धर्म-अध्यात्म पर्व - त्यौहार

करवा चौथ का व्रत पति की लम्बी उम्र के लिए करती है महिलाएं

डॉ.नर्मदेश्वर प्रसाद चौधरी

करवा चौथ का व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष के चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत सुहागिन स्त्रियाँ अपने पति की लम्बी उम्र के लिये करती हैं।

करवाचौथ के दिन यह व्रत रखने पर सुबह उषाकाल से पहले उठकर कुछ खाना तथा पीना चाहिए। यदि आप उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड से संबंधित क्षेत्र से हैं तो आप उषाकाल से पहले शक्कर और दूध के साथ सूत फेनी लेने का प्रचलन है। इस मिश्रण के सेवन से अगले दिन बिना पानी पीये रहने में मदद मिलती है। दिल्ली और हरियाणा में मीठा खाजा , रसमलाई एवं रबड़ी , मध्यप्रदेश में  सरगी में  फैनी और रबड़ी,  राजस्थान में मीठी कचौरी  और दूध रबड़ी, पंजाब में उषाकाल से पहले लिए गए अन्न में सरगी का एक महत्वपूर्ण स्थान है।

परंपरा के अनुसार सरगी सास द्वारा अपनी बहु को करवाचौथ पर दिया जाने वाला बहुमूल्य उपहार है जिसमें काजू बादाम, मीठी मट्ठी और सुहाग की निशानियाँ होती है।

करवा चौथ विधि एवं सामग्री

करवाचौथ का व्रत और पूजन पूरे विधि-विधान के साथ होता है। इस महत्वपूर्ण लेख में दर्शाई गई सामग्री और विधि द्वारा करवाचौथ की पूजा की जाती है।

पूजन सामग्री

मिट्टी, ताम्बा अथवा पीतल के दो करवे, दूध, जल, धुप, सुपारी, मौलि, अक्षत, दीप, कपूर, सिंदूर, काजल, पुष्प एवं पुष्पमाला, जल के लिए तीन पात्र, नैवेध्य के लिए पूर्ण फल, मेवा या मिठाई, इत्यादि।

इस व्रत में पीसी हुई चावल के घोल से दीवाल पर सबसे ऊपर चन्द्रमा बनते हैं उसके नीचे शिव, गणपति और कार्तिकेय का चित्र बनाया जाता है। फिर पीली मिट्टी से माता गौरी बनायी जाती हैं, जिनकी गोद में गणपति को बैठाया जाता है। गौरी को चौकी पर बिठाकर सभी सुहाग चिन्हों से उन्हें सजाया जाता है और उनकी पूजा की जाती है। एक पुष्प को नन्दीश्वर स्वरुप मानकर स्थान दिया जाता है।

करवा में रक्षासूत्र बांधें, तथा हल्दी और आटे के सम्मिश्रण से एक स्वास्तिक बनाएं। एक करवे में जल भरें तथा दुसरे करवे में दूध भरें और इसमें ताम्बे या चांदी का सिक्का डालें। आचमन के लिए छोटे पात्र में जल भर कर रखें तथा साथ में एक चम्मच भी रखें।

पूजा के लिए मंत्र

‘ॐ शिवायै नमः‘ से पार्वती का, ‘ॐ नमः शिवाय‘ से शिव का, ‘ॐ षण्मुखाय नमः‘ से स्वामी कार्तिकेय का, ‘ॐ गणेशाय नमः‘ से गणेश का तथा ‘ॐ सोमाय नमः‘ से चंद्रमा का पूजन करें। 

सब तैयारी हो जाने के बाद करवाचौथ की कथा सुनें और फिर चन्द्रमा निकलते ही श्री चन्द्रदेव को अर्ध्य दीजिये।अपने पति को तिलक करें तथा छलनी में चांद के साथ  पति को देखें। पति  के पैर छूकर उनका आशिर्वाद ले तथा करवे में भरे जल से अपना व्रत खोलें। इसके पश्चात सात्विक तरीके से बना हुआ भोजन ग्रहण करें।

करवाचौथ की कथा

कथा के अनुसार, एक साहूकार के घर उसकी बेटी ससुराल से आई। शाम को सब लोग भोजन कर रहे थे। करवा चतुर्थी होने के कारण बेटी ने सबके साथ भोजन करने से इंकार कर दिया। जब उसे कहा गया कि भोजन करो तो बेटी ने इंकार कर दिया और हठ करने लगी कि चंद्रमा देखने के बाद ही भेाजन करूंगी। अपनी बहन का ये हठ उपवास एक भाई से सहन नहीं हुआ क्योंकि उसकी बहन भूख-प्यास से बहुत व्याकुल थी। भूख की वजह से तड़प रही थी। कमजोर हो रही थी। तब भाई ने एक दीपक जलाकर छत पर रख दिया और अपनी बहन से झूठ बोला कि चांद निकल आया है, उसके दर्शन करो और भोजन करो।  बहन ने इसे सच मानकर भोजन कर लिया। ऐसा करने के बाद अचानक बहन को पति के नि‍धन की खबर मिली। उसके बाद महिला ने अपनी पति के शव को पास रखकर एक साल तक कठोर उपवास किया जिसके फलस्वरूप करवा देवी प्रसन्न होकर महिला के समक्ष प्रकट हुईं। करवा देवी ने एक खास तरीके से महिला के पति को जिंदा कर दिया। करवा देवी उस महिला के भाई की पत्नी के पास गईं। तब भाई की पत्नी करवा देवी को कसकर पकड़ लेती हैं ताकि करवा देवी उसकी ननद के पति को जिंदा कर दें। भाई की पत्नी करवा देवी को तब तक पकड़े रहती है जब तक करवा देवी ननद के पति को जीवित नहीं कर देती। करवा देवी इनका तप देखकर प्रसन्न होती हैं और ननद के पति को जीवित कर देती है।

ऐसी महिलाएं ना करें करवाचौथ

करवाचौथ के पर्व पर गर्भवती महिलाएं बिना डॉक्टर की सलाह के करवाचौथ का कठोर उपवास ना करें।करवाचौथ के दिन सूर्य उदय से पूर्व खाया जाता है। उसके बाद दिनभर भूखे-प्यासे रहने का असर गर्भ पर पड़ सकता है। करवाचौथ के व्रत में जल भी ग्रहण नहीं किया जाता है।यदि आप बीमार हैं तो भी डॉक्टर की सलाह के बिना करवाचौथ का कठोर व्रत ना करें। 

बहुत सी महिलाओं को करवाचौथ के दिन भी दिनभर काम करना पड़ता है तो इसका असर आपकी सेहत पर भी पड़ सकता है। ऐसे में किसी एक वस्तु का सेवन कर सकते हैं।