लेखक परिचय

डॉ. मुनीश रायजादा

डॉ. मुनीश रायजादा

लेखक शिकागो स्थित शिशुरोग विशेषज्ञ हैं और एक सामाजिक-राजनीति विश्लेषक हैं।

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नयी दिल्ली, मार्च 5, 2017
चंदा बंद सत्याग्रह ने आम आदमी पार्टी में व्यापक चंदा चोर गैंग की शुद्धिकरण हेतु आगामी मार्च 7 (मंगलवार) को एक यज्ञ के आयोजन की घोषणा की है।
इस यज्ञ का आयोजन स्थल कनॉट प्लेस स्थित प्रख्यात हनुमान मंदिर सुनिश्चित हुआ है।

चंदा बंद सत्याग्रह के संयोजक डॉ मुनीश रायज़ादा आगे जानकारी देते हैं की पार्टी की बुनियाद उसके 100 प्रतिशत वितीय पारदर्शिता के सिद्धांत पर रखी गयी थी। लेकिन अब पार्टी अपने बुनियादी मार्गदर्शक सिद्धांतो से भटक गयी है। ये किसी से छिपा नहीं है की पिछले वर्ष के जून महीने से पार्टी ने अपने दानकर्ताओं की सूचीं को हटा दिया है। इसका कारण पार्टी कुछ भी दे पर इसके पीछे का उद्देश्य कोई रहस्य नहीं है, आम जनता बखूबी जानती है।
इसीलिए, डॉ रायज़ादा तथा उनकी टीम ईश्वर से यह प्रार्थना करेगी की वो पार्टी के भ्रष्ट नेताओं को विवेक प्रदान करें।
इस यज्ञ के माध्यम से सत्याग्रही यह चाहते हैं की पार्टी के भ्रष्ट नेताओं के मन और आत्मा का शुद्धिकरण हो और उनको आत्मज्ञान की प्राप्ति हो, जिसके मदद से वो कर्म और धर्म के पग पर पुनः अपने कदम बढाएं।

इस गतिविधि के पीछे का उद्देश्य मात्रा इतना है की पार्टी अपनी ‘भ्रष्ट राजनीतियों’ को त्याग कर साफ़-स्वछ राजनीतियों के सिद्धांतों पर वापिस लौट आये।

आम आदमी पार्टी अपने दो मुख्य वादों के साथ राजनीति में आयी थी। पहला राजनैतिक दान में पारदर्शिता, और दूसरा भ्रष्ट एवं अपराधिक राजनीती से छुटकारा दिलाना। पर अब पार्टी अपने वादों से विपरीत आचरण कर रही है। पार्टी ने अपने विचारों और वादों को स्वाहा करते हुए भ्रष्ट राजनीति के पदचिन्हों पर अपने कदम आगे बढ़ाती जा रही है।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, श्री रायज़ादा ने कहा की यदि कोई राजनैतिक दल अपनी राजनैतिक फंडिंग को साफ़ नहीं रख सकता तो उससे यह उम्मीद कैसे की जा सकती है की वह भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कदम उठाएगा या फिर लड़ाई लड़ेगा।

रायज़ादा वर्तमान में आम आदमी पार्टी से एक आतंरिक लड़ाई लड़ रहे हैं। वे दिसम्बर 2016 से ही पार्टी के खिलाफ चल रहे चन्दा बंद सत्याग्रह (नो लिस्ट: नो डोनेशन) का नेतृत्व कर रहे हैं।

चंदा बंद सत्याग्रह अभियान आम आदमी पार्टी में नैतिकता और मूल्यों की फिर से बहाली करने के लिए एक वैचारिक संघर्ष है। इसका उद्देश्य जनता को ‘आप’ की भ्रष्ट राजनीति से अवगत करना तथा यह प्रण दिलांना है की वो आम आदमी पार्टी को तब तक चंदा मत दे जब तक पार्टी अपने देनकर्ताओं की सूची सार्वजनिक नहीं कर देतीI

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