लेखक परिचय

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

‘नेटजाल.कॉम‘ के संपादकीय निदेशक, लगभग दर्जनभर प्रमुख अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन तथा भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष।

अस्थिरता ही नेपाल की पहचान

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक हमारा पड़ौसी देश नेपाल भारत के बड़े-बड़े प्रांतों से भी छोटा है लेकिन उसकी हालत यह है कि वहां हर साल एक नया प्रधानमंत्री आ जाता है। कोई भी प्रधानमंत्री साल दो साल से ज्यादा चलता ही नहीं है। पिछले दो प्रधानमंत्री तो एक-एक साल भी नहीं टिके। अब शेर बहादुर देउबा… Read more »

गोरखा मोर्चे का अलगाववाद

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ममता बनर्जी ने यहां तक कह दिया है कि वे पहाड़ी-क्षेत्र के गोरखा बच्चों पर बांग्ला भाषा नहीं थोपेंगी। यह आंदोलन तो इसी बात को लेकर शुरु हुआ है कि बांग्ला भाषा सभी बच्चों के लिए अनिवार्य कर दी गई थी। अब आंदोलन अपने आप खत्म हो जाना चाहिए था लेकिन अब वह पृथक गोरखालेंड की मांग में बदल गया है।



महाकिसानों की महा लूटपाट

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2012 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) लगभग 100 लाख करोड़ रु. था याने इन तथाकथित ‘महाकिसानों’ ने जीडीपी से पौने सात गुना काला धन पैदा किया। यदि ताजा आंकड़ा सरकार बताए तो यह काला धन अब और भी ज्यादा होगा। यह कानूनन करमुक्त है। यह खुली लूट-पाट नहीं है तो क्या है ? इसमें कई उद्योगपति, पूंजीपति, नेता और नौकरशाह शामिल हैं। इन्होंने जगह-जगह अपने छोटे-मोटे फार्म-हाउस बना रखे हैं। ये एशो-आराम के अड्डे होते हैं। वहां कुछ खेती और बागवानी का नाटक भी रच लिया जाता है।

किसान-आंदोलन: कुछ अच्छी पहल

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कर्ज माफी का एक नुकसान यह भी है कि कहीं यह किसानों की एक लत ही न बन जाए लेकिन फिर भी कम से कम एक बार तो किसानों को यह तात्कालिक राहत मिलनी ही चाहिए। किसानों को स्थायी राहत मिले, इस दिशा में मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने कुछ अच्छे कदमों की घोषणा की है। जैसे हर गांव और शहर में किसान बाजार बनाए जाएंगे, जहां किसान सीधे स्वयं अपनी चीजें बेच सकेंगे। अगर बिचौलिए नहीं होंगे तो जो प्याज़ उसे 5 रु. किलो बेचनी पड़ती है, उसके उसे 15 से 20 रु. किलो तक मिलेंगे।

शंघाई के अखाड़े में भारत-पाक

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नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में पाकिस्तान का नाम लिए बिना आतंकवाद और चीन का नाम लिए बिना ‘ओबोर’ के द्वारा भारतीय संप्रभुता के उल्लंघन की बात कही। बहुत अच्छा किया। यह विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को बीजिंग में हुए ‘ओबोर’ सम्मेलन में जाकर कहना था। अब भूल-सुधार हो गया लेकिन शंघाई सहयोग संगठन से बहुत ज्यादा उम्मीद करना ठीक नहीं होगा, क्योंकि इसके छह सदस्यों में चीन और रुस के अलावा मध्य एशिया के वे चार मुस्लिम राष्ट्र हैं, जो 20 साल पहले तक रुस के प्रांत रहे हैं।

ईरान में आतंकः यह कैसा इस्लाम ?

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ईरान में सुन्नियों पर वहां की सरकार और आम जनता भी कड़ी नजर रखती है। खास तौर से तब जबकि वे अरब हों। उनके फारसी के अटपटे उच्चारण से ही वे तुरंत पहचाने जाते हैं। इसीलिए वहां आतंक की घटनाएं कम ही होती हैं लेकिन इस समय अरब देशों ने ईरान के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। ईरान समर्थक देश, क़तर, पर प्रमुख अरब देशों ने अभी-अभी तरह-तरह के प्रतिबंध लगाए हैं।

किस काम की है, यह मौत की सजा ?

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बलात्कार की सजा इतनी सख्त होनी चाहिए कि किसी के मन में बलात्कार का विचार पैदा होते ही उसकी सजा की भयंकरता घनघनाने लगे। याने बलात्कार के मुकदमों का निपटारा प्रायः एक माह में ही होना चाहिए और मृत्युदंड बंद कोठरी में नहीं, जेल की चारदीवारी में नहीं, बल्कि कनाट प्लेस और चांदनी चौक जैसे खुले स्थानों पर दी जानी चाहिए और उनका जीवंत प्रसारण सभी चैनलों पर होना चाहिए। देखें, फिर देश में बलात्कारों की संख्या एकदम घटती है या नहीं ?

अरब-संकटः सुषमा पहल करें

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अरब देश अपने आप को मुसलमान कहते हैं लेकिन उनका इस्लाम उन्हें आपस में जोड़ने की बजाय तोड़ रहा है। क़तर नामक देश के साथ सउदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमारात, बहरीन, लीब्या और यमन ने अपने सभी प्रकार के संबंध तोड़ लिये हैं। ये सभी इस्लामी देश हैं। क्यों तोड़े हैं, इन्होंने अपने संबंध… Read more »

मुचकुंद दूबे के लालन शाह

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प्रो. मुचकुंद दूबे ने हिंदी में वह काम कर दिखाया है, जो रवीन्द्रनाथ टैगोर ने लालन शाह फकीर के लिए बांग्ला में किया था। लालन शाह एक बाउल संत थे, जिनका जन्म 1774 में हुआ माना जाता है और निधन 1890 में याने उन्होंने 116 साल की उम्र पाई। आज बांग्लादेश के घर-घर में उनके… Read more »

अंग्रेजी की पढ़ाईः बच्चों की तबाही

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक अंग्रेजी की अनिवार्य पढ़ाई हमारे बच्चों को कैसे तबाह कर रही है, उसके दो उदाहरण अभी-अभी हमारे सामने आए हैं। पहला तो हमने अभी एक फिल्म देखी, ‘हिंदी मीडियम’ और दूसरा इंडियन एक्सप्रेस में आज दिव्या गोयल का एक लेख पढ़ा, जिसका शीर्षक था, ‘इंगलिश विंगलिश’ ! ‘हिंदी मीडियम’ नामक इस फिल्म… Read more »