लेखक परिचय

मनमोहन आर्य

मनमोहन आर्य

स्वतंत्र लेखक व् वेब टिप्पणीकार

वैदिक साधन आश्रम तपोवन में चतुर्वेद पारायण यज्ञ के समापन पर यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य गौतम जी और स्वामी चित्तेश्वरानन्द सरस्वती के आध्यात्मिक उपदेश’

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-मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। वैदिक साधन आश्रम, तपोवन देहरादून का आर्य संस्कृति के प्रचार व प्रसार का पुराना आध्यात्मिक केन्द्र है। समय समय पर यहां पर वृहद यज्ञों सहित अनेक शिविरों, शरदुत्सव एवं ग्रीष्मोत्सव का आयोजन किया जाता है। इसी श्रृंखला मे यहां 1 फरवरी से 12 मार्च, 2017 तक चतुर्वेद ब्रह्मपारायण यज्ञ एवं योग-ध्यान-स्वाध्याय… Read more »

आत्मा की उन्नति ही सच्ची जीवनोन्नति अन्यथा जीवन व्यर्थ

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आत्मान्नोति हेतु आत्मा व ईश्वर सहित संसार सं संबंधित वैदिक ज्ञान परम आवश्यक है जिसका सरलतम साधन सत्यार्थप्रकाश व ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका आदि ग्रन्थों सहित वेद, दर्शन, उननिषदों आदि का अध्ययन है। यह ज्ञान आत्मोन्नति के साधक हैं। आत्मोन्नति होने पर मनुष्य असत्य कामों व व्यवहारों को छोड़ कर सद्कर्मों से धनोपार्जन करता है जिसमें उसे सफलता मिलती है और वह सभी प्रकार के अभावों से दूर हो जाता है।



“शतपथ ब्राह्मण का महत्वपूर्ण लघु परिचयात्मक ग्रन्थ शतपथ सुभाषित”

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  मनमोहन कुमार आर्य शतपथ ब्राह्मण पर स्मृति-शेष प्रतिष्ठित आर्य विद्वान पं. वेदपाल जी ने ‘शतपथ सुभाषित’ नाम से एक लघु पुस्तक लिखी है। इस पुस्तक का प्रकाशन सन् 1998 में हुआ। डा. भवानीलाल भारतीय जी ने इस ग्रन्थ पर अपनी सम्मति दी है जिसे हम प्रस्तुत कर रहे हैं। वह लिखते हैं कि शतपथ… Read more »

सब मनुष्यों के पालनीय सत्य धर्म का निश्चय और असत्य मतों का त्याग

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मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य संसार की सर्वोत्तम कृति है। मनुष्य से बढ़कर संसार की कोई रचना नहीं है। इस मान्यता व सिद्धान्त को प्रायः सभी लोग निर्विवाद रूप से स्वीकार करते हैं। इस संसार में विद्यमान अपौरुषेय रचनाओं पर विचार करने पर बुद्धि असमंजस में पड़ जाती है। इस संसार व जगत का आधार क्या… Read more »

ऋक्सूक्ति रत्नाकर वैदिक साहित्य का एक प्रमुख महनीय ग्रन्थ

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मनमोहन कुमार आर्य वेद सब सत्य विद्याओं की पुस्तक है। वेद का पढ़ना पढ़ाना और सुनना सुनाना सब आर्यों का परम धर्म है। यह वाक्य सभी ऋषि भक्तों व आर्यसमाज के सदस्यों के जिह्वाग्र पर विद्यमान रहता है। हम यदि चारों वेदों का अध्ययन करें तो इसके लिए कई महीनों का समय लग सकता है।… Read more »

श्रेष्ठ एवं आदर्श महापुरुष ऋषि दयानन्द

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मनमोहन कुमार आर्य ऋषि दयानन्द संसार के मनुष्यों व सभी ज्ञात महापुरुषों में सर्वश्रेष्ठ आदर्श महापुरुष हैं। इसके अनेक कारण एवं प्रमाण हैं जिनके आधार यह निष्कर्ष निकलता है। महाभारतकाल वर्तमान से लगभग 5,200 वर्ष पूर्व है। महाभारत काल के बाद ऐसे अनेक पुरुष व महापुरुष हुए जिनके बारे में देश व संसार के लोगों… Read more »

सन्त गुरू रविदास और आर्य समाज

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सन्त रविदास जी सन् 1377 में जन्में व सन् 1527 में मृत्यु को प्राप्त हुए। ईश्वर की कृपा से उन्हें काफी लम्बा जीवन मिला। यह उस काल में उत्पन्न हुए जब हमारे देश में अन्य कई सन्त, महात्मा, गुरू, समाज सुधारक पैदा हुए थे। गुरूनानक (जन्म 1497), तुलसीदास (जन्म 1497), स्वामी रामानन्द (जन्म 1400), सूरदास (जन्म 1478), कबीर (1440-1518), मीराबाई (जन्म 1478) आदि उनके समकालीन थे। गुरू रविदास जी के जीवन काल में देश में सन् 1395-1413 अवधि में मैहमूद नासिरउद्दीन, सन् 1414-1450 अवधि में मुहम्मद बिन सईद तथा सन् 1451 से 1526 तक लोधी वंश का शासन रहा।

मनुष्य जीवन का अन्तिम व महानतम लक्ष्य मोक्ष प्राप्ति

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मनमोहन कुमार आर्य संसार में ईश्वर की बहुत चर्चा होती है। घोर अज्ञानी व्यक्ति भी ईश्वर को मानता है और परम्परा से प्राप्त ज्ञान के अनुसार ईश्वर की उपासना वा उसकी पूजा करता है, भले ही उसका वह कृत्य यथार्थ उपासना न होकर अन्धविश्वास व पाखण्डपूर्ण कृत्य ही क्यों न हो। महर्षि दयानन्द भी गुजरात… Read more »

शिवरात्रि को ऋषि दयानन्द को हुए बोध से देश व विश्व का अपूर्व कल्याण हुआ

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मनमोहन कुमार आर्य वेदों के अपूर्व ऋषि और आर्यसमाज के संस्थापक ऋषि दयानन्द सरस्वती को मंगलवार 12 फरवरी, सन् 1839 को शिवरात्रि के दिन बोध हुआ था। क्या बोध हुआ था, यह कि उनके पिता व परिवार जन जिस शिव मूर्ति के रूप में शिव लिंग की पूजा करते थे वह सच्चा व यथार्थ ईश्वर… Read more »

स्वामी सर्वदानन्द सरस्वती और उनके आर्यसमाजी बनने की प्रेरणादायक घटना

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मनमोहन कुमार आर्य स्वामी सर्वदानन्द सरस्वती जी आर्यसमाज के विख्यात संन्यासी हुए हैं। आपने अलीगढ़ में एक गुरुकुल का सचालन भी किया जिसमें पं. ब्रह्मदत्त जिज्ञासु जी संस्कृत व्याकरण आदि पढ़ाते थे। इसी गुरुकुल में हमारे दो प्रमुख विद्वान पं. युधिष्ठिर मीमांसक एवं आचार्य भद्रसेन जी भी पढ़े थे। आर्यसमाजी बनने से पहले स्वामी जी… Read more »