लेखक परिचय

ललित गर्ग

ललित गर्ग

स्वतंत्र वेब लेखक

गुड़ियाएं कब तक नौंची जाएंगी?

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ललित गर्ग:- हिमाचल की शांत, शालीन एवं संस्कृतिपरक वादियां गुड़िया के साथ हुए वीभत्स एवं दरिन्दगीपूर्ण कृत्य से न केवल अशांत है बल्कि कलंकित हुई है। एक बार फिर नारी अस्मिता एवं अस्तित्व को नौंचने वाली घटना ने शर्मसार किया है। देवभूमि भी धुंधली हुई है क्योंकि उस पवित्र माटी की गुड़िया जैसी महक को… Read more »

कोविंदजी! अब देश आश्वस्त होना चाहता है.

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ललित गर्ग श्री रामनाथ कोविन्द देश के चौदहदवें नए राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं। वह एक दलित के बेटे हैं जो सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचने की दूसरी घटना है, जिससे भारत के लोकतंत्र नयी ताकत मिलेगी, दुनिया के साथ-साथ भारत भी तेजी से बदल रहा है। सर्वव्यापी उथल-पुथल में नयी राजनीतिक दृष्टि, नया राजनीतिक… Read more »



भ्रष्टाचार रूपी राजरोग के लिये सभी एकजुट हो

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ललित गर्ग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भ्रष्टाचार पर नकेल कसने को लेकर शुरू से गंभीर ही नहीं है बल्कि एक निष्पक्ष एवं निर्णायक लड़ाई के लिये संघर्षरत हंै। इसी मकसद से उन्होंने नोटबंदी का फैसला किया। कालेधन को सामने लाने के लिए दूसरे उपाय आजमाए जा रहे हैं। लालू प्रसाद यादव हो या पूर्व वित्तमंत्री पी…. Read more »

भारतीयों पर आलसी होने का दाग लगना

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-ललित गर्ग- दुनिया के सबसे आलसी देशों में भारत का अव्वल पंक्ति में आना न केवल शर्मनाक बल्कि सोचनीय स्थिति को दर्शाता है। जिस देश का प्रधानमंत्री 18 से 20 घंटे प्रतिदिन काम करता हो, वहां के आम नागरिकों को आलसी होने का तमगा मिलना, विडम्बनापूर्ण है। आलसी होना न केवल सशक्त भारत एवं नये… Read more »

तनाव, असन्तुलन एवं अशांति का जीवन क्यों ?

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-ललित गर्ग- दुनिया में एक नकारात्मकता का परिदृश्य बिखरा पड़ा है। हम निरन्तर आदर्शवाद और अच्छाई का झूठ रचते हुए सच्चे आदर्शवाद के प्रकट होने की असंभव कामना कर रहे हैं, इसी से जीवन की समस्याएं सघन होती जा रही है, नकारात्मकता व्यूह मजबूत होता जा रहा है, इनसे बाहर निकलना असंभव-सा होता जा रहा… Read more »

हिन्दुओं की आस्था पर प्रहार कब तक?

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ललित गर्ग- जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने पंद्रह साल बाद एक बार फिर कायराना हरकत की है। हिन्दू आस्था और सौहार्द पर आतंकवाद का कहर टूटा है। सावन के पहले सोमवार की रात लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने अमरनाथ यात्रियों को निशाना बनाया। हमले में सात श्रद्धालु यात्री मारे गए और दो दर्जन से ज्यादा घायल हो… Read more »

‘चिराग का रोजगार’ एक सार्थक पहल

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हाल ही में दिल्ली एक बडे़ समारोह में चिराग पासवान ने अपनी इस बहुआयामी एवं मूच्र्छित होती युवा चेतना में नये प्राण का संचार करने वाली योजना को लोकार्पित किया। रोजगार के लिये सरकार पर निर्भरता को कम करने के लिये उन्होंने बड़े आर्थिक-व्यापारिक घरानों एवं बेरोजगार युवकों के बीच सेतु का काम करने की ठानी है। वोट की राजनीति और सही रूप में सामाजिक उत्थान की नीति, दोनों विपरीत ध्रुव है। लेकिन चिराग ने इन विपरीत स्थितियों में सामंजस्य स्थापित करके भरोसा और विश्वास का वातावरण निर्मित किया है।

गुरु पूर्णिमा गुरु-पूजन का अनूठा पर्व

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ललित गर्ग- पर्वों, त्यौहारों  और संस्कारों की भारतभूमि में गुरु का स्थान सर्वोपरि माना गया है। पश्चिमी देशों में गुरु का कोई महत्व नहीं है, वहां विज्ञान और विज्ञापन का महत्व है परन्तु भारत में सदियों से गुरु का महत्व रहा है। गुरु-पूर्णिमा गुरु-पूजन का पर्व है। सन्मार्ग एवं सत-मार्ग पर ले जाने वाले महापुरुषों… Read more »

‘सिस्टम’ की रोग मुक्ति सफलता का आधार

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-ललित गर्ग- उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी का सौ दिनों का कार्य अंधेरों में रोशनी का प्रतीक बना है। सरकार ने इन दिनों में विकास के प्रतिमानों को ऊंचा रखते हुए लोगों के दिल को जीतने का काम किया है। इस अल्पावधि में सरकार ने अपनी नीतियों, योजनाओं एवं कार्यों से जन-जन में लोकप्रियता… Read more »

मैं गरीब हूं, इबारत गरीबी का मजाक है

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-ललित गर्ग- राजस्थान में गरीबों का मखौल उड़ाने का एक गंभीर मामला सामने आया है, जो हमारी राजनीति के साथ-साथ प्रशासनिक मूल्यहीनता एवं दिशाहीनता का परिचायक है। राजनीतिक लाभ लेने के लिये किस तरह सरकार के द्वारा जनयोजनाआंें को भुनाने के प्रयत्न होते हैं, उसका राजस्थान एक घिनौना एवं अमानवीय उदाहरण बनकर प्रस्तुत हुआ है।… Read more »