लेखक परिचय

मयंक चतुर्वेदी

मयंक चतुर्वेदी

मयंक चतुर्वेदी मूलत: ग्वालियर, म.प्र. में जन्में ओर वहीं से इन्होंने पत्रकारिता की विधिवत शुरूआत दैनिक जागरण से की। 11 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय मयंक चतुर्वेदी ने जीवाजी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के साथ हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर, एम.फिल तथा पी-एच.डी. तक अध्ययन किया है। कुछ समय शासकीय महाविद्यालय में हिन्दी विषय के सहायक प्राध्यापक भी रहे, साथ ही सिविल सेवा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को भी मार्गदर्शन प्रदान किया। राष्ट्रवादी सोच रखने वाले मयंक चतुर्वेदी पांचजन्य जैसे राष्ट्रीय साप्ताहिक, दैनिक स्वदेश से भी जुड़े हुए हैं। राष्ट्रीय मुद्दों पर लिखना ही इनकी फितरत है। सम्प्रति : मयंक चतुर्वेदी हिन्दुस्थान समाचार, बहुभाषी न्यूज एजेंसी के मध्यप्रदेश ब्यूरो प्रमुख हैं।

पं. बंगाल, ममता के राज में दम तोड़ती अभि‍व्यक्ति

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डॉ. मयंक चतुर्वेदी पश्चिम बंगाल की पहचान भारत वर्ष में अपनी स्वतंत्र अभि‍व्यक्ति के लिए सदैव से रही है। देश का स्वतंत्रता आंदोलन हो या लोकतंत्र एवं सुधारवादी आन्दोलनों से जुड़ी कोई घटना एवं चर्चा, हमेशा से बंगाली जनता इसमें आगे रहती आई है। किंतु वर्तमान परिदृश्य देखकर लग रहा है कि अब बंगाल का… Read more »

प्राचीन भवनों के संरक्षण की अनुपम पहल

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  डॉ मयंक चतुर्वेदी संस्‍कृति एवं परंपरा के कभी जागृत नमूने रहे भवन आज भले ही अपने वैभव से दूर होकर अनेक स्‍थानों पर टूटे-फूटे स्‍मारकों में तब्‍दील हो गए हों, किंतु वे हैं तो हमारे अतीत का दिग्‍दर्शन करानेवाले आधार स्‍तम्‍भ ही। इसलिए उन्‍हें उनके प्राचीन गौरवपूर्ण स्‍वरूप में वापस लाकर उनसे निरंतर प्रेरणा… Read more »



भाजपा की राष्ट्रीय बैठक में मध्यप्रदेश की कृषि नीति

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डॉ. मयंक चतुर्वेदी भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी की संपूर्ण दृष्टि तो उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों पर थी, किंतु इस सब के बीच मध्यप्रदेश की कृषि नीति को यहाँ सभी ने छाए हुए देखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और दूसरे… Read more »

हम कब तक खोते रहेंगे सैनिकों को ?

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डॉ. मयंक चतुर्वेदी यह प्रश्‍न किसी एक भारतीय का नहीं, देश के हर उस भारतीय का है जो अपने देश को अपार प्रेम करता है। पाकिस्‍तान प्रायोजित आतंकवाद से देश के अंदर और सीमाओं पर हमारे अपने सैनिक पाकिस्‍तानी गोलियों के शिकार हो रहे हैं। भारत सरकार फिर वो आज की राष्‍ट्रीय जनतान्‍त्रिक गठबंधन की… Read more »

पाकिस्तान पर अमेरिका की दोहरी नीति

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डॉ. मयंक चतुर्वेदी पाकिस्तान कई वर्षों से लगातार आतंकवाद को प्रश्रय दे रहा है, यह बात आज विश्व जानता है, ऐसे में यह कहना बिल्कुल गलत होगा कि अमेरिका से यह बात छिपी हुई है, किंतु उसके बाद भी अमेरिका आतंकवाद को समाप्त करने एवं अन्य सामाजिक व्यवस्था में सुधार के नाम पर लगातार पाकिस्तान… Read more »

प्रधानमंत्री से रक्षा बजट पर देश को उम्‍मीदें

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हाल ही में आई शोध फर्म आइएचएस मार्किट की जेन्स डिफेंस बजट्स रिपोर्ट 2016 बताती है कि रक्षा पर खर्च करने वाले दुनिया के शीर्ष पांच देशों में अमेरिका, चीन और ब्रिटेन के बाद भारत का चौथा स्थान है। इस साल भारत का रक्षा बजट 50.7 अरब डॉलर (करीब 3.41 लाख करोड़ रुपये) है। जबकि पिछले साल यह 46.6 अरब डॉलर था। इस रिपोर्ट के आंकड़े देखकर एक बात की संतुष्‍ट‍ि तो है कि केंद्र में सत्‍ता परिवर्तन का लाभ सामरिक मामले में भी हुआ है

एसोचैम की बातों को गंभीरता से लेने की जरूरत

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बड़े नोटों को बंद करने का निर्णय जिस तरह से सामने आया, उसके बाद देशभर से मिली-जुली प्रक्रिया अब तक आ ही रही है। विपक्ष जहाँ इसके लिए सरकार पर कई आरोप लगा रहा है, यहाँ तक कि देश की जीडीपी ग्रोथ गिरने तक की बात करने के साथ इससे जोडक़र अन्ये मुद्दों को भी प्रमुखता से उठा रहा है तो वहीं केंद्र सरकार से लेकर कई ऐसे संगठन भी हैं जो इस निर्णय के पक्ष में नजर आ रहे हैं।

मानव अधिकारों का संरक्षण और भारतीय मीडिया

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मानव अधिकारों के संरक्षण की चर्चा आरंभ करने से पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर यह मानवाधिकार क्या हैं और इसके बाद यह जानेंगे कि भारतीय मीडिया का इनके विकास में क्या योगदान रहा है। वस्तुतः मानव अधिकारों से अभिप्राय ‘‘मौलिक अधिकारों एवं स्वतंत्रता से है जिसके सभी मानव प्राणी हकदार है।

केजरीवाल जी, दुनिया में फकीर ही सबसे ज्‍यादा अमीर होते हैं ?

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल किसी न किसी बहाने से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष करते रहते हैं। उनकी शैली शानदार है, जब वे अपनी बात कह रहे होते हैं तो इतने सामान्‍य आदमी की भाषा में और इस तरह से कहते हैं कि उन्‍हें सुनते वक्‍त कोई ईमानदार आदमी हो तो वह भी लजा जाए। इस बार केजरीवाल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फकीर वाली टिप्पणी पसंद नहीं आई है। जिसका जिक्र उन्‍होंने अपने मुरादाबाद में दिए गए भाषण के दौरान किया था।

अब तो समझे विपक्ष जनता क्‍या चाहती है

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लोकतंत्र शासन प्रणाली में जनता भगवान होती है, उसके रुख से ही यह तय होता है कि किस पार्टी की नीतियों के लिए उसका बहुमत है। जब से केंद्र में भाजपा की सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने हैं, विपक्ष किसी न किसी बहाने, बिना कोई सार्थक मुद्दा होने के बावजूद भी लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। हद तो यह है कि पुराने 500-1000 के नोट प्रचलन के बाहर करने की जहां देशभर में बहुसंख्‍यक जनता सरकार की तारीफ कर रही है, वहीं विपक्षी हैं कि उनके पेट में इतना दर्द हो रहा है कि वे एक माह तक मुकर्रर किए गए वक्‍त में आवश्‍यक विधेयकों एवं कार्रवाहीं के लिए चलनेवाले सदन को भी नहीं चलने दे रहे।