धर्म-अध्यात्म ‘ईश्वर’ शब्द के शासक से शिव होने की यात्रा ! March 19, 2026 / March 19, 2026 | Leave a Comment ईश्वर सत्य है सत्य ही शिव है शिव ही सुंदर है? ईश्वर सत्य है, Read more » ईश्वर सत्य है सत्य ही शिव है शिव ही सुंदर है? ईश्वर सत्य है
खान-पान टप-टप टपक रहे महुआ की मादकता से महक रही है धरती March 17, 2026 / March 17, 2026 | Leave a Comment धरती पर फूला हुआ टप-टप गिर रहा महुआ किसी रस भरे मोतियों से कम नजर नहीं आता है। आकाश में चंदा मामा अपनी प्यारी सी चितवन के साथ खिले हुए है इस रस भरे वातावरण में महुआ की मादकता प्रेमियों Read more » महुआ महुआ की मादकता
लेख हिमालय की दिव्य औषधियों-धातुओं के मिश्रण से गंगाजल अमृततुल्य बना ! March 17, 2026 / March 17, 2026 | Leave a Comment भारत दार्शनिक देश है, जहा का दर्शन गंगाजल को अमृत मानता है और जीवन के अंतिम क्षणों में वुजुर्ग –बीमार व्यक्ति के मरणासन्न अवस्था में Read more » गंगाजल अमृततुल्य
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म प्रयागराज में गंगा-यमुना संगम दृश्यमान, त्रिवेणी ‘सरस्वती’नदी अदृश्य क्यों ? March 16, 2026 / March 16, 2026 | Leave a Comment भारत की सभी पुण्यदायिनी नदियों में पुण्य सलिला गंगा एवं यमुना के समान सरस्वती की पवित्रता एवं महता की कल्पना देश के प्रत्येक सनातनी के ह्रदय में चिरस्थायी Read more » Ganga-Yamuna confluence is visible in Prayagraj why is Triveni 'Saraswati' river invisible
धर्म-अध्यात्म ईश्वरों के ईश्वर का हृदयगान है भगवद्गीता March 12, 2026 / March 12, 2026 | Leave a Comment जीवन के महाविनाशकारी परिदृश्य से पूर्व की विभीषिका में ईश्वरों के ईश्वर श्रीकृष्ण के ह्रदयगान से तरंगित माधुर्यपूर्ण ! गीता सच मायने में भगवान श्रीकृष्ण Read more » Bhagavad Gita Bhagavad Gita is the heart song of God of Gods
लेख पांडव निष्ठा और भावुकता से सर्वसम्पन्न थे वही कौरव सर्वदोषसम्पन्न थे November 7, 2025 / November 7, 2025 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव सत्य स्वयं प्रतिष्ठित होता है ओर सब कुछ सत्य का आधार पाकर प्रतिष्ठित होता है। आज विश्व में प्रतिष्ठित होने वाला यह मनुष्य दुखी क्यों है? चारों युगों में सुख दुख असमान रूप से प्रतिष्ठित रहा है जिसमें अगर द्वापरयुग का प्रकरण लिया जाए तो यह सभी के लिए प्रासंगिक होगा। इस युग […] Read more » कौरव सर्वदोषसम्पन्न
कला-संस्कृति गुरूनानक देव ने होशंगाबाद में स्वर्णस्याही से लिखी थी श्री गुरु ग्रंथ साहिब पोथी,आज भी दर्शन को उमड़ती है भीड़ November 6, 2025 / November 6, 2025 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक दृष्टि से प्राचीन, नर्मदापुर तथा आधुनिक काल में होशंगाबाद जिले का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। पुण्य सलिला माँ नर्मदा की महिमा न्यारी है तभी यहाँ साम्प्रदायिक सदभाव की गौरवमयी मिसालें देखने को मिलती है। सिखों के आदिगुरु श्री गुरूनानक देव भी नर्मदा के महात्म को जानते थे तभी वे […] Read more » होशंगाबाद में स्वर्णस्याही से लिखी थी श्री गुरु ग्रंथ साहिब पोथी
धर्म-अध्यात्म पर्व - त्यौहार भारत में पहली दीपावली कब और कैसे मनाई गई ? October 17, 2025 / October 17, 2025 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव वरिष्ठ पत्रकार दीपोत्सव पर्व प्रथम बार कब,कैसे और कंहा प्रारम्भ हुआ ? इसका उल्लेख किसी पुराण या शास्त्र में अधिकारिता के साथ अभिव्यक्त नहीं किया गया है, किन्तु प्रथम दीपावली दैत्यराज हिरण्याक्ष के अत्याचार, रक्तपात, लूटमार आदि से पीड़ित प्रजा को शूकररूपधारी विष्णु के वराह अवतार द्वारा दिलाई […] Read more » When and how was the first Diwali celebrated in India भारत में पहली दीपावली कब
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म रंगोली बिना सुनी है हर घर की दीपावली October 17, 2025 / October 17, 2025 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव दीपावली पर रंगोली के बिना घर आँगन सुना समझा जाता है। जब रंगोली सज जाती है तब उस रंगोली के बीच तेल- घी का दीपक अंधकार को मिटाता एक संदेश देता है वही आज रंगोली के बीच पटाखे छोडने को लोग शुभ मानते है । पौराणिक या प्राचीन इतिहास मे मनुष्य ने लोक […] Read more »
कला-संस्कृति लिंग रूप में शिव है, विश्व के पालक और संहारक July 28, 2025 / July 28, 2025 | Leave a Comment ब्रह्मा, विष्णु और महेश में से मुझे महेश के स्वरूप और उनकी महत्ता जानने की इच्छा प्रारम्भ से ही रही है। शिव पुराण , लिंगपुराण सहित अन्य पुराणों में शिव और विशेषतः शिव तथा लिंग पुराण में शिव के स्वरूप का अध्ययन करना चाहा और उसी क्रम में यह विषय संज्ञान में आया की शिव […] Read more » Shiva in the form of Linga is the protector and destroyer of the universe विश्व के पालक और संहारक
कला-संस्कृति पर्यावरण वेदों में पर्यावरण के महत्व और प्रकृति सुरक्षा चक्र को हमने ध्वस्त किया ! July 24, 2025 / July 24, 2025 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव पृथ्वी को ईश्वर का रूप मानने वाले भारत के मनीषियों ने हजारों वर्ष पूर्व मानव जीवन के कल्याणार्थ सृष्टि के पर्यावरण का महत्व और उसकी रक्षा को समझा और प्रकृति से सांनिध्य, संवेदनशीलता कायम रखते हुए मानवीय रोगों के उपचार तथा स्वास्थ्य-सम्बन्धी अनेक उपयोगी तत्वों का सृष्टि के योगदान से जोड़ते हुए उसका […] Read more » वेदों में पर्यावरण
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म शोकाकुल अर्जुन को गीता वाणी से मिली मुक्ति April 29, 2025 / April 29, 2025 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव वरिष्ठ पत्रकार युद्ध क्षेत्र कुरुक्षेत्र में एकत्रित सेना के मध्य सभी सगे सम्बंधियो को महाभारत युद्ध में शामिल देख अर्जुन शोक से ग्रसित हो गया तब श्रीभगवान श्रीकृष्ण उन्हें गीता के ज्ञान द्वारा युद्ध के लिए प्रेरित करते है किन्तु अर्जुन को भगवान् की वाणी सुनायी नहीं पड़ती; किन्तु कृष्ण ने देखा […] Read more » Grief-stricken Arjuna found relief from the words of the Gita गीता वाणी से मिली मुक्ति