लेखक परिचय

मनमोहन आर्य

मनमोहन आर्य

स्वतंत्र लेखक व् वेब टिप्पणीकार

सत्यधर्म का निश्चय, उसका आचरण और उसके जानकारों के कर्तव्य

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मनमोहन कुमार आर्य देश में अनेक मत-मतान्तर, पंथ व सम्प्रदाय आदि हैं। आजकल इन सभी को धर्म की संज्ञा दी जाती है। हिन्दू, बौद्ध, जैन, सिख, ईसाई व इस्लाम को भी धर्म के नाम से ही सम्बोधित किया जाता है। किसी मत व पन्थ को किन्हीं व्यक्तियों द्वारा धर्म कहना उनकी अज्ञानता को ही प्रकट… Read more »

सबको आनन्द देने वाला परमेश्वर हम सब पर सब ओर से सर्वदा सुख की वृष्टि करे

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मनमोहन कुमार आर्य परमेश्वर का भली-भांति ध्यान करने को सन्ध्या कहते हैं। सन्ध्या करने का समय रात और दिन के संयोग समय दोनों सन्धि-वेलाओं में है। इस समय सब मनुष्यों को परमेश्वर की स्तुति, प्रार्थना और उपासना अवश्यमेव करनी चाहिये।   ऋषि दयानन्द जी के अनुसार सभी मनुष्यों को समाधिस्थ होकर योगियों की भांति परमात्मा… Read more »



असत्य का त्याग और सत्य का ग्रहण मनुष्य का कर्तव्य और धर्म’

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मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य को मनुष्य इसके मननशील होने के कारण ही कहा जाता है। मनुष्य व पशु में अनेक समानतायें हैं। शारीरिक दृष्टि से दोनों के पास अपना अपना एक शरीर हैं जिसमें दो आंखे, नाक, कान, मुंह व पैर आदि हैं। दोनों के पास इन्द्रियां प्रायः समान हैं और दोनों को ही समान… Read more »

संसार को समस्त भ्रांतियों से मुक्त करना ऋषि दयानंद की एक प्रमुख देन’

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मनमोहन कुमार आर्य ऋषि दयानन्द के देश और संसार को अनेक योगदानों में से एक प्रमुख योगदान यह भी है कि उन्होंने मनुष्य मात्र को धार्मिक व सामाजिक भ्रान्तियों से मुक्त करने का प्रयत्न किया और सभी मिथ्या विश्वासों का परिचय देकर उनके सत्य व यथार्थ समाधान प्रस्तुत किये। महर्षि दयानन्द के आगमन के समय… Read more »

ऋषि दयानन्द और गांधी जी का हिन्दी प्रेम

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मनमोहन कुमार आर्य महर्षि दयानन्द सरस्वती संस्कृत और हिन्दी के प्रचार व प्रसार को मनुष्य का कर्तव्य व धर्म मानते थे। पंजाब में प्रचार करते हुए एक बार उनके एक अनुयायी ने उनसे उनके प्रमुख ग्रन्थ सत्यार्थप्रकाश का उर्दू में अनुवाद करने की अनुमति देने का अनुरोध किया तो स्वामी जी को यह सुनकर कुछ… Read more »

आर्यसमाज के वेदसम्मत 10 नियमों के आदर्श पालक ऋषि दयानन्द

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मनमोहन कुमार आर्य आर्यसमाज की स्थापना 10 अप्रैल, सन् 1875 को ऋषि दयानन्द सरस्वती ने मुम्बई में की थी। इसका उद्देश्य था विलुप्त वेदों की यथार्थ शिक्षाओं का जन-जन में प्रचार और उसके अनुरूप समाज व देश का निर्माण। महर्षि ने आर्यसमाज की स्थापना उनके वेद विषयक विचारों के प्रशंसकों वा अनुयायियों के अनुरोध पर… Read more »

महर्षि दयानन्द और आचार्य सायण के वेद भाष्य

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मनमोहन कुमार आर्य आर्य विद्वान श्री कृष्णकान्त वैदिक शास्त्री जी ने एक लिखा है जिसका शीर्षक है ‘‘क्या आचार्य सायण वेदों के विशुद्ध भाष्यकार थे?’’ लेखक ने अपने लेख में स्वीकार किया है कि आचार्य सायण का भाष्य पूर्ण विशुद्ध भाष्य नहीं है। श्री वैदिक जी के लेख पर एक टिप्पणीकार के अनुसार ‘‘सायण महोदय… Read more »

ईश्वर सर्वतोमहान और वेदानुयायी ऋषि महान और संसार के आदर्श

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मनमोहन कुमार आर्य इस संसार और पूरे ब्रह्माण्ड में सबसे महान कौन है? इसका उत्तर है कि इस संसार को बनाने व चलाने वाला जगदीश्वर सबसे अधिक महान पुरुष है। ईश्वर के बाद संसार में सबसे महान पुरूष व मनुष्यों के आदर्श कौन हैं, इसका उत्तर है वेदों के अनुयायी व अनुमागी सभी ऋषि महान… Read more »

वैदिक वर्ण-व्यवस्था वर्तमान में खण्डित होते हुए भी अंशतः जीवित है’

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-डॉ. जयदत्त उप्रेती, स्वस्त्ययन पाक्षिक पत्र ‘‘आर्य जीवन” के 18-11-2016 के अंक में प्रकाशित श्री मनमोहन कुमार आर्य जी का लेख वैदिक वर्ण-व्यवस्था की वर्तमान में व्यावहारिकता के प्रश्न पर छपा है, जिसमें उन्होंने आर्यसमाज के विद्वानों से इस विषय पर अपने विचार देने का अनुरोध किया है। इस सम्बन्ध में मुझे यह निवेदन करना… Read more »

देश की आन बान व शान के रक्षक शहीद उधम सिंह जी

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-मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। आज शहीद ऊधम सिंह (जन्म 26-12-1899, मृत्यु 31-7-1940, जीवन 40 वर्ष 7 महीने 5 दिन) की 117 वीं जयन्ती है। ऊधम सिंह जी हमें पंजाब की धरती सुनामख् संगरूर से मिले थे जहां से हमें विगत एक शताब्दी में लाला लाजपत राय, स्वामी श्रद्धानन्द, सरदार भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जी… Read more »