लेखक परिचय

प्रोफेसर महावीर सरन जैन

प्रोफेसर महावीर सरन जैन

प्रोफेसर जैन ने भारत सरकार के केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के निदेशक, रोमानिया के बुकारेस्त विश्वविद्यालय के हिन्दी के विजिटिंग प्रोफेसर तथा जबलपुर के विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर हिन्दी एवं भाषा विज्ञान विभाग के लैक्चरर, रीडर, प्रोफेसर एवं अध्यक्ष तथा कला संकाय के डीन के पदों पर सन् 1964 से 2001 तक कार्य किया तथा हिन्दी के अध्ययन, अध्यापन एवं अनुसंधान तथा हिन्दी के प्रचार-प्रसार-विकास के क्षेत्रों में भारत एवं विश्व स्तर पर कार्य किया।

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-प्रोफेसर महावीर सरन जैन-
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विदेशों में हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में प्रचुर एवं महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। प्रस्तुत आलेख में हम उन अनेक देशों के हिन्दी साहित्य के सर्जकों के योगदान की चर्चा नहीं करेंगे। इसके सम्बंध में अलग आलेख में विचार किया जाएगा। प्रस्तुत आलेख में हिन्दी भाषा की शिक्षण सामग्री, वार्तालाप, शब्दकोशों तथा हिन्दी-व्याकरणों एवं हिन्दी भाषा के भाषा वैज्ञानिक अध्ययनों के सम्बन्ध में संक्षेप में विचार किया जाएगा।
हिन्दी भाषा शिक्षण प्रशिक्षण की पाठ्य पुस्तकें-

(1) संयुक्त राज्य अमेरिका- यहां के विभिन्न विश्वविद्यालयों के हिंदी प्राध्यापकों ने हिंदी भाषा की अनेक पाठ्यपुस्तकों की रचना की है। प्रमुख पुस्तकें अग्रलिखित हैं-
1. हेनिंग्सवाल्ड- स्पोकन हिंदुस्तानी – दो खण्डों में, अमेरिकन काउंसिल ऑफ लर्नेड सोसाइटी, वॉशिंगटन (सन् 1945)
2. फेअरबैंक्स: हिंदी एक्सरसाइजेज एण्ड रीडिंग्ज, कोर्नेल यूनिवर्सिटी प्रेस, न्यूयॉर्क (सन् 1955)
3. गम्पर्ज: हिंदी रीडर – भाग – 1, यूनिवर्सिटी ऑफ केलीफोर्निया, बर्कले (1960)
4. हार्टिनः हिंदी बेसिक रीडर्स – यूनिट 1-8, सेन्टर फॉर एप्लाइड लिंग्विस्टिक ऑफ् मॉडर्न लैंग्वेजेज, वॉशिंगटन (1960)
5. अग्यूलर तथा ब्रूस आर.प्रे. तथा अन्य (प्रीति कौल, जौहरी तथा ब्रजेन्द्र सिंह): ए बेसिक कोर्स इन हिंदी, मिशीगन यूनिवर्सिटी (1961)
6. गम्पर्ज़ एवं जून रूमरी तथा अन्य (डॉ. अमर बहादुर सिंह एवं सी0एम0 नईम): कन्वर्सेशनल हिंदी-उर्दू – दो खंडों में, यूनिवर्सिटी आफ केलीफोर्निया यूनिवर्सिटी आफ केलीफोर्निया, बर्कले (1962-63)
7. फेअरबैंक्स तथा पंडित: हिंदी: ए स्पोकिन एप्रोच, दकन कॉलेज़, पूना (पुणे) (1965)
8. फेअरबैंक्स तथा बाल गोविंद मिश्र: स्पोकन एण्ड रिटिन हिंदी, कार्नेल यूनिवर्सिटी प्रेस, न्यूयॉर्क (1966)
9. डॉ. यमुना काचरु: इंटरमीडिएट हिंदी कोर्स, इलिनॉय यूनिवर्सिटी (1966)
10. ऊषा सक्सेना: इंटरमीडिएट हिंदी विद ग्लोसरी एंड स्ट्रक्चरल नोट्स, विस्कोन्सिन यूनिवर्सिटी, मैडीसन (1967)
11. रिचर्ड एम हैरिस तथा रमानाथ शर्मा: ऐ बेसिक हिंदी रीडर, कार्नेल यूनिवर्सिटी प्रेस, न्यूयॉर्क (1969)
12. गम्पर्ज़ एवं जून रूमरी तथा अन्यों के द्वारा निर्मित हिन्दी-उर्दू की पाठ्यपुस्तक (देखें क्रमांक 6) को आधार बनाकर टैक्सस यूनिवर्सिटी, ऑस्टिन के हिन्दी उर्दू फलैगशिप के पूर्व निदेशक हरमेन वैन ओल्फेन ने प्रथम वर्ष के लिए हिन्दी पाठ्यपुस्तकों का निर्माण किया है। आधारभूत सामग्री में, हिन्दी फिल्मी गानों, व्याकरण के नियमों का स्पष्टीकरण तथा अभास और विज्ञापनों आदि की सामग्री को जोड़ा गया है। इनके द्वारा निम्नलिखित पाठ्य पुस्तकों का निर्माण हुआ हैं –
(क) हिन्दी प्रवेशिका
(ख) आरम्भिक हिन्दी : लेखन और वार्तालाप
(इ) प्रथम वर्ष हिन्दी – भाग एक
(ई) प्रथम वर्ष हिन्दी – भाग एक वर्कबुक
(उ) प्रथम वर्ष हिन्दी – भाग दो

13. हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी के रिचर्ड डेलेकि (Richard Delacy) ने सुधा जोशी के साथ मिलकर एलिमेन्ट्री हिन्दी (MP3 ऑडियो सीडी सहित) का निर्माण किया है।

(2) सोवियत रूस – डॉ. दीमशित्स, डॉ. उलत्सिफेरोव एवं डॉ. गोर्यूनोव ने तीन खण्डों में हिंदी भाषा की पाठ्यपुस्तक का निर्माण किया है जिसका प्रकाशन मास्को से 1979 से 1983 की अवधि के बीच हुआ। भारतीय राजदूतावास के जवाहर लाल नेहरू केन्द्र ने इन्टरनेट द्वारा हिन्दी शिक्षण कार्यक्रम आरम्भ किया है। प्रशिक्षणार्थी इन्टरनेट पर हिन्दी के पाठ पढ़ सकते हैं। इलैक्ट्रानिक हिन्दी-रूसी शब्दकोश भी उपलब्ध है। इसकी चर्चा शब्दकोशों के खण्ड में करेंगे।
(3) जर्मनी – हम्बोल्ट विश्वविद्यालय में सन् 1967 में हिन्दी व्याकरण गाइड का निर्माण हुआ। डॉ. लोठार लुत्से तथा डॉ. बहादुर सिंह द्वारा निर्मित ‘द्वितीय भाषा के रूप में हिंदी’ का प्रकाशन सन् 1970 में हुआ।
(4) ब्रिटेन (इंग्लैंड) – डॉ. मैकग्रेगर के संपादकत्व में ‘एक्सरसाइजिज इन स्पोकन हिंदी’ शीर्षक पाठ्यपुस्तक सन् 1970 में निर्मित हुई। सन् 1972 में इनकी ‘ऐन आउट लाइन ऑफ् हिंदी ग्रामर विद एक्सरसाइजिज’ शीर्षक पुस्तक प्रकाशित हुई।
इसके बाद इस क्षेत्र में रूपर्ट स्नेल का कार्य उल्लेखनीय है। इनकी पुस्तक का नाम है- ‘कम्पलीट हिन्दी विद टू ऑडियो सीडीज़’। इसका निर्माण स्वयं शिक्षण पद्धति से हुआ है। कोष्ठक में टीच योरसेल्फ लैंग्वेज़ लिखा हुआ है। पर यह सन् 2011 में प्रकाशित हुई है। इसके सहलेखक सिमोन विटमॉन हैं।
रूपर्ट स्नेल ने देवनागरी लिपि सीखने के लिए भी किताब लिखी है। शीर्शक है –
Read and Write Hindi Script: A Teach Yourself Guide (TY: Language Guides) Paperback – January 14, 2011
by Rupert Snell (Author) ISBN-13: 978-0071759922
(5) जापान – हिन्दी भाषा की प्रारम्भिक पाठ्यपुस्तकों में प्रो. कात्सुरो कोगा कृत ‘हिन्दी प्रवेशिका’ एवं प्रोफेसर एइजो सावा कृत ‘हिन्दी प्रवेशिका’ अधिक चर्चिर रहीं। प्रो. क्यूयादोइ ने हिंदी व्याकरण और पाठमाला (1963) तथा हिंदी पाठमाला (1966) का निर्माण किया। प्रो0 कात्सुरो कोगा के सम्पादकत्व में 1966 में हिंदी पाठमाला भाग – । तथा 1977 में हिंदी पाठ्यपुस्तक भाग-।। प्रकाशित हुईं। जापान में अन्य पाठ्यपुस्तकें भी निर्मित हुई हैं जिनमें प्रो0 तोमिओ मिज़ोकामी कृत ‘हिंदी: ग्रेमेटिकल मेनुअल’ (अभ्यास पुस्तिका) उल्लेखनीय है जिसका प्रकाशन क्रमशः 1980 एवं 1999 में हुआ। जापान में देवनागरी लिपि में प्रकाशित ‘हिन्दी की पहली पुस्तक’ तथा प्रो. तोशिओ तानाका एवं प्रोफेसर काजुहिको माजिदा कृत ‘एक्सप्रेस हिन्दी’ का भी उल्लेख किया जा सकता है। जापानी में हिन्दी सीखने के लिए आई फोन और आई पेड के लिए समर्थित ‘जापानी में हिंदी भाषा जानें या शब्द खेल के साथ अपने हिंदी ज्ञान की परीक्षा दें’ शीर्षक से सुविधा उपलब्ध है। यह आरम्भिक हिन्दी सीखने या भारत में घूमने के लिए अथवा व्यापार के सिलसिले में आने वाले जापानी लोगों को ध्यान में रखकर निर्मित है। सभी शब्द एवं वाक्य जापानी लिपि में हैं।
(6) चेक – डॉ. विन्तर्सेथ पोरीज़्का की ‘हिन्दोस्टीना’ (हिंदी भाषा का पाठ्यक्रम) एक उल्लेखनीय पाठ्यपुस्तक है जिसका सन् 1963 में प्राग के स्टेट पैडागॉज़िकल पब्लिशिंग हाउस से प्रकाशन हुआ। इस पाठ्यपुस्तक की विशेषता यह है कि इसमें चेक भाषा के साथ-साथ अंग्रेजी में भी व्याख्याएं प्रस्तुत हैं।
(7) हंगरी – आर्पाद दैब्रैत्सैनी (1911-1984) ने हिंदी की दो पाठ्यपुस्तकें तैयार कीं:
1. नौसिखियों के लिए हिंदी की पाठ्यपुस्तक, बुदापेस्त (1959)
2. हंगरी भाषियों के लिए हिंदी भाषा पाठ्यक्रम, बुदापेस्त (1983)

