कविता मैं और मेरी अलमारी में बंद किताबें ! April 24, 2025 / April 24, 2025 | Leave a Comment मैं और मेरी अलमारी में बंद किताबें ! आत्माराम यादव मैं बचपन से ही किताबों से बहुत प्रेम करता हूं, पहले लोटपोट, मधुर मुस्कान, नंदन गुडिया जैसी किताबों का चस्का लगा था धीरे धीरे सरिता,कादम्बिनी, माया निरोगधाम जैसी पत्रिकाओं का शौक मुझे सातवें आसमान पर पहुंचा देता था। किताबें पढ़ने के जुनून ने 10 साल […] Read more » मैं और मेरी अलमारी में बंद किताबें
लेख चरित्र निर्माण के बिना दौड़ता जीवन! April 23, 2025 / April 23, 2025 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव जिन्दगी के 60 बसंत पंख लगाकर कब फुर्र से उड़ गए पता ही नहीं चला किन्तु एक पुराना वाकया याद आ गया जहा स्कुल से मिले चरित्र प्रमाणपात्र के बाद जीवन में पुलिस से प्रमाणित चरित्र प्रमाण पत्र माँगा गया, मैंने जबाव दिया की जब बिना चरित्र के अब तक गुजर गई तब वे पुलिस वाले जो खुद चरित्रहीन है वे कैसे और क्यों मेरे चरित्र की गारंटी लेंगेl चरित्र मेरा है इसलिए अपने चरित्र की गारंटी मैं खुद ले सकता हूँ, पुलिसवाले गारंटी दे यह बात गले नहीं उतरी थीl मेरे चरित्र के विषय में 100 प्रतिशत गारंटी मेरी मान्य होने चाहिए वाकी जो घटिया चरित्र को छुपाकर में अपने घर परिवार या बाल सखा आदि के साथ रहता हूँ वे मेरे सच्चे मित्र होने के साथ मेरे सुख दुःख के साथी भी है l मेरे विषय में मेरे मोहल्ले पड़ोस या साथ रहने वाले फिफ्टी फिफ्टी मेरे चरित्र का प्रमाण दे तो समझ आती है किन्तु जो पुलिस मुझे न जानते समझते मेरे चरित्र की गारंटी ले तो वैसी ही बात होगी जैसे आज महंगाई ढीठ- हरजाई-जैसी प्रेमिका के रूप में सोने की कीमतों को आसमान पर बिठाले है, भला सोने के उतार चढ़ाव को यह बाजार क्या जाने, जब बाजार भावों को नहीं समझ सकता तो पुलिस जो कहीं भी मेरे न तो आगे है और न पीछे है वह चरित्र की गारंटी कैसे ले सकती है? जरा विचार कीजिये मैं जीवन में कुछ बनना चाहता हूँ किन्तु न तो सरकार बनाने को तैयार है और न ही इस देश में एसी व्यवस्था है की लाखों रूपये की इंजीनियर, ला, प्रोफ़ेसर आदि की डिग्री लेने के बाद आप इंजीनियर, जज या कोई पद पर जा सकेl देश में लाखो डिग्रीधारी है वे […] Read more » चरित्र निर्माण
व्यंग्य लोकतंत्र की जान है थू-थू ! April 21, 2025 / April 21, 2025 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव नर्मदापुरम दुनिया का सबसे विचित्र शहर है, इसकी विचित्रता के चर्चे होते है पर क्या विचित्र है उसके चित्र किसी के पास नहीं है, यानी दस्तावेजों में यहाँ के सारे विचित्र कार्य और योजनायों के स्वरूप बनते- बिगड़ते है जिसके लिए प्रदेश सरकार करोड़ों रूपये भेजती है। मसलन वर्ष-2012 में किसी ने सेठानी […] Read more » Spit-shit is the lifeblood of democracy!
व्यंग्य पुरुषों सत्ता पर नारी का एकछत्र साम्राज्य April 12, 2025 / April 16, 2025 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव वरिष्ठ पत्रकार दुनिया भर के धुरन्धर ज्ञानियों-ध्यानियों, धर्मज्ञ, तत्ववेत्ताओं के होते हुये इस समाज में मुझ जैसा महामूर्ख भी है जो नर और नारी के बीच उनकी छुपी हुई प्रतिभाओं-कलाओं से हटकर नर में छिपी नारी को देखता है। पुरुषों में नारी पुरुषोत्तमा है जो अणिमा,लघिमा सिद्धिया है, प्रकृति में संध्या, ऊषा, रजनी, पृथ्वी है, नदिया में गंगा,यमुना, सरस्वती, नर्मदा, गोदावरी, कावेरी है, भाषाओं […] Read more »
लेख हिंदी दिवस हिन्दी की गिनतियों को सरल बनाने, सुधार आवश्यक ! April 10, 2025 / April 10, 2025 | Leave a Comment आत्माराम यादव वरिष्ठ पत्रकार संसार की प्रचलित भाषाओं का वर्गीकरण करें तो देवभाषा संस्कृत सभी की जननी है जिसके वंशानुगत अन्य सभी भाषाएँ सहित देवनागरी लिपि हिन्दी भी है। मनुष्यों के कुल गौत्र की भांति अगर भाषाओं को विभक्त करे तो हिन्दी, अँग्रेजी के अलावा अन्य भाषाओं के कुल, उपकुल, शाखाओं, उपशाखाओं तथा समुदायों में विभक्त कर समस्त […] Read more »
