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वीरेंदर परिहार

वीरेंदर परिहार

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-वीरेन्द्र सिंह परिहार-
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लोकसभा चुनावों के नतीजों के बाद उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की बैठक सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ले रहे थे। जिसमें समाजवादी पार्टी के भयावह हार के कारणों की समीक्षा की जा रही थी। उक्त समीक्षा बैठक में सपा के हारे प्रत्याशियों ने हार के दूसरे कारण तो बताए ही, कई प्रत्याशियो ने हार का एक बड़ा कारण यह भी बताया कि जब यादव मतदाता हिन्दू हो गये तो फिर सपा की जीत कैसे संभव होती? उनका कहने का आशय यह था कि सपा एवं दूसरे तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दलों की एकतरफा मुस्लिम पक्षधरता के चलते समाजवादी पार्टी का वोट बैंक माने जाने वाली यादव जाति भी प्रतिक्रियास्वरूप हिन्दू हो गई, अर्थात समाजवादी पार्टी की जगह भाजपा को वोट दे दिया।

अब इसमें कोई दो मत नहीं कि इस बार के लोकसभा चुनाव में सभी जातीय धारणाएं टूट गई हैं। जिसके चलते सपा और बसपा जैसी जाति आधारित राजनीति करने वाली पार्टियों के नीचे से धरती ही सिखक गई। जहां बसपा का जाटव वोट विभाजित हुआ और उसे एक भी सीट नहीं मिली। वहीं सपा के यादव वोटों के विभाजित होने के चलते सपा को उत्तर प्रदेश में मात्र पांच सीटें ही मिली, वह भी मुलायम सिंह और उनके परिवारवालों को। कुल मिलाकर देश ने जातिवाद की धारणा से ऊपर उठकर मतदान दिया। यहां तक कि जिसे मुस्लिम वोट बैंक कहा जाता है, उसकी तुलना में हिन्दू वोट बैंक देखने को मिला। अभी इसके पहले तक होता यह था कि मुसलमान संगठित होकर उस पार्टी या उम्मीदवार को वोट करते थे, जिसमें भाजपा के उम्मीदवार को हराने की संभावना देखते थे। इसमें वह बहुत कुछ सफल भी रहते थे, क्योंकि हिन्दू एक बड़ी मात्रा में जाति के आधार पर वोट करते थे। लेकिन इस बार जब हिन्दुओं में वह जाति का कारक प्रभावी नहीं दिखा तो मुस्लिम मतदाता भी भ्रमित हो गए और उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में एक से ज्यादा तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दलों में बंट गए। यद्यपि राष्ट्रवादी सोच रखने वालें मुसलमानों के एक वर्ग का वोट भाजपा को भी मिला। लेकिन इस हिन्दू वोट बैंक का मतलब साम्प्रदायिक नहीं वरन् राष्ट्रवादी था, जैसा कि भारत का सर्वोच्च न्यायालय भी हिन्दुत्व को राष्ट्रीयता एवं संस्कृति का पर्याय बता चुका हैं।