(8) रोमानिया – रोमानियन छात्रों के लिए रोमानिया के बुकारेस्ट विश्वविद्यालय के हिन्दी के विज़िटिंग प्रोफेसर की हैसियत से रोमानिया के प्रवास काल में डॉ. विद्यासागर ने सन् 1972 में ‘कुर्स द लिम्बा हिंदी’ तथा डॉ. सूरजभान सिंह ने सन् 1980-81 में ‘मेनुअल द लिम्बा हिंदी’ (दो भागों में) का निर्माण किया। बुकारेस्त विश्वविद्यालय ने इनका प्रकाशन किया। डॉ. सूरज भान सिंह की पुस्तक विदेशियों को हिन्दी भाषा सिखाने की भाषा शिक्षण पद्धति पर आधारित है। निर्देश रोमानियन भाषा में हैं।
(9) स्पेन – स्पेनिश छात्रों के लिए श्रीमती आन्ना थापर ने ‘ग्रामेटिका द हिंदी’ शीर्षक हिंदी भाषा पाठ्यपुस्तक लिखी जिसका प्रकाशन अल्हम्ब्रा प्रकाशन संस्थान, मेड्रिड से सन् 1987 में हुआ।
(10) कोरिया – कोरियन छात्रों के लिए प्रो0 उ-जो-किम ने ‘हिंदी पाठ’ एवं प्रो0 हैंगजंग सू ने ‘हिंदी उच्चारण शिक्षण’ का प्रणयन किया है।
(11) त्रिनिडाड एण्ड टुबेगो – केरेबियन देशों में हिन्दी की पाठ्यपुस्तकों की रचना की दृष्टि से त्रिनिडाड का नाम उल्लेखनीय है। इस देश के छात्रों को हिंदी पढ़ाने की दृष्टि से कमला रामलखन ने ‘हिंदी प्रभात’ शीर्षक से आधारभूत पाठ्यसामग्री का निर्माण किया है। इसका प्रकाशन देवनागरी पब्लिशर्स द्वारा 1993 में किया गया।
(12) चीन – प्रोफेसर जिन दिंग हान, प्रोफेसर थाड. रन हू एवं प्रोफेसर मा मां कांग ने हिन्दी की बुनियादी पाठ्यपुस्तक (चार भाग) का प्रणयन किया है।
(13) उज्बेकिस्तान – हिन्दी भाषा की तीन पाठ्य पुस्तकों का निर्माण प्रोफेसर रहमान बिरदी मुहम्मद जानोव ने किया है।
(14) थाईलैंड – डॉ. चांलोड्. सारबदनूक ने ‘हिन्दी भाषा’ (स्व सीखनी, थाई भाषियों के लिए) का निर्माण किया है।