व्यंग्य गूगल गुरु के कचरा ज्ञान से पैदा होते सम्पूर्णानन्द पत्रकार? April 7, 2025 / April 7, 2025 | Leave a Comment आत्माराम यादव जहां सबेरा है, वही बसेरा है ओर बसनेवाले कई किस्म के है। आजकल यू-ट्यूबर- व्हाट्सअप, इस्ट्राग्राम कुटुंबएप, फ़ेसबूक आदि पर विशेष प्रकार की वाहियात अक़्लमंद ज्ञानी बेशर्मियों की कब्जेवाली मीडिया खरपतवार गाजरघाँस की तरह फ़ेल चुकी है, इससे बचने के सारे उपाय असफल है। जिसने कभी कागज कलम छुआ नहीं वही गूगल गुरु की प्रेरणा से […] Read more » गूगल गुरु के कचरा ज्ञान
कला-संस्कृति भारत में शक्ति उपासना की सर्वव्यापकता April 4, 2025 / April 7, 2025 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव सनातन धर्म की अनूठी परंपरा है जिसमे परमात्मा के दो रूप हैं-माता और पिता। सत्य, ज्ञान, प्रभुता, अनन्तता, न्याय, उत्कृष्टता, परात्परता और सर्वशक्तिमानता इत्यादि जैसे गुण ईश्वर के पिता स्वरूप से सम्बन्धित हैं। जबकि सुन्दरता, प्रेम, शक्ति, प्रखरता, करुणा, अनन्यता, शाश्वतता और कृपा जैसे गुण परमात्मा के माता से सम्बन्धित हैं। संसार में परमात्मा के इन दो पक्षों की पूजा किसी न […] Read more » The prevalence of Shakti worship in India भारत में शक्ति उपासना
कला-संस्कृति मात भारत को जल्दी से बलवान कर April 2, 2025 / April 2, 2025 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीवर नवरात्रि पर्व पर करोड़ों हाथ नवदुर्गा के विभिन्न स्वरूपो के समक्ष आकाश की ओर उठे हुये अपने मुखारबिन्द से प्रस्फुटित प्रार्थना में अपने मन को उनके चरणों में लगाए तीव्र ओज भरे समवेत स्वरों में सुनो माता हमारी पुकार पुकार का जयघोष करते हुये गाते है, तब प्रार्थना में शक्ति कि भक्ति रूप […] Read more » भारत को जल्दी से बलवान कर
लेख किवाड़ खिड़कियाँ से होते है लड़के लड़कियां March 26, 2025 / March 26, 2025 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव जरा सोचिए जब मानव ने पहली झुग्गी- झोपड़ी, मकान या भवन की कल्पना की होगी तब उसके मस्तिष्क में कितना भूचाल आया होगा ओर तब जिसने भी पहला आवास बनाया होगा तब उसमें लगने वाला दरवाजा/द्वार दुनिया का पहला दरवाजा होगा जिसमें उसके द्वारा किवाड़ की कल्पना ओर उस आवास की दीवालों […] Read more » Boys and girls are born through doors and windows किवाड़ खिड़कियाँ
पर्यावरण लेख प्रकृति ओर पर्यावरण के सुरक्षा कवच वृक्षों को बचाए रखें March 4, 2025 / March 4, 2025 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव आज हमें प्रकृति की आवश्यकता है, प्रकृति का सुरक्षा कवच वनक्षेत्र है, वनों की पहचान वहाँ उगने वाले वृक्षों से है ओर यही वृक्ष हमारे पर्यावरण के लिए हमे जीवांदायिनी वायु प्रदान कर हमारी सुरक्षा के कवच बने हुये है। हम परंपरागत होली का पर्व मनाने के लिए हर साल लाखों वृक्षों का विनाश […] Read more » प्रकृति ओर पर्यावरण
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म प्रयागकुम्भ की उत्पत्ति तथा इतिहास February 27, 2025 / February 27, 2025 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव पृथिव्यां कुम्भयोगस्य चतुर्धा भेट उच्यते। चतुस्थले च पतनात् सुधाकुम्मस्य भूतले ।। विष्णुद्वारे तीर्थराजेऽपन्त्यां गोदावरी तटे। सुधाबिन्दुविनिक्षेपात् कुम्मपर्वेति विश्रुतम्।।” अर्थात अमृतकुम्भ के छलकने पर पृथ्वीतल में चार स्थानों-हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन तथा गोदावरी तट अर्थात् नासिक में अमृतकण गिरने से कुंभपर्व शुरू हुआ। दूसरे श्लीक में प्रयाग में होने वाले कुम्भपर्व की ग्रहस्थिति और महिमा के बारे में उद्धृत किया हैं- मकरे च दिवाकरे यूपगे […] Read more » प्रयागकुम्भ की उत्पत्ति
शख्सियत समाज साक्षात्कार सहकारिता को समर्पित युगपुरुष लीलाधर पंडित February 26, 2025 / February 26, 2025 | Leave a Comment मध्यप्रदेश अपेक्स बैंक के रिटायर्ड केडर आफिसर ओर सहकारिता विशेषज्ञ लीलाधर पंडित जो एल डी पंडित के नाम से पहचाने जाते है से विगत 30 वर्षों से संपर्क में हूँ। सहकारी साख एवं बैंकिंग के क्षेत्र में उन्होंने काम करते 60 वर्ष से अधिक का समय व्यतीत किया है ओर उनकी पूरी सेवाकाल एक निष्ठावान […] Read more »