की सूची में आते हैं, वे यह भी जानते थे कि यह देश उन चंद जनप्रतिनिधियों का नहीं है, जो देश की आवाज को दबा कर संसद को ठप करते हंै, वे यह भी जानते थे कि यह देश उन भ्रष्ट नौकरशाहों का भी नहीं है, जिन्होंने अमानत में खयानत की है।

वे जानते थे यह देश भामाशाहों का देश है, जो देश की खातिर अपनी पंूजी महाराणा के चरणों में रख देते हैं। वे जानते थे कि यह देश उन वीर सैनिकों का है जो रक्त की आखिरी बंूद तक भारत माता की जय का घोष करते हैं, वे जानते थे कि यह देश उन करोड़ों-करोड़ों देशभक्तों का है जिन्होंने लाल बहादुर शाी के आव्हान पर एक दिन का उपवास रखा या आज अपना पेट काट कर भी गैस की सब्सिडी छोड़ दी।रेखांकित करें इस पंक्ति को कि स्व. शाी के बाद यह पहला अवसर है कि देश के शीर्षस्थ नेतृत्व ने देशवासियों से सीधा संवाद स्थापित कर अपने स्वार्थ का बलिदान मांगा और देश ने दिया। अत: आज नोटबंदी पर इधर उधर दिखाई देती कतारें, नेताओं के बयान विकास दर का रोना, संसद में शोर यह वस्तुत: देश की आवाज नहीं है। देश की आवाज तो जो आज सुनाई दे रही है उसे सुनकर देश की भ्रष्ट राजनीति कांप रही है नौकरशाही के होश उड़ गए हंै।

वह देख रही है, देश कतार में नहीं है। दरअसल कतार में तो वह अब तक था। कारण वह देख रहा था, भोग रहा था कि उसके हक को, उसके अवसरों को देश का चंद दो तीन फीसदी वर्ग ही अपने लाभ के लिए बेशर्माई से भुना रहा है और वह आज तक प्रतीक्षा में ही है। यह अंतहीन प्रतीक्षा वह विगत सात दशक से कर रहा है और देख रहा है  कि उसका नम्बर आ नहीं रहा और पीछे पंक्ति की लंबाई अंतहीन बढ़ रही है। उसकी यह हताशा उसे तोड़ रही थी। विगत 8 नवम्बर के बाद पहली बार यह कतार टूट रही है। देश भर में हलचल है, दिखाई दे रहा है, देश अब बदल रहा है, देश अब उठ रहा है। बेशक अभी कई खतरे हैं। बेशक अभी षड्यंत्रों की नई-नई तरकीबें हैं। बेशक अभी भी यह कहना मुश्किल है कि देश अब भ्रष्टाचार से मुक्त हो ही जाएगा पर हां देश ने ठानी अवश्य है, खुद को बदलने की एक नई शुरुआत करने की।

“आइए राष्ट्र निर्माण के इस अभूतपूर्व यज्ञ में हम भी अपनी आहुति दें।”

Previous articleप्रवक्ता डॉट कॉम के आठ वर्ष पूरे होने पर ‘मीडिया और राष्ट्रीय सुरक्षा’ विषयक संगोष्ठी का सफल आयोजन
Next articleनोटबंदी : नरेन्द्र मोदी का वाजिब सवाल
अतुल तारे
सहज-सरल स्वभाव व्यक्तित्व रखने वाले अतुल तारे 24 वर्षो से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। आपके राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय और समसामायिक विषयों पर अभी भी 1000 से अधिक आलेखों का प्रकाशन हो चुका है। राष्ट्रवादी सोच और विचार से अनुप्रमाणित श्री तारे की पत्रकारिता का प्रारंभ दैनिक स्वदेश, ग्वालियर से सन् 1988 में हुई। वर्तमान मे आप स्वदेश ग्वालियर समूह के समूह संपादक हैं। आपके द्वारा लिखित पुस्तक "विमर्श" प्रकाशित हो चुकी है। हिन्दी के अतिरिक्त अंग्रेजी व मराठी भाषा पर समान अधिकार, जर्नालिस्ट यूनियन ऑफ मध्यप्रदेश के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष, महाराजा मानसिंह तोमर संगीत महाविद्यालय के पूर्व कार्यकारी परिषद् सदस्य रहे श्री तारे को गत वर्ष मध्यप्रदेश शासन ने प्रदेशस्तरीय पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित किया है। इसी तरह श्री तारे के पत्रकारिता क्षेत्र में योगदान को देखते हुए उत्तरप्रदेश के राज्यपाल ने भी सम्मानित किया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

* Copy This Password *

* Type Or Paste Password Here *

17,152 Spam Comments Blocked so far by Spam Free Wordpress