लेखक परिचय

ललित गर्ग

ललित गर्ग

स्वतंत्र वेब लेखक

सेना की साख में सुराख होना चिन्तनीय

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ना की साख में यह पहला सुराख नहीं है। समय-समय पर अनेक सुराख कभी भ्रष्टाचार के नाम पर, कभी सेवाओं में धांधली के नाम पर, कभी घटिया साधन-सामग्री के नाम पर, कभी राजनीतिक स्वार्थों के नाम पर होते रहे हैं। एक बार नहीं कई बार सुराख हो चुके हैं। कभी जीप घोटाला तो कभी घटिया कम्बल खरीदने पर खूब विवाद हुआ था। कभी बोफोर्स तोप खरीद घोटाला तो कभी ताबूत खरीद में हेराफेरी के मामले उछलते रहे हैं। दाल खरीद में घोटाला हुआ तो दूध पाउडर घोटाला, अंडा घोटाला, घटिया जूतों की खरीद घोटाला भी चर्चित हुआ।

राजनीतिक का ‘शुद्धिकरण’ जरूरी

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सर्वोच्च अदालत ने दागियों को विधायिका से बाहर रखने के तकाजे से जो पहल की है उसका लाभ पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में तो नहीं मिल पाएगा, पर उम्मीद की जा सकती है कि अगले लोकसभा चुनाव से पहले जरूर कुछ ऐसी वैधानिक व्यवस्था बन पाएगी जिससे आपराधिक तत्त्व उम्मीदवार न हो सकें। एक समय था जब ऐसे किसी नियम-कानून की जरूरत महसूस नहीं की जाती थी, क्योंकि तब देश-सेवा और समाज-सेवा की भावना वाले लोग ही राजनीति में आते थे। पर अब हालत यह है कि हर चुनाव के साथ विधायिका में ऐसे लोगों की तादाद और बढ़ी हुई दिखती है जिन पर आपराधिक मामले चल रहे हों। हमारे लोकतंत्र के लिए इससे अधिक शोचनीय बात और क्या हो सकती है!



बचपन मुस्कुराने से महरूम न हो जाए

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– ललित गर्ग – इन दिनों बन रहे समाज में बच्चों की स्कूल जाने की उम्र लगातार घटती जा रही है, बच्चों के खेलने की उम्र को पढ़ाई-लिखाई में झोंका जा रहा है, उन पर तरह-तरह के स्कूली दबाव डाले जा रहे हैं। अभिभावकों की यह एक तरह की अफण्डता है जो स्टेटस सिम्बल के… Read more »

चुनावों की तैयारी मतदाता भी करें

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एक बात बार-बार सामने आती रही है कि भारत के मतदाता राजनीतिज्ञों से ज्यादा अक्लमंद हैं। जहां नेताओं की अक्ल काम करना बन्द कर देती है वहां इन्हीं अनपढ़ और गरीब कहे जाने वाले मतदाताओं की अक्ल चलनी शुरू हो जाती है और ये देश की राजनीतिक दिशा तय कर देते हैं एवं राजनेताओं का भविष्य बना या बिगाड़ देते हैं।

गुरु गोविन्द सिंह : सभ्यता और संस्कृति के प्रतीकपुरुष

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गुरु गोविन्द सिंह के 350वें प्रकाश उत्सव- 5 जनवरी 2017 – ललित गर्ग- भारत का सौभाग्य है कि यहां की रत्नगर्भा माटी में महापुरुषों को पैदा करने की शोहरत प्राप्त है। जिन्होंने अपने व्यक्तित्व और कर्तृत्व से न सिर्फ स्वयं को प्रतिष्ठित किया वरन् उनके अवतरण से समग्र विश्व मानवता धन्य हुई है। इसी संतपुरुषों,… Read more »

नयी सोच से नए जीवन की शुरुआत करें

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 ललित गर्ग – हर व्यक्ति शांति, सुख और प्रसन्नता चाहता है और जिन्दगीभर उसी की खोज में लगा रहता है। ऐसी ही चाहत को लेकर एक व्यक्ति एक संत के पास गया और बोला मैंने अनेक स्थानों पर इनको ढूंढा, पर तीनों वस्तुएं कहीं नहीं मिली। आपको अत्यंत शांत, सुखी और प्रसन्न देखकर ही आपके… Read more »

नववर्ष की राह: शांति की चाह

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ललित गर्ग – नया वर्ष है क्या? मुड़कर एक बार अतीत को देख लेने का स्वर्णिम अवसर। क्या खोया, क्या पाया, इस गणित के सवाल का सही जवाब। आने वाले कल की रचनात्मक तस्वीर के रेखांकन का प्रेरक क्षण। क्या बनना, क्या मिटाना, इस अन्वेषणा में संकल्पों की सुरक्षा पंक्तियों का निर्माण। ‘आज’, ‘अभी’, ‘इसी… Read more »

दशा एवं दिशा बदलने का संकल्प हो

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ललित गर्ग नए वर्ष का स्वागत हम और हमारे निर्माता इस सोच और संकल्प के साथ करें कि हमें कुछ नया करना है, नया बनना है, नये पदचिह्न स्थापित करने हैं। हमें नीतियां ही नहीं नियम भी बदलने है और इसी दिशा में मोदी सरकार जुटी है। नोटबंदी के बाद एक और अच्छी शुरूआत के… Read more »

संतकवि नरसी मेहता : ईश्वर से सम्पर्क के सूत्रधार

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नरसी मेहता की जन्म जयन्ती- 19 दिसम्बर, 2016 के लिये विशेष ललित गर्ग ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ भजन में एक बात अच्छी प्रकार से कह दी है। ‘पर दुःखे उपकार करे’ कह कर भजन में रुक गए होते, तो वैष्णव जनों की संख्या बहुत बढ़ जाती है। ‘पर दुःखे उपकार करे तोए मन अभिमान… Read more »

इससे लोकतंत्र का बागवां महकेगा

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विमुद्रीकरण के ऐतिहासिक फैसले के बाद अब मोदी सरकार चुनाव सुधार की दिशा में भी बड़ा निर्णय लेने की तैयारी में है। संभव है सारे राष्ट्र में एक ही समय चुनाव हो- वे चाहे #लोकसभा हो या #विधानसभा। इन चुनाव सुधारों में दागदार नेताओं पर तो चुनाव लड़ने की पाबंदी लग ही सकती है, वहीं शायद एक व्यक्ति एक साथ दो सीटों पर भी चुनाव नहीं लड़ पाएगा?