लेखक परिचय

सुरेश हिन्‍दुस्‍थानी

सुरेश हिन्‍दुस्‍थानी

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

सपा का घमासान लोकतंत्र पर प्रहार

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उत्तरप्रदेश में चल रहा समाजवादी पार्टी का घमासान देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर करारा प्रहार कहा जा सकता है। राजनीतिक पार्टियां लोकतांत्रिक व्यवस्था का भले ही दम भरती हों, लेकिन इस प्रणाली का राजनीतिक दलों के नेता कितना पालन करते हैं, यह कई बार देखा जा चुका है। पूरी तरह से एक ही परिवार पर केन्द्रित समाजवादी पार्टी अलोकतांत्रिक रुप से आगे बढ़ती हुई दिखाई देने लगी है। समाजवादी पार्टी की खानदानी लड़ाई के चलते पिछले कई दिनों से समाचार पत्रों व विद्युतीय प्रचार तंत्र की मुख्य खबर बनी हुई है।

सपा के असमंजस में विकल्प की तलाश

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सुरेश हिन्दुस्थानी एक कहावत है कि दुश्मन से तो बचा जा सकता है, लेकिन जब अपने ही दुश्मन हो जाएं तो बचने की उम्मीद किसी भी तरीके से संभव नहीं होती। वर्तमान में समाजवादी पार्टी में कुछ इसी प्रकार के हालात दिखाई दे रहे हैं। जहां अपने ही दुश्मन बनकर आमने सामने आ चुके हैं।… Read more »



सपा का नाटक कहीं प्रायोजित तो नहीं ?

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सुरेश हिंदुस्थानी उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी में जिस प्रकार से विभाजन की पटकथा लिखी जा रही है, वह पूरी तरह से प्रायोजित कार्यक्रम की तरह ही दिखाई दे रहा है। सपा में एक समय मुख्यमंत्री के दावेदार के तौर पर दिखाई देने वाले मुलायम सिंह के भाई शिवपाल सिंह को इस दावेदारी से अलग करने… Read more »

सपा में फिर बढ़ी अंदरुनी कलह

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सुरेश हिन्दुस्थानी उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी में कोहराम थमने का नाम नहीं ले रहा है, प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव अपने राजनीतिक अस्तित्व का प्रदर्शन यदाकदा करते हुए दिखाई देते हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव चाहते हैं कि प्रदेश की जनता सपा सरकार के प्रदर्शन के आधार पर ही विरोध या समर्थन करेंगे। ऐसे में एक… Read more »

नीचे के भ्रष्टाचार पर भी कार्यवाही हो

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भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए केन्द्र सरकार के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक प्रकार से आयुर्वेद जैसी उपचार पद्धति अपनाई है। आयुर्वेद उपचार की विशेषता है कि धीरे धीरे ही सही समस्या जड़ से समाप्त हो जाएगी। किसी भी प्रकार की समस्या को इस पद्धति से समाप्त करने के लिए धीरज रखने की आवश्यकता है। देश की जनता जितना धीरज से काम लेगी, उतना ही अ‘छा होगा। इससे देश को तो बहुत बड़ा लाभ मिलने वाला ही है, लेकिन आम जनता भी आने वाले समय में प्रसन्नता का अनुभव करेगी।

लोकतांत्रिक मर्यादा का चीरहरण करता विपक्ष

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वर्तमान में देश में विरोधी दलों द्वारा जिस प्रकार की राजनीति की जा रही है, वह देश को पीछे ले जाने की कवायद मानी जा सकती है। इसे लोकतांत्रिक मर्यादा का चीरहरण भी कहा जा सकता है। विपक्ष द्वारा किए गए भारत बंद का आहवान देश की जनता ने पूरी तरह से नकार दिया। यहां तक कि देश के व्यापारियों ने भी इससे किनारा करके विपक्ष को यह जता दिया कि वह भारत बंद के विरोध में है।

नोट बंदी : विकास की तरफ बढ़ते भारत के कदम

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करीब 35 हजार करोड़ का कालाधन बाहर आ चुका है। कश्मीर में सुरक्षा बलों पर होने वाले पथराव पर रोक लगी है। इससे यह जाहिर है कि अलगाववादी या पाकिस्तान एजेंट पांच-पांच सौ देकर युवकों को पथराव के लिए प्रेरित करते थे। यहां तक कि नक्सली आतंकी भी कह रहे है कि नोटबंदी का गरीबों के हित में निर्णय है और वे समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का मन बना रहे है। जनता के लिए कल्याणकारी योजनाएं लागू हुई है।

आतंकी गतिविधि पर भी हुई नोट की चोट

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देश के महापुरुष डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कहा था कि देश में भ्रष्टाचार को समाप्त करना है तो दस वर्ष के अंदर नोट बदल देना चाहिए। राष्ट्र उत्थान की दिशा में उनका चिंतन कितना महान था। भारत की स्वतंत्रता से पूर्व देश का राजनीतिक नेतृत्व वास्तव में देश हित की बातें ही सोचता था, भ्रष्टाचार का कहीं भी नामोनिशान नहीं था। उस समय के काल में राजनीति सेवा का माध्यम था

सैनिक की शहादत पर शर्मनाक राजनीति

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यहां उल्लेखनीय तथ्य यह भी है कि केन्द्र में जब कांगे्रस की सरकार रही, उस समय देश की समस्याओं पर गंभीरता पूर्वक चिंतन करके उसे सुलझाने का प्रयास किया जाता तो संभवत: आज देश की हालत यह नहीं होती। लेकिन कांगे्रस ने कभी भी पूरे मन से देश की समस्याओं को सुलझाने का काम नहीं किया। अगर किया होता तो देश के राजनीतिक परिदृश्य से कांगे्रस का इस प्रकार से विलोपन नहीं होता, जिस प्रकार से लोकसभा के चुनाव में दिखाई दिया। यहां सबसे ज्यादा गौर करने बाली बात यह भी है, आज भी कांगे्रस केवल अपनी स्थिति में सुधार करने का प्रयास करती हुई दिखाई नहीं देती।

सपा का नाटक और मुलायम की रणनीति

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समाजवादी पार्टी की कमजोरी इस बात से भी परिलक्षित हो रही है कि उसके मुखिया मुलायम सिंह यादव सपा को पुन: सत्ता दिलाने के लिए राजनीतिक वैसाखी की तलाश में जुट गए हैं। बिहार की तर्ज पर उत्तरप्रदेश में भी महागठबंधन बनाने की तैयारी सपा की ओर से की जा रही है। भविष्य में सपा अपनी इस रणनीति में कितना सफल हो पाएगी, यह नहीं कहा जा सकता