लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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winterसाल के पहले हफ़्ते मे

ऐसा पहली बार हुआ है,

मुंह से भाप नहीं निकली है,

ना ही दाँत किटकिटाये हैं।

शिशिर नहीं  आया इस बार,

हेमंत ऋतु के जाते जाते,

ऋतुराज बंसत पधार गये हैं,

ऋतु-चक्र परिवर्तन अबके,

यह संदेशा लेकर आये हैं-

प्रकृति को इतना मत रौंदो,

रौंदेगी वो इक दिन तुमको!

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