लेखक परिचय

विजय कुमार

विजय कुमार

निदेशक, विश्व संवाद केन्द्र सुदर्शन कुंज, सुमन नगर, धर्मपुर देहरादून - २४८००१

बकरी हों तो वही…  

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हमारे प्रिय शर्मा जी पिछले दिनों किसी विवाह के सिलसिले में मध्य प्रदेश गये थे। परसों वे लौटे, तो मैं उनसे मिलने चला गया। चाय पीते और शादी की मिठाई खाते हुए शर्मा जी ने म.प्र. का एक अखबार मुझे देकर कहा – लो वर्मा, इसे पढ़ो..। – शर्मा जी, कहां ताजी चाय और कहां… Read more »

देहरादून में नारद जयंती एवं पत्रकार सम्मान समारोह

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14 मई, 2017 (रविवार) को ओ.एन.जी.सी. के खचाखच भरे विशाल सभागृह में विश्व संवाद केन्द्र, देहरादून की ओर से ‘नारद जयंती एवं पत्रकार सम्मान समारोह’ सम्पन्न हुआ। समारोह में मुख्य वक्ता थे राज्यसभा सांसद डा. सुब्रह्मण्यम स्वामी तथा अध्यक्षता मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने की। डा. स्वामी ने नारद जी को भगवान का सूचना… Read more »



चूहा साहित्य में नया अध्याय 

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आजकल शायद ही कोई बच्चा हो, जो टी.वी. पर चालाक चूहे और खूंखार बिल्ले वाली ‘टॉम और जैरी’ की कार्टून कथा न देखता हो। वैसे समय काटने के लिए कई बूढ़े भी इसे देखते हैं। ये कार्टून कथा तो विदेशी है; पर इससे हजारों साल पूर्व पंचतंत्र और अन्य भारतीय कथा साहित्य में चूहों की… Read more »

फर्क डी.एन.ए. का है

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संघ का डी.एन.ए. सौ प्रतिशत भारतीय है। उसने अपने प्रतीक और आदर्श भारत से ही लिये। भगवे झंडे को गुरु माना। देश, धर्म और समाज की सेवा में अपना तन, मन और धन लगाने वाले सभी जाति, वर्ग, क्षेत्र, आयु और लिंग के महामानवों को अपने दिल में जगह दी। हिन्दू संगठन होते हुए भी अन्य मजहब या विचार वालों से द्वेष नहीं किया। उन्हें समझने तथा शिष्टता से अपनी बात समझाने का प्रयास किया। शाखा के साथ-साथ निर्धन और निर्बल बस्तियों में सेवा के लाखों प्रकल्प खोले। अतः संघ धीरे-धीरे पूरे भारत में छा गया और लगातार बढ़ रहा है।

केरल में बढ़ती हिंसा चिंताजनक

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केरल के मुसलमान आज भी बड़ी संख्या में खाड़ी देशों में काम के लिए जाते हैं। इससे उनके घर तथा मस्जिदें सम्पन्न हुई हैं। उनकी भाषा, बोली और रहन-सहन पर भी अरबी प्रभाव दिखने लगा है। यह चिंताजनक ही नहीं, दुखद भी है। देश विभाजन की अपराधी मुस्लिम लीग को देश में अब कोई नहीं पूछता, पर जनसंख्या और धनबल के कारण केरल में आज भी उनके विधायक और सांसद जीतते हैं।

पुनर्मूषको भव :

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अखिलेश हों या मायावती या फिर केजरीवाल। सबको खोट अपनी नीतियों में नहीं, वोट मशीनों में लग रहा है। कांग्रेस के सुपर लीडर तो अभी चुप हैं; पर उनके कुछ साथी इसका विरोध कर रहे हैं। राहुल बाबा ने चुनाव में काफी काम किया है। इसके परिणाम उनके लिए तो नहीं, पर देश के लिए अच्छे रहे। सुना है अभी वे थकान उतार रहे हैं। जब वे काम के मूड में आएंगे, तब देखेंगे कि क्या कहते हैं ?

      दिमागीन सर्विस सेंटर

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बचपन में एक कहावत सुनी थी, ‘सिर बड़े सरदारों के, पैर बड़े कहारों के।’ बुजुर्ग बताते थे कि सरदार यानि सिख पगड़ी बांधते हैं, इसलिए उनका सिर बड़ा दिखायी देता है। दूसरी ओर कहार दिन भर सामान उठाकर इधर-उधर भागता रहता है। पैरों पर अधिक बोझ पड़ने के कारण उसके पैर बड़े हो जाते हैं।… Read more »

स्वच्छ भारत अभियान : अभियानों से नहीं सुधरेगी व्यवस्था

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बाजारों में एक अजीब दृश्य दिखता है। लोग सुबह दुकान खोलते समय सफाई करते हैं और फिर कूड़ा सड़क पर डाल देते हैं। घरों में भी प्रायः ऐसा होता है। अब कई जगह नगरपालिकाएं सप्ताह में दो बार कूड़ागाड़ी भेजने लगी हैं; पर लोगों को आज नहीं तो कल समझना होगा कि सफाई करने की नहीं रखने की चीज है। ऐसी वस्तुएं प्रयोग करें, जो फिर काम आ सकें। घर का कूड़ा घर में ही खपाना या नष्ट करना होगा। वरना समस्या बढ़ती ही जाएगी।

वरदान  

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दूसरे ही दिन आशा के पिताजी का फोन आया और फिर वे अपनी पत्नी के साथ हमारे घर आ गये। प्रारम्भिक बात के बाद उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति और विवाह का बजट साफ-साफ हमें बता दिया। उन्होंने कहा कि यदि इसके बाद भी आप हमारी बेटी लेंगे, तो यह उनके लिए बहुत खुशी की बात होगी। आपके घर की बहू बनना आशा के लिए सौभाग्य की बात है। हम तो सोचते थे कि वह नर्स है, तो अस्पताल के किसी कर्मचारी से ही उसका विवाह कर देंगे; पर वह इतने अच्छे और सम्पन्न परिवार में जाएगी, यह तो हमने कभी सोचा ही नहीं था।

मोदी लहर में सब साफ

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भा.ज.पा. को शुरू से ही बादल विरोधी रुझान दिख रहा था। फिर भी उसने साथ नहीं छोड़ा। इसके दो कारण हैं। एक तो दोनों का साथ पुराना है। दूसरा भा.ज.पा. वहां शहरी हिन्दुओं की पार्टी है, तो अकाली ग्रामीण सिखों की। दोनों का मेल वहां सामाजिक सद्भाव का समीकरण बनाता है। इसे बचाने के लिए निश्चित हार का खतरा उठाकर भी भा.ज.पा. अकालियों के संग रही।