#बलिदानदिवस : “एक ऐसा पत्रकार जिसके लिए पत्रकारिता सदैव एक मिशन रहा”

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इसी कलम ने ब्रिटिश हूकूमत की जड़ें हिला दी थी । इसी कलम से नेपोलियन भी डरा करता था । लेकिन आज के समय में कुछ गंदी और ओछी मानसिकता के हमारे भाई लोगों (पत्रकारों) की वजह से इस कलम की महत्ता में गिरावट आई है । लेकिन आज भी कुछ ऐसे कलम के सिपाही हैं जिनके ऊपर मौजूदा पत्रकारिता को गर्व है । आज गणेश शंकर विद्यार्थी जी हमारे बीच नही हैं लेकिन उनका वो मिशन जरूर है जिसके लिए उन्होंने अपने प्राणों को बलिदान कर दिया । ऐसे महान व् कर्मठ व्यक्तित्व को शत शत नमन ……..

योगीराज का लाॅगइन ‘विकास’ है तो पासवर्ड ‘हिंदुत्व’।

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भारत में तब
सनातन धर्म लगभग समाप्ति पर आ गया था, देश में बौद्ध और जैन हो गए थे।
रामायण और महाभारत जैसे ग्रन्थ खो गए थे, महाराज विक्रम ने ही पुनः उनकी
खोज करवा कर स्थापित किया। विष्णु और शिव जी के मंदिर बनवाये और सनातन
धर्म को बचाया। गौर से देखें थे विक्रमादित्य और आज के ‘योग्यादित्य’ के
समय की परिस्थितियां एक जैसी हैं

वीरव्रत

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कल्पना से परे है कि अध्ययन में कुशाग्र, हर ओर से समाज की बराबरी करने के बाद भी समाज ने उनसे भेदभाव किया। लेकिन लगातार प्रताड़ित होने के बाद भी उन्होंने संघर्ष नहीं छोड़ा। विधि, अर्थशास्त्र व राजनीति शास्त्र में अध्ययन, कोलंबिया वि.वि. और लंदन स्कूल आॅफ इकाॅनोमिक्स से कई डाक्टरेट डिग्रियां लीं। कुल 32 डिग्रियां बाबासाहेब ने प्राप्त कीं। जीवन भर समाज के दलित, पिछड़े और शोषित वर्ग की आवाज बने रहे। उन्होंने अपने समाज को शैक्षिक, आर्थिक, राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक आदि रूपों में समान करने का अथक प्रयास किया। मृत्यु के 34 वर्ष उपरान्त 1990 में उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया।

देह के बाद अनुपम

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अरुण तिवारी जब देह थी, तब अनुपम नहीं; अब देह नहीं, पर अनुपम हैं। आप इसे मेरा निकटदृष्टि दोष कहें या दूरदृष्टि दोष; जब तक अनुपम जी की देह थी, तब तक मैं उनमें अन्य कुछ अनुपम न देख सका, सिवाय नये मुहावरे गढ़ने वाली उनकी शब्दावली, गूढ से गूढ़ विषय को कहानी की तरह… Read more »

एक अलहदा राजनेता शिवराजसिंह चौहान

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मनोज कुमार शिवराजसिंह सरकार के खिलाफ राजधानी भोपाल में प्रतिपक्ष कांग्रेस जंगी प्रदर्शन करती है और इस प्रदर्शन में शामिल होकर लौटते समय एक सडक़ हादसे में एक कांग्रेसी कार्यकर्ता की मृत्यु हो जाती है. इस कार्यकर्ता के परिवार को मुख्यमंत्री शिवराजसिंह दो लाख रुपयों की मदद करते हैं. यह शायद पहली बार हो रहा… Read more »

भारत के विरूद्ध भारतीय ‘बौद्धिक-बहादुरों’ की जमात के अभारतीय करामात

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मनोज ज्वाला कहा जाता है कि मुट्ठी भर अंग्रेज इंग्लैण्ड से कई गुणा विशाल भारत पर शासन करने में इसी कारण सफल हो पाए , क्योंकि उनकी सेना और पुलिस में नब्बे प्रतिशत से अधिक लोग भारतीय ही थे । छल-छद्म की रीति व कुटिल कूटनीति से भारतीय राजाओं-रजवाडों का सहयोग-समर्थन और अंग्रेजी पढे-लिखे लोगों… Read more »

पर्यावरण के इस उजाले को कोई तो बांचे

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 ललित गर्ग – आदर्श की बात जुबान पर है, पर मन में नहीं। उड़ने के लिए आकाश दिखाते हैं पर खड़े होने के लिए जमीन नहीं। दर्पण आज भी सच बोलता है पर हमने मुखौटे लगा रखे हैं। ग्लोबल वार्मिंग आज विश्व के सामने सबसे बड़ी गंभीर समस्या है और हम पर्यावरण को दिन-प्रतिदिन प्रदूषित… Read more »

नैतिक शिक्षा के पैरोकार महात्मा गांधी

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गांधी पुण्यतिथि पर विशेष मैं कभी झूठ नहीं बोलता, यह वाक्य लगभग हर आदमी कहता है लेकिन जब स्वयं की गलती मानने का वक्त होता है तो वह केवल और केवल झूठ का सहारा लेता है। यह बनी-बनायी बात नहीं है अपितु जीवन का एक कड़ुवा सत्य है। ऐसा क्यों हुआ या हो रहा है?… Read more »

गांधी का पुनर्जन्म हो

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महात्मा गांधी पुण्यतिथि- 30 जनवरी – ललित गर्ग – महात्मा गांधी बीसवीं शताब्दी में दुनिया के सबसे सशक्त, बड़े एवं प्रभावी नेता के रूप में उभरे, वे बापू एवं राष्ट्रपिता के रूप में लोकप्रिय हुए, वे पूरी दुनिया में अहिंसा, शांति, करूणा, सत्य, ईमानदारी एवं साम्प्रदायिक सौहार्द के सफल प्रयोक्ता के रूप में याद किये… Read more »

महान क्रंातिकारी लाला लाजपत राय

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28 जनवरी पर विशेष म्ृात्युंजय दीक्षित आदर्शों के प्रति समर्पित आर्यसमाजी धार्मिक सदभाव के प्रणेता देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान करने वाले महान क्रांतिकारी लाला लाजपत राय का जन्म 28 जनवरी 1865 तत्कालीन पंजाब के फिरोजपुर के जगरांव के निकट ढुंढके गंाव में हुआ था। लाला लाजपत राय के पिता का नाम राधाकृष्ण… Read more »