लेखक परिचय

भगवंत अनमोल

भगवंत अनमोल

कंप्‍यूटर साइंस में बी.टेक. की डिग्री हासिल करने वाले लेखक युवा उपन्‍यासकार हैं। इनकी अब तक तीन किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं।

Posted On by &filed under खेल जगत.


भगवंत अनमोल

download (1)आजकल बहस इस बात पर हो रही है कि सचिन और ध्यानचंद में से किसे सबसे पहले भारत रत्न देना चाहिए। इस बात से तो किसी को ऐतराज नहीं होगा कि सचिन भारत रत्न के हकदार नहीं है, बस मामला तूल इस बात पर पकड़ रहा है कि किसे पहले भारत रत्न मिलना चाहिए ?

सचिन तेंदुलकर, वर्तमान में विश्व के सबसे बड़े बल्लेबाज है। हम सब उन्हें भगवान की तरह मानते है क्योंकि हमने किसी और को अपनी आँखों के सामने उनसे अच्छा खेलता नहीं देखा। हम चाहते थे कि सचिन को भारत रत्न मिले ताकि उनका नाम सबसे अलग रूप में भारत में अमर हो जाए। हम उन्हें सिर्फ क्रिकेटर के तौर पर ही नहीं देखते थे, बल्कि इससे अधिक वो हमारे दिलो पर राज करते थे, उन्होंने हर उस बार हमारे चेहरे पर मुस्कान लायी जब हमने उन पर विश्वास किया। हर उस मैच में शतक जड़ा जब हमने उनसे अपेक्षा रखी। कई दफा तो अपने दम पर पूरी की पूरी सीरीज में विपक्षी ग्यारहों खिलाडियों को मात दे देते थे।

दूसरी तरफ बात करते है हॉकी के जादूगर ध्यानचंद की। हमने कभी हॉकी के जादूगर ध्यानचंद जी को खेलते नहीं देखा, बस उनके बारे में पढ़ा और सुना, जैसा पढ़ा और सुना उससे तो यही लगता है कि वो हॉकी के अब तक के सर्वश्रेष्ठ खिलाडी है। अब तक सर्वकालिक रूप से उनसे बेहतर कोई हॉकी खिलाडी नहीं रहा। मैंने ऐसा भी पढ़ा है कि वो आज तक एक भी मैच हारे नहीं। परन्तु दुसरे तरफ हमारे समय में वो खेले भी नहीं, अतः हमारी भावनाए उनसे जुडी भी नहीं रही।

हमारा ये स्वाभाविक प्रकृति है कि हम उस व्यक्ति से अधिक जुड़े होते है, जिससे हमारा भावनात्मक जुड़ाव होता है। चाहे आप अपने ही क्षेत्र लेखन में ले ले। दिल्ली के बाहर का व्यक्ति अपनी पहली पुस्तक दरया गंज से प्रकाशित नहीं करवा सकता क्योंकि भावनात्मक रूप से प्रकाशक नहीं जुड़ा होता। वैसे ही हमारे दिल में सचिन बसते है, इसलिए हम पूरे दिल से कई वर्षो से चाहते थे कि सचिन को भारत रत्न मिले। इस बात ने तब जोर पकड़ी जब सचिन को ऑस्ट्रेलिया का सर्वोच्च नागरिक का पुरष्कार दिया गया।

अब प्रश्न आपसे-

क्या आप सच्चे मन से कह सकते हैं कि सचिन सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ बैट्समैन है ?

आप बिना सोच समझे तुरंत जवाब देंगे नहीं ?

परन्तु अगर आपसे प्रश्न किया जाए कि ध्यानचंद सर्वकालिक सर्वश्रष्ठ हॉकी के खिलाडी है ?

आप इस बार भी बिना सोचे समझे कहेंगे हां।

तो बात यहीं से साफ़ है कि पहले किसे भारत रत्न मिलना चाहिए, खैर अब कुछ बाते जोड़ना चाहूंगा कि आखिर हुआ क्या सचिन और भारत रत्न के साथ…

हम सभी चाहते थे कि सचिन को भारत रत्न मिले और एक सामान्य नागरिक के नाते सरकार के लोगो की भावनाए भी सचिन से जुडी थी क्योंकि भारत में क्रिकेट लगभग हर दूसरा व्यक्ति देखता है। परन्तु सरकार को अपनी भावनाओ से नहीं पर देश और समाज के हिसाब से निर्णय लेना चाहिए। परन्तु सरकार सही गलत को सोचे बगैर भावनाओ में बह गयी।

दूसरी तरफ चक दे इंडिया में भी दिखाया गया कि हॉकी गरीबो का खेल है और इससे बहुत कम लोग जुड़े है , जिस वजह से इस खेल को अनदेखा किया जा रहा है, और बीसीसीआई दुनिया की सबसे अमीर बोर्ड है, अमीरी और गरीबी के इस खेल में जीत अमीरी की ही हो गयी।

एक और नजरिया देखे तो वह यह कि सचिन कोंग्रेस के ही सांसद है और सचिन को भारत रत्न देने में अपना पराया भी देखा गया होगा क्योंकि इस मामले में हर पार्टी अपने से ही जुड़े लोगो को ऐसे पुरस्कार देती है ।

सबसे मुख्य बात 2014 के चुनाव अब अधिक दूर नहीं, हर भारतीय के दिलो पर राज करने वाले सचिन को भारत रत्न देकर भारतीय वोटो को खींचने कि भी कोशिश हो सकती है।

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz