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    Homeसाहित्‍यकविताभारतवर्ष को अखंड बनाएंगे

    भारतवर्ष को अखंड बनाएंगे

    —विनय कुमार विनायक
    जाति-वर्ण व्यवस्था को तोड़ेंगे,
    हम हिन्दू मिल जुलकर रहेंगे,
    धर्म सुधार अभियान चलाएंगे,
    समस्त बुराई से मुख मोड़ेंगे!

    हिमाद्रि से कन्याकुमारी तक,
    हम हिन्दू भाईयों को जोड़ेंगे,
    हम स्वजनों को नहीं छोड़ेंगे,
    मातृजाति को शिक्षित करेंगे!

    हम तिलक दहेज नहीं लेंगे,
    पराए धन से परहेज़ करेंगे,
    बहन बेटियों के परिणय में,
    तन-मन-धन से मदद करेंगे!

    हम मृत्यु भोज प्रथा रोकेंगे,
    मृतक परिवारों के शोक में
    शामिल होकर सांत्वना देंगे,
    कंधा देने में भेद ना करेंगे!

    हम हिन्दू धर्म के पंथों से
    सिर्फ अच्छाई ग्रहण करेंगे,
    जैन धर्मी से अहिंसा सीखेंगे,
    सिख से देशभक्ति अपनाएंगे!

    बौद्ध धर्म से दया भाव लेंगे,
    आर्य समाज से प्रकृति पूजन,
    आदिवासी से भोलापन पाएंगे,
    भारत वर्ष को अखंड बनाएंगे!

    वेद पुराण गीता की अच्छाई,
    हिन्दूधर्म व पंथों की सच्चाई,
    तमाम धर्मों के बीच फैलाएंगे,
    सच्चा ज्ञान सीखेंगे सब भाई!
    —विनय कुमार विनायक

    विनय कुमार'विनायक'
    विनय कुमार'विनायक'
    बी. एस्सी. (जीव विज्ञान),एम.ए.(हिन्दी), केन्द्रीय अनुवाद ब्युरो से प्रशिक्षित अनुवादक, हिन्दी में व्याख्याता पात्रता प्रमाण पत्र प्राप्त, पत्र-पत्रिकाओं में कविता लेखन, मिथकीय सांस्कृतिक साहित्य में विशेष रुचि।

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