कविता हम जो छले, छलते ही गये December 30, 2019 / December 30, 2019 | Leave a Comment 15 अगस्त की वह सुबह तो आयी थी जब विदेशी आंक्रान्ताओं से हमें शेष भारत की बागड़ोर मिली हम गुलाम थे, आजाद हुये आजादी के समय भी हम छले गये थे आज भी हम अपनों के हाथों छले जा रहे है। भले आज हम आजादी में साॅसे ले रहे है पर यह कैसी आधी अधूरी […] Read more » छलते ही गये हम जो छले
व्यंग्य स्वर्ग में ऑखों देखी हिंसा भी नहीं छपवा पाये पत्रकार November 21, 2019 / November 21, 2019 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीवस्वर्ग में लोकतंत्र नहीं राजतंत्र है। इन्द्र वहॉ के लोकपाल है जिनके राजकाज में कोई भी स्वर्गवासी या देवता दखल नहीं देते सभी खुश है, आनन्द से है मानो ब्रम्हानन्दी हो गये है। होशंगाबाद के पत्रकार प्रश्न कर चुके थे कि अगर सब आनंन्दमय है तो […] Read more » स्वर्ग में ऑखों देखी हिंसा
व्यंग्य स्वर्गलोक में पत्रकारो का हँगामा November 21, 2019 / November 23, 2019 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव पत्रकार की सारी नस्ले जो दुनिया में कहीं नहीं है, होशंगाबाद में मिल जायेगी इसलिये नर्मदातट पर बसा होशंगाबाद नगर भूलोक का अजीब शहर बन गया है। यहॉ के लोग दुनिया में सबसे अनूॅठे है। नेताओं का तो क्या कहना, बड़े बिरले है जिन्हें म्युजियम मे होना चाहिये वे होशंगाबाद में […] Read more » स्वर्गलोक में पत्रकारो का हँगामा
समाज दीपावली पर ग्वालिन की पूजा, क्यों करता है ग्वाला समाज ? November 9, 2018 / May 9, 2020 | 2 Comments on दीपावली पर ग्वालिन की पूजा, क्यों करता है ग्वाला समाज ? आत्माराम यादव पीव कार्तिक अमावस्या को दीपावली मनाने के लिये सभी यथायोग्य तैयारी करते है वहीं होशंगाबाद सहित आसपास के अनेक गॉवों में बसे ग्वाला दिये के साथ मिटटी की बनी ग्वालिनों को लाकर पूजते है। पिछले 40-45 सालों से मेरे मन में एक सवाल उठता रहा है कि आखिर दीपावली पर मिट़टी की सुन्दर […] Read more » क्यों करता है ग्वाला समाज ? चंपककला चित्रा दीपावली पर ग्वालिन की पूजा परमश्रेष्ठ सखिया ललिता भगवान श्रीकृष्ण ललिता विशाखा