2. हिन्दी में वार्तालाप से सम्बंधित पुस्तकों की रचना

विभिन्न देशों के विद्वानों ने विभिन्न भाषाओं में हिन्दी में वार्तालाप सम्बंधित पुस्तकों की रचना की है। निम्न रचनाएं उल्लेखनीय हैं-
1. रूस से हिंदी भाषा की जो पाठ्यपुस्तकें प्रकाशित हुई हैं उनमें हिंदी में बातचीत के भी नमूने हैं।
2. चेक में वार्तालाप पुस्तिकाओं की दृष्टि से डॉ. ओदोलेन स्मेकल कृत ‘हिंदी वार्तालाप’।
3. जर्मन के डॉ. (श्रीमती) डगमर मर्कोबा अंसारी तथा एम0 अहमद अंसारी की ‘जर्मन-हिंदी बातचीत’।
4. जापानी में कई रचनाएँ चर्चित हैं। (अ) प्रो0 क्यूया दोई की ‘हिंदी-जापानी वार्तालाप’ (आ) प्रोफेसर हिदेआकि इशिदा दाइतो बुंका कृत ‘व्यावहारिक हिंदी वार्तालाप’ (इ) प्रोफेसर नोरिओ ओकागुचि एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती योशिको कृत ‘सरल हिन्दी वार्तालाप’।

3. शब्दकोश

विदेशों में जिन विदेशी भाषाओं के साथ हिंदी के शब्दकोश प्रकाशित हैं उनमें अंग्रेजी, जर्मनी, हंगेरियन, रोमानियन, रूसी, उज्बेकी, जापानी प्रमुख हैं।

1. अंग्रेजी

(अ) जोसेफ डब्ल्यू रॉकेर कृत ‘अंग्रेजी-हिन्दी तथा हिन्दी-अंग्रेजी शब्दकोश (English-Hindi, Hindi-English: with romanized pronunciation)
(आ) अंग्रेजी – हिन्दी कोश: फादर कामिल बुल्के
(इ) हिन्दी – अंग्रेजी कोश: डॉ. आरएस मेग्रेगर (केंब्रिज)
(ई) एसेंशियल हिन्दी डिक्शनरी (Essential Hindi Dictionary: A Teach Yourself Guide (TY: Language Guides) Paperback – February 10, 2012) : डॉ. रूपर्ट स्नेल

2. जर्मनी

(अ) हिन्दी -जर्मनी शब्दकोश: डॉ. हेल्मट नेस्पिताल
(आ) हिन्दी-जर्मनी शब्दकोश: एरिका क्लेम
(इ) जर्मनी-हिंदी कोश: डॉ. श्रीमती मारग्रेट गात्सलाफ

3. फ्रेंच

(अ) हिन्दी-फ्रांसिसी कोश: निकोल बलबीर

4. हंगेगियन

(अ)हंगेरियन – हिंदी शब्दकोश: पेतैर कोश

5. रोमानियन

(अ)हिन्दी –रोमानिया शब्दकोश: डॉ. विद्यासागर दयाल – सहलेखक-इयोन
पेतेरेस्कु
(आ) रोमानिया – हिंदी शब्दकोश: डॉ. विद्यासागर दयाल – सहलेखक इयोन
पेतेरेस्कु

6. रूसी

(अ) हिन्दी-रूसी कोश: डॉ. अलेक्जेइ पेत्रोविच बारान्निकोव
(आ) रूसी-हिन्दी शब्दकोश – जेएम दिमशित्स
(इ) संक्षिप्त हिन्दी-रूसी एवं रूसी-हिन्दी शब्दकोश – जेएम दिमशित्स
(ई) रसियन टू हिन्दी डिक्शनरी – स्यामु वेल्लॉण्ड।

7. जापानी

(अ) संक्षिप्त हिन्दी कोश (हिन्दी-जापानी तथा जापानी-हिन्दी): प्रो. क्यूयादोइ
(आ) जापानी-हिन्दी शब्दकोश – प्रोफेसर कात्सुरा कोगा
(इ) हिन्दी – जापानी शब्दकोश – प्रोफेसर कात्सुरा कोगा

