लेखक परिचय

मिलन सिन्हा

मिलन सिन्हा

स्वतंत्र लेखन अब तक धर्मयुग, दिनमान, कादम्बिनी, नवनीत, कहानीकार, समग्रता, जीवन साहित्य, अवकाश, हिंदी एक्सप्रेस, राष्ट्रधर्म, सरिता, मुक्त, स्वतंत्र भारत सुमन, अक्षर पर्व, योजना, नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान, प्रभात खबर, जागरण, आज, प्रदीप, राष्ट्रदूत, नंदन सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में अनेक रचनाएँ प्रकाशित ।

बारिश  और बचपन  

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बचपन में बारिश हो और हम जैसे बच्चे घर में बैठे रहें, नामुमकिन था. किसी न किसी बहाने बाहर जाना था, बारिश की ठंडी फुहारों का आनन्द लेते हुए न जाने क्या-क्या करना था. हां, पहले से बना कर रक्खे विभिन्न साइज के कागज़ के नाव को बारिश के बहते पानी में चलाना और पानी में छप-छपाक करना सभी बच्चों का पसंदीदा शगल था.

लोगों की मौत और हिंसक प्रदर्शन से आगे क्या ?

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जरा सोचिये, समाज में अशांति फैलाने के लिए पेड उपद्रवियों (यानि पैसे के लिए कुछ भी करेगा टाइप उपद्रवी) और उनके पीछे प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से खड़े कतिपय राजनीतिक नेताओं को छोड़ कर ऐसा असामाजिक कृत्य कोई कैसे कर सकता है. फिर सोचने वाली बात यह भी है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने से आम कर दाताओं का ही जेब ढीला होता है. ट्रक, बस आदि जलाने से बीमा कंपनियों द्वारा क्षति का भुगतान करना पड़ता है, जो प्रकारांतर से हमें और देश को आर्थिक नुकसान पहुंचाता है. ऐसे भी, कुछ लोगों के गैरकानूनी हरकतों के कारण हजारों–लाखों लोग आए दिन बेवजह मुसीबत झेलें.



मोटिवेशन : ‘नोट बंदी’ का नाजुक दौर और हम

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कहना न होगा, डाक व बैंक कर्मियों पर इस वक्त बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, जिसका निर्वहन उन्हें अत्यधिक तन्मयता, दक्षता, संवेदनशीलता, इमानदारी एवं संयम के साथ करने की आवश्यकता है. बड़े डाकघरों तथा बैंक शाखाओं में पुराने नोट बदलनेवालों, वरीय नागरिक, दिव्यांग और महिलाओं, बड़ी जमा राशि को अपने खाते में जमा करने वाले ग्राहकों आदि के लिए अलग-अलग काउंटर खोलने की जरुरत तो है ही. संबंधित विभागों के वरीय अधिकारियों द्वारा इस कार्य की सतत मॉनिटरिंग भी अपेक्षित है. सिविल सोसाइटी के जाने -माने लोगों को भी अपनी भूमिका दर्ज करने की जरुरत है.

मौजूदा चिकित्सा परिदृश्य और आम आदमी का स्वास्थ्य

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मिलन सिन्हा आम आदमी का स्वास्थ्य दिन –पर –दिन गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है. पीने योग्य पानी का अभाव, प्रदूषित हवा और मिलावटी खाद्य पदार्थ ने आम आदमी के जीवन को छोटे- बड़े रोगों से भर दिया है. बच्चे, महिलायें तथा बुजुर्ग इनसे अपेक्षाकृत ज्यादा प्रभावित हैं. आधुनिक चिकित्सा पद्धति को आधार… Read more »

क्या हम अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर सकते ?

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– मिलन सिन्हा खेलना किसे पसंद नहीं है ? खेल की बात हो, तो बच्चे मचल उठते हैं. बड़े-बुजुर्ग भी अपने स्कूल और कॉलेज के दिनों की याद में खो से जाते हैं. अपने देश के विभिन्न खेल मैदानों में हजारों-लाखों की भीड़ हमें यह बताती है कि हमें खेलों से कितना लगाव है. हम… Read more »

दाल पर बवाल की पड़ताल

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मिलन सिन्हा दाल पर बवाल जारी है. राजनीतिक विरोधियों द्वारा केंद्र सरकार से सवाल पर सवाल पूछे जा रहे हैं. विपक्ष राज्य सरकारों से जवाब तलब नहीं कर रहा है जैसे कि दाल प्रकरण में सारा दोष केंद्र सरकार का हो. जमीनी हकीकत को देखें तो दाल की कीमतें बढ़ी हुई हैं. निम्न और मध्यम… Read more »

बिहार को बिहारी ही चलाएगा’ का क्या मतलब ?

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मिलन सिन्हा बिहार को बिहारी ही चलाएगा, ऐसा चुनाव के इस मौसम में नीतीश कुमार कहने लगे हैं, क्यों कि उन्हें बिहारी मतदाताओं को नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को बाहरी बता कर उन पर भरोसा न करने के लिए प्रेरित करना है. राजनीति में ऐसा कहना-करना गैर मुनासिब नहीं कहा जा सकता है. लेकिन… Read more »

आओ, डीएनए – डीएनए खेलें और बुनियादी मुद्दों को नेपथ्य में ठेलें

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मिलन  सिन्हा बिहार के सत्तासीन नेताओं को आजकल नींद नहीं आ रही है, कारण उनका स्वाभिमान आसन्न चुनाव से पहले अबूझ कारणों से लाखों गुना बढ़ गया प्रतीत होता है और उससे भी कहीं ज्यादा जागृत हो कर उन्हें परेशान (?) कर रहा है. कारण, कोई उन्हें आईना दिखाने की जुर्रत (?) करता है, जिसमें… Read more »

गरीब बच्चों के लिये बाल दिवस का क्या मतलब ?

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      मिलन सिन्हा फिर बाल दिवस आ गया और चाचा नेहरु का जन्म दिवस भी । फिर अनेक सरकारी- गैर सरकारी आयोजन होंगे । स्कूलों में पिछले वर्षों की भांति कई कार्यक्रमों का आयोजन होगा, ढेरों बातें होंगी, बच्चों की भलाई के   लिए ढेर सारे वादे किये जायेंगे, तालियां बजेंगी, मीडिया में तमाम ख़बरें होंगी… Read more »

कविता : प्रतीक

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मिलन सिन्हा यह पेड़ है हम सबका पेड़ है।   इसे मत छांटो इसे मत तोड़ो इसे मत काटो इसे मत उखाड़ो इसे फलने दो इसे फूलने दो इसे हंसने दो इसे गाने दो   यह पेड़ है हम सबका पेड़ है।   इसपर सबके घोसले हैं कौआ का है, मैना का है बोगला का… Read more »