लेखक परिचय

डा. राधेश्याम द्विवेदी

डा. राधेश्याम द्विवेदी

Library & Information Officer A.S.I. Agra

दम तोड़ती भारत की जीवित जीवनदायिनी मैया यमुना

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इसका बड़ा कारण यह है कि दिल्ली के करीब 50 फीसद इलाकों में सीवर नेटवर्क नहीं है। जल बोर्ड के सीवरेज शोधन संयंत्रों की क्षमता करीब 604 एमजीडी है, लेकिन प्रतिदिन करीब 450 एमजीडी सीवरेज शोधित हो पाता है। जल बोर्ड ने 1962 करोड़ रुपये की लागत से इंटरसेप्टर सीवर लाइन का निर्माण वर्ष 2011 में शुरू कराया था। अभी तक इसका एक पैकेज पूरा हुआ है। इसके पांच पैकेजों का काम अधूरा है। इसके अलावा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर छोटे नालों के गंदे पानी के शोधन के लिए 14 सीवरेज शोधन संयंत्र लगाने की योजना बनी थी।

गंगा-यमुना मैया को जीवित मानव जैसा अधिकार मिला

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न्यायालय ने आठ सप्ताह के भीतर केंद्र सरकार को गंगा मैनेजमेंट बोर्ड बनाने का आदेश भी दिया है। यह महत्वपूर्ण एवं दूरगामी आदेश हरिद्वार निवासी मोहम्मद सलीम नामक व्यक्ति की एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति श्री राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति श्री आलोक सिंह की संयुक्त खंडपीठ ने जारी किया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि पूर्व सुनवाई में केंद्र सरकार को पांच दिसंबर तक गंगा मैनेजमेंट बोर्ड बनाए जाने के निर्देश दिए गए थे। पिछले साल पांच दिसंबर को कोर्ट ने तीन माह के भीतर गंगा प्रबंधन बोर्ड बनाने व परिसंपत्तियों का बंटवारा करने के आदेश पारित किए थे। अभी तक इस आदेश का पालन नहीं किया गया है।



आगरा को सुधारने की जरुरत

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वर्तमान समय में इस शहर की सर्वधिक बड़ी समस्या जाम की है । सप्ताहान्त में बाहर के मुसाफिर आगरा में ज्यादा आ जाते है। कहीं कोई रैली का आयोजन हुआ तो भी भीड़ बढ जाती है। जब शहर में प्रतियागिता की कोई परीक्षाये होती हैं तो भी यह भीड़ देखी जा सकती हैं। इसके समाधान के लिए प्रशासन जो भी उपाय करता है वह पर्याप्त नहीं होता है। पुलिस की पेट्रोलिंग इस उद्देश्य से कभी नहीं की जाती है। टैम्पां व रिक्शे सवारियों के लिए आम जनता की सुविधाओं की अनदेखी करते रहते हैं।

आगरा की नगर संरचना

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लाकृति- भवन, निवास एवं आवादी:-आगरा नगर का विकास किसी निश्चित योजना के अनुकूल ना होकर अव्यवस्थित- बेतरतीब रुप में हुआ है। यह पुराने तथा नये आबादी का अनूठा संयोग है। यह विभिन्न समयों में अस्तित्व में आने वाले स्थलों का संगुटीकरण है, जो विकास-प्रसार प्रक्रिया द्वारा एक हो गये हैं। यह शहर विस्तारित योजना के अनुरुप ना होकर अनेक ऊंची नीची भूमि , नदी के किनारे का ऊंचा टीला, तलहटी तथा ऊंचा नीचा विशेष स्थलाकृति की रुपरेखा मात्र है।

इतिहास से सीख (लघुकथा)

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डा. राधेश्याम द्विवेदी महाभारत के कौरव तथा पाण्डवों के बीच हुए युद्ध तथा विवाद के बारे में एक पिता पुत्र के मध्य वार्तालाप हो रही थी। पिता बार बार श्रीकृष्ण की दूरदर्शिता की सराहना कर रहे थे और पुत्र बार बार तर्क देकर श्रीकृष्ण के नाटकीय चरित्र पर उंगली उठाकर आशंका व्यक्त कर रहा था।… Read more »

धर्म मजहब और धर्म निरपेक्षता

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आज तक हिंदुओं ने किसी को हज पर जाने से नहीं रोका। लेकिन हमारी अमरनाथ यात्रा हर साल बाधित होती है। फिर भी हम ही असहिष्णु हैं। हमें दोषी ठहराके ये अपने एवार्ड वापस करने का नाटक करते हैं। यह तो कमाल की धर्मनिरपेक्षता है। समय रहते भारत के हिन्दुओं समझ जाओ, संभल जाओ ।

जोगीरा हास्य व्यंग की अनूठी विधा

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किसके बेटा राजा रावण किसके बेटा बाली?
किसके बेटा हनुमान जी जे लंका जारी?
विसेश्रवा के राजा रावण बाणासुर का बाली।
पवन के बेटा हनुमान जी, ओहि लंका के जारी।
जोगी जी वाह वाह, जोगी जी सारा रा रा।

बृद्धावस्था बोझ नहीं, परिवार व समाज के उद्धारक बनें

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दादा दादी , नाना नानी के संरक्षण में बच्चों में आत्मविश्वास और सुरक्षित होने की भावना बढ़ती है। जिन घरों में गृहणियां बाहर नहीं जातीं , वहां भी वरिष्ठ सदस्यों की प्रासंगिकता रहती है। पति पत्नी एक मर्यादा में रहते हैं। बात बात में आपे से बाहर नहीं होते।बुढ़ापे को बेकार मत समझिए। इसे सार्थक दिशा दीजिए। तन में बुढ़ापा भले ही आ जाए, पर मन में इसे मत आने दीजिए। आप जब 21 के हुए थे तब आपने शादी की तैयारी की थी, अब अगर आप 51 के हो गए हैं तो शान्ति की तैयारी करना शुरू कर दीजिए। सुखी बुढ़ापे का एक ही मन्त्र हैं। दादा बन जाओ तो दादागिरी छोड़ दो और परदादा बन जाओ तो दुनियादारी करना छोड़ दो।

पचनदा का पौराणिक एवं बीहड़ परिक्षेत्र

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पचनदा धार्मिक और पौराणिक महत्व का सबसे दुर्भल स्थल है। यहां के प्राचीन मंदिरों में लगे पत्थर आज भी दुनिया के इस आश्चर्य और भारत की श्रेष्ठ सांस्कृतिक धार्मिक विरासत का बखान कर रहे हैं। 800 ईसा पूर्व पचनदा संगम पर बने महाकालेश्वर मंदिर पर साधु-संतों का जमावड़ा लगा रहता है।

आधुनिकता का गरुर

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डा. राधेश्याम द्विवेदी पापा मुझे चोट लग गया खून आ रहा है। स्कूल के लिए निकलते एक बच्चे के मुख से ये शब्द निकला था। 5 साल के अपने बच्चे के मुँह से इतना सुनते ही लगभग 40 साल पूर्व साधारण सा दिखने वाले एक पापा सब कुछ छोड़ छाड़ कर बच्चे को गोदी में… Read more »