लेखक परिचय

मयंक चतुर्वेदी

मयंक चतुर्वेदी

मयंक चतुर्वेदी मूलत: ग्वालियर, म.प्र. में जन्में ओर वहीं से इन्होंने पत्रकारिता की विधिवत शुरूआत दैनिक जागरण से की। 11 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय मयंक चतुर्वेदी ने जीवाजी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के साथ हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर, एम.फिल तथा पी-एच.डी. तक अध्ययन किया है। कुछ समय शासकीय महाविद्यालय में हिन्दी विषय के सहायक प्राध्यापक भी रहे, साथ ही सिविल सेवा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को भी मार्गदर्शन प्रदान किया। राष्ट्रवादी सोच रखने वाले मयंक चतुर्वेदी पांचजन्य जैसे राष्ट्रीय साप्ताहिक, दैनिक स्वदेश से भी जुड़े हुए हैं। राष्ट्रीय मुद्दों पर लिखना ही इनकी फितरत है। सम्प्रति : मयंक चतुर्वेदी हिन्दुस्थान समाचार, बहुभाषी न्यूज एजेंसी के मध्यप्रदेश ब्यूरो प्रमुख हैं।

असलम साहब, अकेले राष्ट्रीय कांग्रेस स्वयंसेवक संघ बनाने से काम नहीं चलेगा

Posted On & filed under राजनीति.

वैसे भी देखा जाए तो कांग्रेस को इस वक्‍त सबसे ज्‍यादा शु्द्ध हवा की जरूरत है जोकि कठोर सेवा-श्रम के बूते उसके शरीर को मिलेगी और इसके लिए कांग्रेस में कोई स्‍वयंसेवक संघ होना ही चाहिए था, जिसकी जरूरत लम्‍बे समय से महसूस भी की जा रही है। किंतु इसी के साथ जो प्रश्‍न उठ रहा है वह यह है कि क्‍या नया कांग्रेसी संघ आरएसएस जैसा त्‍याग, समर्पण और सादगीभरे जीवन का भाव भी अपने स्‍वयंसेवकों में संचारित कर पाएगा ? प्रतिक्रिया स्‍वरूप कोई कार्य खड़ा किया जाए तो कहीं इसका भी हश्र पूर्व में कांग्रेस द्वारा किए गए प्रयोगों की तरह ही न हो?

उत्‍तरप्रदेश के बूचड़खानों का सत्‍य पक्ष

Posted On & filed under राजनीति.

इससे संबंधि‍त यह बात जानना भी सभी के लिए जरूरी है कि लाख आर्थ‍िक नुकसान सहते हुए भी सरकार ने यह कदम आम जन के स्‍वास्‍थ्य को ठीक रखने के लिए सख्‍ती से अमल में लाना उचिᛢत समझा है । क्‍योंकि यह तो सभी को पता होना ही चाहिए कि वे मांस किसका खा रहे हैंऔर जिसका भी खा रहे हैं वह स्‍वस्‍थ जानवर था भी कि नहीं । उत्तर प्रदेश के तमाम बूचड़खानों को बंद करने से राज्य सरकार को करीब 11 हजार 350 करोड़ रुपये के नुकसान होने की आशंका व्‍यक्‍त की गई है। इससे जुड़ा एक तथ्‍य यह भी है कि यहां अब तक करीब 356बूचड़खाने संचालित किये जा रहे थे , जिनमें से सिर्फ 40 बूचड़खाने ही वैध हैं, इन्‍हें केंद्र सरकार की कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) से बाकायदा लाइसेंस मिला हुआ है।



उत्‍तरप्रदेश में योगी आदित्‍यनाथ ही क्‍यों ?

Posted On & filed under राजनीति.

डॉ. मयंक चतुर्वेदी संत परंपरा का निर्वहन करते हुए राजनीति में आए योगी आदित्‍यनाथ पर यह आरोप सदैव से लगते रहे हैं कि वे हिन्‍दुत्‍व की राजनीति करते हैं, चुनावों में एक वर्ग विशेष, धर्म-संप्रदाय से जुड़े वोटों का ध्रुवीकरण करते हैं और जरूरत पड़े तो वे तीन तलाक, लव जिहाद, मदरसा, कब्रिस्‍तान जैसे धर्म आधारित विवादित बयान देने से… Read more »

सपा को विपक्ष में बैठकर काम करने का सबक

Posted On & filed under विविधा.

