गांधी फैमिली को बीजेपी राज में ही क्यों नजर आता है खोट

                                                                  संजय सक्सेना

 कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका वाड्रा लखीमपुर खीरी में हुई घटना को योगी सरकार के खिलाफ अधिक से अधिक तूल देना चाहती हैं ताकि उत्तर प्रदेश  विधान सभा चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाया जा सके। प्रियंका को लगता है कि लखीमपुर कांड कांग्रेस की ‘बाजी’ पलट सकता है। इसी लिए प्रियंका यह बताने से भी नहीं चूकती हैं कि समाजवादी पार्टी के नेता लखीमपुर मामले में औपचारिकता निभाते रहे,जबकि कांग्रेस सड़क पर संघर्ष कर रही थी। कांग्रेस इतनी उतावली है कि यूपी को बॉय-बॉय कर चुके राहुल गांधी भी यहां आ धमके और पीड़ितों को इंसाफ दिलाने का का वादा करते हुए योगी सरकार को खूब खरी खोटी सुनाई,लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि गांधी परिवार का सारा प्यार और दर्द लखीमपुर के पीड़ितों के ही क्यों उबाल मार रहा है। हत्या तो कश्मीर में भी हुई है। वह भी कश्मीरी हिन्दुओं की। बीते मंगलवार को आतंकवादियों ने श्रीनगर में कश्मीर के प्रमुख दवा विक्रेता मक्खन लाल बिंदरू को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था। बिंदरू उन गिने-चुने कश्मीरी हिन्दुओं में से एक थे,जिन्होंने लगातार मिल रही धमकी के बाद भी यहां से पलायन नहीं किया था। इसके कुछ समय बाद ही आतंकियों ने दो और हमले किए। जिसमें श्रीनगर के लाल बाजार में गोलगप्पे की रेहड़ी लगाने वाले को निशाना बनाया,जिसकी पहचान विरेन्द्र पासवान निवासी बिहार के रूप में हुई है। यह मामला ठंडा भी नहीं हो पाया था और आज गुरूवार को करीब सवा 11 बजे कुछ आतंकियों ने ईदगाह के संगम इलाके में बने गवर्नमेंट ब्वॉयज स्कूल में गोलीबारी की. इसमें स्कूल की प्रिंसिपल सुपिंदर कौर और टीचर दीपक चंद बुरी तरह घायल हो गए। दोनों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन दोनों की मौत हो गई। हिन्दुओं को घाटी से डरा-धमकाकर भगा देने के लिए आतंकवादियों द्वारा ऐसी कायराना हरकतों को अंजाम दिया जा रहा है, लेकिन कांग्रेस और गांधी परिवार वहां जाकर पीड़ित  परिवार का दर्द बांटने तो दूर संवेदना के दो शब्द भी नहीं बोल  पाया। इसी प्रकार राजस्थान में कांग्रेस सरकार द्वारा किसानों पर लाठियां बरसाई जाती है।उत्तर प्रदेष में राहुल-प्रियंका इस बात से दुखी थे कि उन्हें लखीमपुर नहीं जाने दिया जा रहा है। गांधी परिवार इसे लोकतंत्र की हत्या बता रहा था,लेकिन जो आरोप राहुल-प्रियंका योगी सरकार पर लगा रहे थे,वैसा ही कृत्य छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री भी कर रहे थे,लेकिन किसी कांग्रेसी के जंू नहीं रेंगी। छत्तीसगढ़ में झंडा लगाने के विवाद दो सम्प्रदायों के बीच तनात के बाद दंगा भड़क गया था। इस पर पुलिस ने जमकर लाठी चार्ज किया था। बीजेपी प्रतिनिधिमंडल दंगा प्रभावित कवर्धा में घायलों से मिलने जाना चाहता था,लेकिन वहां की बघेल सरकार ने  भाजपा प्रतिनिधिमंडल को सर्किट हाउस में ही नजरबंद कर लिया, भाजपाई धरने पर बैठ गए,फिर भी स्थानीय प्रषासन नहीं माना तो भाजपा नेताओं को वापस लौटना पड़ गया। लखीमपुर में सियासत चमकाने के चक्कर में गांधी परिवार को या तो यह घटनाएं दिखाई ही नहीं दी अथवा इस पर बोलना उसके सियासी हित के लिए उचित नहीं रहा होगा। इसी तरह से पंजाब में भी कांग्रेस सरकार द्वारा एक तरफ मोदी के खिलाफ किसानों को भड़काया जा रहा है तो दूसरी ओर पंजाब सरकार किसानांे के हितों के खिलाफ कई फैसले ले रही है।
बहरहाल, लगता है कि लखीमपुर की घटना से कांग्रेस को उम्मीद है कि वह भाजपा के खिलाफ माहौल बनाने और सूबे के सियासी समीकरण को बदलने में कामयाब हो सकती है। जहां, एक तरफ राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने खुद मोर्चा संभाल रखा है वही, दूसरी तरफ अपने वरिष्ठ नेताओं और मुख्यमंत्रियों का भी सहारा ले रही हैं। पंजाब, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड और उत्तराखंड के कांग्रेस नेता पीड़ितों से मुलाकात करने लखीमपुर जा रहे हैं। बुधवार को प्रदेश सरकार से इजाजत मिलने के बाद राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा समेत पांच नेताओं को लखीमपुर खीरी जाकर हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों से मुलाकात की थी।
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संजय सक्‍सेना
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ निवासी संजय कुमार सक्सेना ने पत्रकारिता में परास्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद मिशन के रूप में पत्रकारिता की शुरूआत 1990 में लखनऊ से ही प्रकाशित हिन्दी समाचार पत्र 'नवजीवन' से की।यह सफर आगे बढ़ा तो 'दैनिक जागरण' बरेली और मुरादाबाद में बतौर उप-संपादक/रिपोर्टर अगले पड़ाव पर पहुंचा। इसके पश्चात एक बार फिर लेखक को अपनी जन्मस्थली लखनऊ से प्रकाशित समाचार पत्र 'स्वतंत्र चेतना' और 'राष्ट्रीय स्वरूप' में काम करने का मौका मिला। इस दौरान विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं जैसे दैनिक 'आज' 'पंजाब केसरी' 'मिलाप' 'सहारा समय' ' इंडिया न्यूज''नई सदी' 'प्रवक्ता' आदि में समय-समय पर राजनीतिक लेखों के अलावा क्राइम रिपोर्ट पर आधारित पत्रिकाओं 'सत्यकथा ' 'मनोहर कहानियां' 'महानगर कहानियां' में भी स्वतंत्र लेखन का कार्य करता रहा तो ई न्यूज पोर्टल 'प्रभासाक्षी' से जुड़ने का अवसर भी मिला।

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