लेखक परिचय

प्रवीण गुगनानी

प्रवीण गुगनानी

प्रवीण गुगनानी, दैनिक समाचार पत्र दैनिक मत के प्रधान संपादक, कविता के क्षेत्र में प्रयोगधर्मी लेखन व नियमित स्तंभ लेखन.

युवा भारत हेतु प्रेरणा स्त्रोत: शिकागो संभाषण

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सम्पूर्ण विश्व भर की अपेक्षा हम भारतीय युवाओं हेतु ईश्वर कितना कृपालु है यह केवल इस बात से समझा जा सकता है कि ईश्वर ने हमें प्रेरणा देनें हेतु भारत भू पर स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुष को जन्म दिया !! आज जबकि एतिहासिक दृष्टि से और वैश्विक दृष्टि से देखने पर हमें पता चलता है… Read more »

नोटबंदी – ममता का  ’’अभियान प्रधानमंत्री’’- विभक्त विपक्ष

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश मे #नोटबंदी क्या लागू की एक साथ कई कई प्र्त्यक्ष और अप्रत्यक्ष मोर्चे एक साथ जीत लिए। प्र्त्यक्ष तो वह जो सारे के सारे अर्थशास्त्री कह रहे हैं और जो अब देश की जनता को भी प्रत्यक्षतः लाभ दिख रहे हैं और अप्रत्यक्ष जीत वह जो मोदी को विपक्षपर हासिल हुई है।



लोकमंथन भोपाल – अमृत की खोज में एक महा आयोजन

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भोपाल में आयोजित त्रिदिवसीय आयोजन लोकमंथन की अवधारणा, आकार, आवेग और अनुवर्तन की दिशा तब ही स्पष्ट हो गई थी जब इस आयोजन के एक माह पूर्व, इस आयोजन के शुभंकर लोकार्पण हेतु एक कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री अनिल माधव दवे व फिल्म अभिनेता निर्देशक व चाणक्य सीरियल के कल्पक चंद्रप्रकाश द्विवेदी पधारे थे. जहां… Read more »

स्वान्त्र्योत्तर भारत का सर्वाधिक बड़ा निर्णय : उच्च मूल्यवर्ग के बैंकनोटों का विमुद्रीकरण

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कल जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए 500 और एक हजार रुपये के पुराने नोट बंद करने की घोषणा की और कि अब लोगों के पास मौजूद पांच सौ और एक हजार के नोट बाजार में मान्य नहीं होंगे तो देश भर में गजब का उत्साह छा गया. सम्पूर्ण देश के आम नागरिक इस स्थिति में अपनी विकट व विकराल समस्याओं को भी समझ रहें थे तब जिस प्रकार के प्रसंशा भाव को वे व्यक्त कर रहे थे या देश के नेतृत्व पर जिस प्रकार विश्वास व्यक्त कर रहे थे वह गजब के चरम राष्ट्रवाद के क्षण थे

दीवाली उपहार है हिंदुत्व की परिभाषा की पुनर्स्थापना

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हिन्दुस्थानियों के एक बड़े व महान पर्व दीवाली के एन पूर्व पिछले सप्ताह एक हलचल कारी घटना हुई , जिसनें हिन्दुओं की दीवाली पूर्व ही दीवाली मनवा दी हुआ यह कि देश केउच्चतम न्यायालय ने यह जांच प्रारम्भ की कि हिंदुत्व भारतीय जीवन शैली का हिस्सा है या फिर धर्म है. तीस्ता सीतलवाड़ द्वारा दायर… Read more »

तीन तलाक पर प्रगतिशील बने मुस्लिम समाज

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हाल ही में जब कोर्ट ने केंद्र से तीन तलाक के विषय में कोर्ट में हलफनामा प्रस्तुत करनें के लिए कहा तब नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछली सरकारों की तरह इस मुद्दें पर कन्नी काटने व चुप बैठे रहनें के स्थान पर संविधान की धारा 44 के मर्म को समझ कर अपनी जिम्मेदारी निभाई व तीन तलाक के मुद्दे पर स्पष्ट असहमति व्यक्त कर दी है. 1840 में यह विवाद प्रथम बार उभरा था और

राष्ट्रवाद के ज्वार में खून की दलाली का खलल 

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इस मध्य जो सबसे लाभकारी पक्ष रहा वह यह कि देश ने राष्ट्रवाद का एक नया ज्वार देखा जो लम्बे समय तक टिकने वाला  प्रतीत होता है. अब देखना यह है कि देश में उभरे इस राष्ट्रवाद के नए ज्वार को नरेंद्र मोदी और उनकी टीम अन्तराष्ट्रीय मंचों पर चीन पाकिस्तान सीमा पर कितना स्वर दे पाती है?!

सर्जिकल आपरेशन: वाह भारतीय सेना! वाह नमो !!

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उड़ी हमले के पूर्व भी भारतीय सेना, भारतीय आम जनता व भारतीय संसाधनों पर कई बार आतंकियों के हमले हुए और भारत शांत और विवश बैठा रहा था. भारतीय जनमानस में लाचारी का भाव व बेबसी का भाव जागृत हो रहा था. गत लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी के पाकिस्तान विरोधी नारों और भाषणों को लेकर और विशेषतः 56 इंच के सीनें वाली भाषा को लेकर वर्तमान सरकार पर तंज कसे जानें लगे थे.

अन्तराष्ट्रीय मंचों से पाक चीन का घेराव

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आसियान सम्मेलन, जी 20 और विएतनाम दौरे से एक बार फिर भारतीय प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने अपनी विदेश नीति की दहाड़ लगाई है और एक प्रकार से चीन और पाकिस्तान के विरुद्ध ललकार की हैटट्रिक लगा दी है. पाकिस्तान के विरुद्ध अपनी आवाज को अन्तराष्ट्रीय मंच से बुलंद करते हुए नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के… Read more »

निरंतर ह्रास की ओर बढ़ रहा वामपंथ

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मजदूर हितों के नाम पर अपनी पूरी की पूरी राजनैतिक रोटियाँ सेंकनें वाले वामपंथी ट्रेड यूनियनों को एक बड़ी असफलता का सामना करना पड़ा है. अंततः वामपंथी मजदूर संगठनों व वामपंथी राजनैतिक दलों द्वारा घोषित 2 सितम्बर का भारत बंद विफल हो ही गया. इसमें नया कुछ नहीं क्योंकि इस भारत बंद के विफल होनें… Read more »