अब सोनिया गांधी को इस बात की शिकायत है कि हिन्दुओं के धुव्रीकरण का प्रयास किया गया। सोनिया गांधी क्या यह बता सकती है कि वह साम्प्रदायिक एवं लांक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक लाने का प्रयास कर क्या वह हिन्दुओं को द्वितीय श्रेणी का नागरिक बनाने का प्रयास नहीं कर रही थी? जब वह शाही इमाम अहमद बुखारी से चुनावों के दौरान यह कहती है कि सेक्यूलर वोट अर्थात मुस्लिम वोट नहीं बंटना चाहिए तो क्या वह धु्रवीकरण का प्रयास नहीं कर रही थी? इसी तरह से जब उत्तर प्रदेश के ताकतवर मंत्री आजम खान मुजफ्फरनगर के दंगों से लेकर करगिल की लड़ाई तक का इस्लामीकरण करने का प्रयास करते है, और मुलायम सिंह खुलकर उनका समर्थन करते है तो भला अपना अस्तित्व बचाने के लिए हिन्दुओं को एकजुट क्यों नहीं होना चाहिए? बड़ी बात यह भी कि इसी संगठित हिन्दू समाज के चलते जातिवाद और मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति करने वाले कई राजनीतिक दलों और उनके नेताओं की दुकानेें बंद हो जाएगी। निश्चित रूप से इससे हमारे संविधान निर्माता और आधुनिक मनु. डॉ. अम्बेडकर की उस सोंच को बल मिलेगा, जिसके तहत वह हिन्दू समाज में भेदभाव, ऊंच-नींच की दीवारों को ढ़हाकर एकीकृत हिन्दू समाज का सपना देखते थे।
ऐसी स्थिति में जब हिन्दू समाज से जातिवाद की दीवारे टूट रही है, जो देश के लिए एक बड़ा शुभ लक्षण है। निश्चित रूप से इसका एक बड़ा कारण एक ओर जहां नरेन्द्र मोदी का करिश्माई नेतृत्व है, वहीं तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दलों की अलगाववाद और आतंकवाद को संरक्षण देने की हद तक मुस्लिम तुष्टिकरण की प्रवृत्ति है। हिन्दू समाज में जातिवाद के निष्प्रभावी होने का एक बड़ा पैमाना यह भी हेै कि मोदी भले पिछड़ी जाति से हो, लेकिन उन्हे सम्पूर्ण हिन्दू समाज का समर्थन मिला, यहां तक कि सवर्णो का सबसे ज्यादा। लेकिन इन सबसे अलग हिन्दू समाज की इस एकजुटता का बड़ा कारण राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का वह सतत प्रयास है, जिसमें जाति पंूछी ही नहीं जाती और संघ का दृष्टिकोण है कि संगठित हिन्दू समाज ही सभी राष्ट्रीय समस्याओं को समाधान हैं।

इसी संगठित हिन्दू समाज के चलते बहुत बड़ा और शायद देश का सबसे बड़ा यह भ्रम टूट गया है कि मुस्लिमों के समर्थन के अभाव में भाजपा को कभी अपने दम पर पूर्ण बहुमत नहीं मिल सकता। निःसन्देह अब इसी संगठित हिन्दू समाज के चलते जो क्रमशः-क्रमशः और मजबूत होंगा, वह मुसलमानों को आत्म-परीक्षण और राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ने को बाध्य करेगा। यहीं संगठित हिन्दू समाज के चलते देश मेें जनसंख्यात्मक आक्रमण करने वाले बांग्लादेशी घुसपैठिए को देश से निकाला जा सकेगा और उनका घुसपैठ तो कम-से-कम पूरी तरह शीघ्र ही रोक दी जाएंगी। इसी संगठित हिन्दू समाज के चलते देश में विभेदकारी कानून हटाकर कामन सिविल कोड लागू किया जा सकेगा। जिससे दूसरे समुदायों की तरह मुसलमानों को भी एक ही विवाह करने का अधिकार होगा। इसी संगठित हिन्दू समाज के चलते जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी धारा 370 हटायी जा सकेगी, जिससे जम्मू-काश्मीर भी दूसरे राज्यों की तरह भारत का एक राज्य होगा और वहां काश्मीरी पण्डित वापस जा सकेगें और जम्मू क्षेत्र में रह रहे दसो लाख हिन्दुओं को जम्मू-कश्मीर की नागरिकता प्राप्त हो सकेगी और इन सबको शरणार्थी जीवन से मुक्ति मिल सकेगी। इसी संगठित हिन्दू समाज के चलते अयोध्या के रामजन्म भूमि में हमारी संस्कृति के प्रतीक और राष्ट्र की पहचान श्रीराम का भव्य राममंदिर शीघ्र ही आकार ले सकेगा। उम्मीद ही नहीं विश्वास भी है कि इसी संगठित हिन्दू समाज की नींव पर एक शक्तिशाली, सम्पन्न और महान भारत खड़ा हो सकेगा।

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