वस्‍तुत: पिछले कई चुनावों से सभी ने देखा है कि किस तरह यूपी में चुनाव आते ही मुस्‍लिम वोट बैंक की राजनीति शुरू हो जाती थी। लगता था कि सपा-बसपा, कांग्रेस में होड़ मची है यह बताने की कि कौन कितना बड़ा मुस्‍लिमों का पेरोकार है। भाजपा को छोड़कर इस बार भी हर बार की तरह ही यहां मुसलमानों को थोक में पार्टियों ने अपना प्रत्‍याशी बनाया, इस आशा में कि वह कमाल कर देंगे, जीतकर आएंगे और सरकार बनाने में अपना अहम रोल अदा करेंगे।

अरुणाचल पर चीन का बार-बार दुस्‍साहस नेहरू की देन

Posted On & filed under विश्ववार्ता.

चीन लगातार यह दावा पेश कर रहा है कि अरुणाचल प्रदेश चुंकि तिब्बत से लगा क्षेत्र है, इसलिए वह भारत का नहीं उसका हिस्‍सा है, जबकि सत्‍य यही है कि चीन का क्षेत्र तो तिब्‍बत भी नहीं है, वहां की निर्वासित सरकार भारत में शरणार्थी के रूप में इजरायलियों की तरह अच्‍छे दिन आने का इंतरजार करते हुए स्‍वतंत्र तिब्‍बत इस दिशा में विश्‍व जनमत तैयार करने के लिए प्रयास कर रही है।

रिजिजू के ट्वीट से उजागर होता सत्‍य

Posted On & filed under समाज.

डॉ. मयंक चतुर्वेदी केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू हिन्‍दू आबादी कम होने संबंधी एक ट्वीट क्‍या कर दिया, स्‍वयं को सेक्‍युलर कहने वालों की भीड़ एक साथ उनको कठघरे में खड़ा करने में लग गई । उसमें भी आश्‍चर्य तब अधिक हुआ, जब एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन औवेसी जैसे घोर सान्‍प्रदायिक यह कहते हैं कि… Read more »

माननीयों को उच्‍चतम न्‍यायालय का संदेश

Posted On & filed under राजनीति, विधि-कानून.

डॉ. मयंक चतुर्वेदी भारतीय परिवेश में तोहफों का अपना एक महत्‍व हैं। भारत में ही क्‍यों दुनिया के किसी भी कोने में चले जाओ, गिफ्ट देने और लेने का अपना आनन्‍द है, लेकिन जिस तरह इन तौहफों के फेर में स्‍वार्थी तत्‍व अपने कार्यों को करवाने में माननीयों से कामयाब हो जाते हैं, तब जरूर… Read more »

कम्‍युनिस्‍ट पार्टियों का स्‍मार्ट शहर विरोध ?

Posted On & filed under विविधा.

डॉ. मयंक चतुर्वेदी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (एम) हो या अन्‍य समाजवादी पार्टियां और इनसे जुड़े संगठन एवं संस्‍थाएं इन दिनों जिस तरह ये सभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्‍ट स्‍मार्ट सिटि और बुलेट ट्रेनों जैसे नवाचारों का एक स्‍वर में विरेाध कर रहे हैं। जिसे कि बाहर से सुनने पर ऐसा लगता है कि… Read more »

मध्‍यप्रदेश में सरकार से मिलता आनन्‍द

Posted On & filed under विविधा.

डॉ. मयंक चतुर्वेदी आनन्‍द ह्दय का विषय है, यह बात आज से वर्षों पूर्व हिन्‍दी साहित्‍य के प्रकाण्‍ड विद्वान आचार्य रामचंद्र शुक्‍ल ने अपने निबंधों के माध्‍यम से सभी को समझाई थी। इससे ओर पहले जाएं तो हमारे ऋषि-मुनियों ने अपने अनुभव से यह जानकर सभी को बताया था कि आवश्यकताएं तो हर एक की… Read more »

कला-संस्कृति की समृद्ध परंपरा को विस्तार देता मध्यप्रदेश

Posted On & filed under कला-संस्कृति, राजनीति.

डॉ. मयंक चतुर्वेदी मध्यप्रदेश की भूमि भारत भू की वह भूमि है, जि‍सने कभी अपनी जमीन पर कालीदास, भवभूति,  तानसेन जैसे महान साहित्यकार-कलाकारों को बनाया तो कभी इस भूमि से उस्ताद अलाउद्दीन ख़ाँ , कृष्ण राव पंडित, उस्ताद आमिर ख़ाँ, डी. जे. जोशी, डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर, कुमार गंधर्व और अब्दुल लतीफ़ ख़ान, सैयद हैदर… Read more »