लेखक परिचय

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

‘नेटजाल.कॉम‘ के संपादकीय निदेशक, लगभग दर्जनभर प्रमुख अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन तथा भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष।

सूर्य नमस्कार का मजहब क्या?

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डा. वेद प्रताप वैदिक भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी मोहम्मद कैफ व मोहम्मद समी पर आजकल उनके कुछ मुसलमान भाई ही बुरी तरह से बरस रहे हैं। पहले समी से पूछा गया कि उन्होंने पत्नी के ऐसे फोटो ‘पोस्ट’ क्यों किए, जिनमें हिजाब का कोई ख्याल नहीं रखा गया और अब मो. कैफ पर यह कहकर हमला… Read more »

अखिलेश-मुलायम दंगल, भिड़ने से बचे

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जैसा कि मैंने कल लिखा था, अपने टीवी चैनल और अखबार लखनऊ के मामले में जरुरत से ज्यादा आशावादी दिखाई पड़ रहे थे। मैंने मुंबई में बैठे हुए लिखा था कि लखनऊ में होने वाले समाजवादी पार्टी के अधिवेशन में धमाका हो सकता है। मैंने समाजवादी पार्टी के टूटने की भी आशंका व्यक्त की थी।… Read more »



क्यों नौजवान देश छोड़ना चाहते?

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‘हिंदुस्तान टाइम्स’ में छपे एक सर्वेक्षण ने आज मुझे जरा चौंका दिया। इसके अनुसार देश के पढ़े-लिखे और शहरी नौजवानों में आधे से भी ज्यादा भारत में नहीं रहना चाहते। वे भारत को अपनी अटल मातृभूमि नहीं मानते। उन्हें मौका मिले तो वे किसी अन्य देश में जाकर हमेशा के लिए बसना चाहेंगे। उन नौजवानों… Read more »

राहुल भूकंप क्यों नहीं ला रहे?

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कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी आजकल गजब की बमबारी कर रहे हैं। कभी वे कहते हैं कि मुझे संसद में अगर बोलने दें तो भूकंप आ जाएगा और कभी वे कहते हैं कि मुझे नरेंद्र मोदी के ‘व्यक्तिगत भ्रष्टाचार’ की ‘विस्तृत जानकारी’ है। दिक्कत यही है कि उन्हें संसद में यह भांडाफोड़ नहीं करने दिया… Read more »

पिता को पुत्र की एतिहासिक भेंट : लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक आज उन्नाव में ‘लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे’ का उदघाटन हुआ। ‘एक्सप्रेस-वे’ को हिंदी में क्या कहा जाए? महापथ या द्रुत-मार्ग ! ये दोनों हिंदी शब्द, अंग्रेजी के शब्द से अधिक सरल और छोटे हैं। ‘महापथ’ मुझे ज्यादा अच्छा लगा, क्योंकि जब लोगों को द्रुत-मार्ग की आदत पड़ जाएगी तो वह द्रुत नहीं रहेगा… Read more »

नेहरु और पटेल का संगम थीं इंदिराजी

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक श्रीमती इंदिरा गांधी का शताब्दि-वर्ष आज शुरु हो रहा है। केंद्र में कांग्रेस की सरकार नहीं है और बड़े नोटों की भगदड़ मची हुई है। ऐसे बदहवासी के माहौल में इस अवसर पर इंदिराजी को पता नहीं कितना याद किया जाएगा लेकिन इसमें शक नहीं है कि वे बेजोड़ प्रधानमंत्री रही हैं,… Read more »

नेता बाट दें अपना काला धन!

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डा. वेद प्रताप वैदिक ‘काले धन’ के सवाल पर जितने नेता लोग बौखलाए हैं, उतनी बौखलाहट उद्योगपतियों और व्यवसायियों में देखने में नहीं आ रही है। इसका अर्थ क्या है? इसका एक अर्थ यह भी हो सकता है कि काले धन के जितने बड़े नगद भंडार नेताओं के पास हैं, उतने उद्योगपतियों और व्यवसायियों के… Read more »

‘काला धन’: घबराइए मत

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जहां तक नगदप्रेमी करोड़पतियों, अरबपतियों, खरबपतियों और हमारे महान नेताओं का प्रश्न है, उन्हें भी ज्यादा डरने की जरुरत नहीं है। वे अपने हजारों कर्मचारियों और लाखों पार्टी-कार्यकर्ताओं में से एक-एक को लाखों पुराने नोट देकर उन्हें नये नोटों में बदलवा सकते हैं। उप्र के नेताओं ने यह ‘पवित्र कार्य’ शुरु भी कर दिया है। नेता ही नेता को पटकनी मार सकते हैं। जाहिर है कि सरकार डाल-डाल है तो सेठ और नेता पात-पात हैं।

ट्रंप की जीत और भारत

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कोई आश्चर्य नहीं कि नए ट्रंप-प्रशासन में कुछ सुयोग्य भारतीयों को प्रभावशाली पद भी मिलें। ट्रंप के भारतवंशी समर्थकों का प्रभाव उन्हें भारत की तरफ जरुर झुकाएगा। तीसरा, ट्रंप ने आतंकवाद के खिलाफ जितने जबर्दस्त बोल बोले हैं, आज तक किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने नहीं बोले हैं। यदि ट्रंप अपनी बात पर टिके रहे तो वे विश्व में फैले हुए आतंकवाद का समूलनाश करने में कसर उठा न रखेंगे।

दिल्ली का गैस-चेंबर: कैसे बचें?

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किसी जमाने में तानाशाह हिटलर के गैस-चेंबर कुख्यात थे। एक चेंबर में एक यहूदी को बिठा दिया जाता था और मिनिटों में उसका दम घुट जाता था लेकिन जब कोई पूरा शहर ही गैस-चेंबर बन जाए तो हालत क्या हो सकती है? पिछले सप्ताह को दिल्ली का इतिहास कभी भुला नहीं पाएगा। इतना दमघोंटू धुंआ… Read more »