लेखक परिचय

प्रमोद भार्गव

प्रमोद भार्गव

लेखक प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार है ।

राम मंदिर सहमति से हल की उम्मीद ?

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हालांकि पुरातत्वीय सक्षों, निर्मोही अखाडे़ और गोपाल सिंह विशारद द्वारा मंदिर के पक्षपक्ष में जो सबूत और शिलालेख अदालत में पेश किए गए थे, उनसे यह स्थापित हो रहा था कि विंध्वस ढांचे से पहले उस स्थान पर राममंदिर था। जिसे आक्रमणकारी बाबर ने हिन्दुओं को अपमानित करने की दृष्टि से शिया मुसलमान मीर बांकी को मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाने का हुक्म दिया था। मस्जिद के निर्माण में चूंकि शिया मुसलमान मीर बांकी के हाथ लगे थे, इस कारण इस्लामिक कानून के मुताबिक यह शिया मुसलमानों की धरोहर था। इसकी व्यवस्था

नदियों के नागरिक अधिकार

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कायापलट के बाद साबरमती की तुलना अब लंदन की टेम्स और सिंगापुर की सिंगापुर नदी से की जाने लगी है। ये दोनों नदियां कभी नालें में तब्दील हो चुकी थीं, लेकिन अब नदियों का ही रूप ग्रहण कर लिया है। साबरमाती की सफाई मुहिम के नतीजतन इसका जो कायापलट हुआ है, उसकी मिसाल विकसित देशों की सफल परियोजनाओं के बरक्ष पेश की जाने लगी है। 1152 करोड़ के रिवर फ्रंट योजना की बदौलत यह परिवर्तन संभव हुआ अब अहमदाबाद के बीचोंबीच करीब 10.5 किमी की लंबाई में बहने वाली इस नदी में साफ पानी लबालब भरा रहता है।



खुशियों के देश !

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धर्म में रूढ़ि और आडंबर को प्रचारित किया जा रहा है। जबकि खासतौर से सनातन धर्म अध्यात्म और विज्ञान का अद्भुत समन्वय है, जिसे आधुनिक वैज्ञानिक संदर्भों में कम ही परिभाषित किया जा रहा है। मानव-शरीर सरंचना के परिप्रेक्ष्य में विज्ञान की पहुंच केवल अस्थि-मज्जा के जोड़ और जैविक रसायनों के घोल तक सीमित है। जबकि मानव शरीर महज जैविक रसायनों का संगठन भर नहीं है, बल्कि उसकी अपनी मनोवैज्ञानिक एवं उससे भी इतर आध्यात्मिक सत्ता भी है, जो मानसिक स्तर पर मानवीय चेतना एवं व्यक्तित्व विकास का प्रमुख आधार तत्व है।

वजूद के संकट में मायावती

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मायावती ने मूर्तियों के माध्यम से दैवीय प्रतीक गढ़ने की जो कवायद की, हकीकत में ऐसी कोशिशें ही आज तक हरिजन, आदिवासी और दलितों को कमजोर बनाए रखती चली आई हैं। उद्यानों पर खर्च की गई धन राशि को यदि बंुदेलखण्ड की गरीबी दूर करने अथवा दलितों के लिए ही उत्कृष्ठ विद्यालय व अस्पताल खोलने में खर्च की गई होती तो एक तरफ खेती-किसानी की माली हालत निखरती और दूसरी तरफ वंचितों को निशुल्क शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाएं मिलती। किंतु मायावती की अब तक की कार्य संस्कृति में मानक व आदर्श उपायों और नई दृष्टि का सर्वथा अभाव रहा।

मुस्लिम तुष्टिकरण के बिना भी बड़ी जीत

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पा, बसपा और कांग्रेस ने जिस तादात में मुस्लिमों को टिकट दिए और संप्रदाय व जतीयता को उभारने के प्रयत्न किए, उसके चलते मायावती से जहां उसका परंपरागत जाटव वोट छिटका, वहीं सपा से यादव छिटक गए। मुलायम कुनबे की लड़ाई ने भी इस क्षरण में इजाफा करने का काम किया। कांग्रेस का राहुल गांधी के नेतृत्व में जिस तरह से जनाधार सिमट रहा है, उससे साफ है कि वंशवादी राजनीतिक परंपरा से जनता अब छुटकारा चाहती है। देश की 58 प्रतिशत आबादी और 25 फीसदी जीडीपी वाले 14 राज्यों में भाजपा की सरकारें बन जाना इसका प्रमाण है।

खून की होली खेलते जवान

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प्रमोद भार्गव देश जब रेडियो- टीवी पर पांच राज्यों में हुए चुनाव परिणामों से रूबरू हो रहा था, तब देश के जवानों पर छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सली घात लगाकर खूनी होली खेल रहे थे। सुकमा जिले के इंजरम और भेज्जी के बीच कोत्ताचेरू के जंगल में शनिवार 11 मार्च को सीआरपीएफ की रोड ओपनिंग… Read more »

अमेरिका में नस्लीय हिंसा का विस्तार

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प्रमोद भार्गव प्रवासी मुक्त अमेरिका के मुद्दे पर चुनाव जीते डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से अवसरों की भूमि माने जाने वाले अमेरिका में नस्लीय भेद हिंसा का रूप लेने लगा है। इस हिंसा के पहले शिकार दो भारतीय युवा इंजीनियर हुए। फिर साउथ कैरोलिना में भारतीय कारोबारी हर्निश पटेल की हत्या कर… Read more »

जिज्ञासा है, वैज्ञानिक उपलब्धियों का प्रतिफल

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संदर्भः- 28 फरवरी विज्ञान दिवस के अवसर पर विशेष प्रमोद भार्गव भारत में विज्ञान की परंपरा बेहद प्राचीन है। जिसे हम आज साइंस या विज्ञान कहते हैं, उसे प्राचीन परंपरा में पदार्थ विद्या कहा जाता था। देश के वैज्ञानिक नित नूतन उपलब्धियों से दुनिया को चैंका रहे है। विज्ञान के क्षेत्र में हमारी प्रगति अब… Read more »

अमेरिका में बढ़ती नस्लीय नफरत

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प्रमोद भार्गव   प्रवासी मुक्त अमेरिका के मुद्दे पर चुनाव जीते डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से अवसरों की भूमि माने जाने वाले अमेरिका में नस्लीय भेद हिंसा का रूप लेने लगा है। इस हिंसा के पहले शिकार दो भारतीय युवा इंजीनियर हुए हैं। इनमें से हैदराबाद के एक श्रीनिवास कुचिवोतला की मौके… Read more »

महाराष्ट्र ने तय किया भाजपा का रुख

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प्रमोद भार्गव महाराष्ट्र में आए नगरीय चुनाव परिणामों ने लगभग यह तय कर दिया है कि उत्तर-प्रदेश समेत 5 राज्यों में चुनाव परिणामों का क्या रुख संभव है ? हालांकि कहने वाले आसानी से कह सकते है कि निकाय चुनाव राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय नहीं करते। लोकसभा व विधानसभा चुनाव में इनका सीधा-सीधा असर… Read more »