8. चीनी

(अ) हिन्दी-चीनी कोश – पेइचिंग विश्वविद्यालय के हिन्दी अध्यापकों द्वारा लगभग 30 वर्ष पूर्व निर्मित शब्द कोश (लगभग 45 हजार हिन्दी शब्द)
(आ) बृहद हिन्दी-चीनी कोश – पेइचिंग विश्वविद्यालय के हिन्दी अध्यापकों द्वारा निर्मित लगभग 90 हजार हिन्दी शब्दों का कोश

9. उज़्बेकी

(अ) हिन्दी-उज्बेकी शब्दकोश: डॉ. श. अहमेदोव

4 हिन्दी-भाषा का भाषा वैज्ञानिक अध्ययन

1. संयुक्त राज्य अमेरिका –
• एन इंट्रोडक्शन टू हिंदी सिन्टैक्स : एन यमुना काचरु
• द हिंदी- उर्दू रिफरेंस मैनुअल : फ्रेंकलिन साउथवर्ग

2. इंग्लैंड – प्रो. आरएस मैकग्रेगर द्वारा लिखे गए ’आउटलाइन ऑफ् हिंदी ग्रामर विद एक्सरसाइजिज’ का हिन्दी के भाषावैज्ञानिक अध्ययनों की परम्परा में विशेष स्थान है। सन् राल्फ लिलि टर्नर के भाषा वैज्ञानिक कार्यों का महत्व न केवल हिन्दी अपितु भारतीय आर्यभाषाओं के अध्ययन की दृष्टि से है। इनके बारे में पहले चर्चा की जा चुकी है।

3. जर्मनी – डॉ. श्रीमती मारग्रेट गात्स्लाफ: ‘हिंदी व्याकरण’

4. रूस – डॉ. लाज्मन दीमशित्स: ‘हिंदी व्याकरण की रूपरेखा’। हिन्दी भाषा के विभिन्न पक्षों पर कार्य करने वाले रूसी विद्वानों में रोमशित्स, चेर्निशेव, लिपरोव्स्की तथा पियोत्र एलेक्सेविच बारान्निकोव के नाम सर्वाधिक उल्लेखनीय हैं।

5. फिन्लैंड – डॉ. बर्तिल तिक्कनेन ने ‘हिंदिन किएलिओप्पि’ (हिन्दी का व्याकरण) लिखा जो हेलसिंकी से सन् 1991 में प्रकाशित हुआ।

6. जापान – जापान के भाषा वैज्ञानिकों ने हिंदी के विविध पक्षों पर भाषा वैज्ञानिक दृष्टि से अनेक कार्य सम्पन्न किए हैं। प्रकाशित पुस्तकों, शोधप्रबंधों एवं लेखों की सूची प्रो. कात्सुरो कोगा ने ‘जापान में हिंदी अध्ययन-अध्यापन की स्थिति’ शीर्षक लेख में प्रस्तुत की है। इनमें निम्नलिखित अध्ययन अधिक उल्लेखनीय हैं:

1. इन्दोबुन्तेन् (हिन्दी व्याकरण): प्रो. एइजो सावा 2. हिंदी ध्वनिग्राम और वर्तनी: तेजीसाकाता 3. हिन्दी फोनोलॉजी: नोरिहिको उचिदा 4. हिंदी भाषा का परिचयात्मक व्याकरण: तोशिओ तानाका एवं काजुहिको माजिदा 5. आधुनिक हिंदी में संयुक्त क्रियाएं: तोमियो मिज़ोकामि 6. मुल्ला वजही कृत ‘सबरस‘ की दक्खिनी हिन्दी का भाषा विश्लेषण: प्रोफेसर अकिरा ताकाहाषि।
2.प्रोफेसर काजुहिको माजिदा ने कम्प्यूटर की सहायता से प्रेमचन्द के गोदान में प्रयुक्त सभी क्रियाओं का भाषा वैज्ञानिक अध्ययन सम्पन्न किया है। यह अध्ययन वर्णानुक्रम तथा प्रत्येक क्रिया की उपन्यास में आवृत्ति सहित सम्पन्न हुआ है।

7. चीन – प्रोफेसर यिन होंग युएन का हिन्दी व्याकरण (चीनी भाषा में) उपलब्ध है।

8. थाईलैण्ड – डॉ. चालोड. सारबद्नूक ने व्यावहारिक हिन्दी व्याकरण की रचना की है।

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1 Comment on "द्वितीय महायुद्ध के पश्चात विदेशों में हिन्दी भाषा से सम्बंधित अध्ययन"

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डॉ. सुधेश
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डा सुधेश

बड़ा सूचना प्रद़ और पठनीय लेख है । इतनी सूचनाएँ एक स्थान पर एकत्र कर डा जैन ने बड़ा महत्त्वपूर्ण काम किया हैं । उन्हें बधाई ।

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