लेखक परिचय

प्रमोद भार्गव

प्रमोद भार्गव

लेखक प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार है ।

रायसीना संवाद में संप्रभुता के सम्मान पर जोर

Posted On & filed under विविधा.

संदर्भः रायसीना डायलाॅग में पड़ोसी देशों को नसीहत प्रमोद भार्गव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘रायसीना संवाद‘ में बोलते हुए कहा है कि भारत अपने पड़ोसी देशों से अच्छे संबंध बनाए रखना चाहता है। इस नाते मोदी ने न सिर्फ पाकिस्तान को उसकी बेजा हरकतों के लिए चेताय, बल्कि चीन को भी नसीहत देते हुए कहा… Read more »

सकारात्मकता के लिए आनंद मंत्रालय

Posted On & filed under समाज.

प्रमोद भार्गव आज पूरे देश में आत्महत्याएं बढ़ रही हैं। हर वर्ग, जाति उम्र और धर्म का व्यक्ति आत्महत्या कर रहा है। इसके कारणों में पढ़ाई, होड़, भविष्य निर्माण, एकाकीपन, ईश्र्या व विद्वेष माने जा रहे हैं। व्यक्ति आत्महंता न बने, इस दृष्टि से मध्य-प्रदेश सरकार ने एक अनूठी पहल कर दी है। आनंद उत्सव… Read more »



पुस्तक संस्कृति विकसित करने की जरूरत

Posted On & filed under विविधा.

संदर्भ- सात जनवरी से दिल्ली में शुरू होने वाले पुस्तक मेले पर विशेष प्रमोद भार्गव हर साल की तरह इस बार भी भारतीय पुस्तक न्यास द्वारा पुस्तक मेला आयोजित है। मेले की मुख्य थीम ‘ औरतों द्वारा औरतों पर लिखि गईं पुस्तकें‘ होंगी। साथ ही नेशनल बुक ट्रस्ट के साठ साल के सफरनामे पर भी… Read more »

नोटबंदी के साये में चुनाव

Posted On & filed under राजनीति.

प्रमोद भार्गव पांच राज्यों के लिए विधानसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हो गई है। इनमें उत्तरप्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर राज्य हैं, लेकिन देश की निगाह उत्तरप्रदेश पर टिकी है। अपवादस्वरूप कोई आम चुनाव छोड़ दें तो दिल्ली का रास्ता उत्तरप्रदेश से ही निकलता है। यही वजह है कि उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव को लोकसभा… Read more »

धर्म के अंसैवाधानिक चुनावी प्रयोग पर अंकुश

Posted On & filed under राजनीति, विधि-कानून.

प्रमोद भार्गव सर्वोच्च न्यायालय की सात सदस्यीय पीठ के ताजा फैसले से राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों को धर्म, जाति, नस्ल, समुदाय और भाषा के आधार पर वोट मांगना मुश्किल होगा। वोट मांगे तो उम्मीदवारी को अंसैवाधानिक ठहराया जा सकता है ? हालांकि ऐसा तभी संभव होगा जब आचार-संहिता के उल्लघंन की उच्च न्यायालय में अपील… Read more »

मध्यप्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी

Posted On & filed under विविधा.

संदर्भः श्रम और रोजगार मंत्रालय की सर्वेक्षण रिपोर्ट से हुआ खुलासा प्रमोद भार्गव श्रम और रोजगार मंत्रालय की सर्वेक्षण रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि जहां देश के अन्य प्रांतों में बेरोजगारी का प्रतिशत घटा है, वहीं मध्यप्रदेश में बेरोजगारी की दर बढ़ी हैं। संसद में पेश की गई इस रिपोर्ट से पता चला है… Read more »

मिसाइल क्षेत्र के वैश्विक समूह में भारत

Posted On & filed under विविधा.

संदर्भः भारत की सबसे शक्तिशाली मिसाइल अग्नि-5 का सफल परीक्षण प्रमोद भार्गव   सफलता की एक नई महागाथा लिखते हुए भारत ने परमाणु क्षमता से युक्त अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 का सफल परीक्षण किया। 5000 किमी से भी अधिक दूरी पर स्थित लक्ष्य को भेदने में सक्षम इस प्रक्षेपास्त्र को उड़ीसा के अब्दुल कलाम समुद्री… Read more »

घर का सच होता सपना

Posted On & filed under विविधा.

प्रमोद भार्गव नोटबंदी के बाद कतार में लगे लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नववर्ष की पूर्व संध्या पर राहत के बड़े उपाय किए हैं। इनमें सबसे ज्यादा यह कोशीश है कि बेघर परिवार किसी तरह घर का मालिक बने। इसी लिहाज से छोटे कर्ज पर ब्याज दरों में बड़ी छूट दी गई है। इससे… Read more »

चुनावी चंदे में पारदर्शिता का सवाल

Posted On & filed under राजनीति.

जिस ब्रिटेन से हमने संसदीय सरंचना उधार ली है,उस बिट्रेन में परिपाटी है कि संसद का नया कार्यकाल शुरू होने पर सरकार मंत्री और संासदो की संपति की जानकारी और उनके व्यावसायिक हितों को सार्वजानिक करती है। अमेरिका में तो राजनेता हरेक तरह के प्रलोभन से दूर रहें, इस दृष्टि से और मजबूत कानून है। वहां सीनेटर बनने के बाद व्यक्ति को अपना व्यावसायिक हित छोड़ना बाघ्यकारी होता है। जबकि भारत में यह पारिपाटी उलटबांसी के रूप में देखने में आती है। यहां सांसद और विधायाक बनने के बाद राजनीति धंधे में तब्दील होने लगती है। ये धंधे भी प्रकृतिक संपदा के दोहन, भवन निर्माण, सरकारी ठेके, टोल टैक्स, शराब ठेके और सार्वजानिक वितरण प्रणाली के राशन का गोलमाल कर देने जैसे गोरखधंधो से जुड़े होते है।

कश्मीरियत को कलंकित करते अलगाववादी

Posted On & filed under राजनीति.

संदर्भ- हिंदू शरणार्थियों को नागरिक पहचान-पत्र देने पर बवाल- प्रमोद भार्गव दुनिया में ऐसे अलोकतांत्रिक देश बहुत हैं, जहां फैसला लेने और लोगों पर थोपने से पहले सरकारें जरा भी मानव-समुदायों की परवाह नहीं करती हैं। किंतु यह भारतीय व्यवस्था की अर्से से चली आ रही उदारता ही है कि अलगाववादियों की बेलगाम अतिवादिता पर… Read more »