जीवन की अंतिम सांस तक आजाद रहने वाले क्रांतिकारी:-चंद्रशेखर आजाद

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23 जुलाई पर विशेष:- मृत्युंजय दीक्षित क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अप्रतिम व ऐतिहासिक योद्धा थे। उनका जन्म 23 जुलाई  1906 को भाबरा गांव में हुआ था। उनके पूर्वज उन्नाव जिले के वासी थे। आजाद के पिता का नाम सीताराम तिवारी तथा माता का नाम जगरानी देवी था। उनका प्रारम्भिक जीवन मप्र… Read more »

देश के करोडों युवाओं के रोल मॉडल हैं मिसाइल मैन डॉ. कलाम

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(भारत रत्न डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम जी की द्वितीय पुण्यतिथि 27 जुलाई 2017 पर विशेष आलेख) भारत माँ के सपूत, मिसाइल मैन, राष्ट्र पुरुष, राष्ट्र मार्गदर्शक, महान वैज्ञानिक, महान दार्शनिक, सच्चे देशभक्त ना जाने कितनी उपाधियों से पुकार जाता था भारत रत्न डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम जी को वो सही मायने में… Read more »

रामनाथ कोविन्द: दसों दिशाएं कर रही हैं मंगलगान

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राकेश कुमार आर्य  श्री रामनाथ कोविन्द अब जबकि 66 प्रतिशत मत लेकर और अपनी प्रतिद्वंद्वी श्रीमती मीरा कुमार को परास्त कर भारत के राष्ट्रपति घोषित किये जा चुके हैं, तब उनके राष्ट्रपति बनने के अर्थ, संदर्भ और परिणामों पर विचार करना उचित होगा। श्री कोविन्द के राष्ट्रपति बनने का अर्थ है कि इस समय… Read more »

निर्विवाद प्रणब मुख़र्जी

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कल 24 जुलाई से राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के नाम के साथ ‘पूर्व’ जुड़ जाएगा। विनम्र और शालीन व्यक्तित्व वाले राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को विवेकशील फैसलों के लिए याद किया जाएगा।अब प्रणब मुखर्जी का आधिकारिक पता 10 राजाजी मार्ग होगा जहां पूर्व राष्टपती एपीजे अब्दुल कलाम कभी रहा करते थे / आज संसद भवन मे उनकी… Read more »

“आचार्य धनंजय और उनका आर्ष गुरूकुल पौंधा-देहरादून”

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 11 जुलाई, 2017 को 39वें जन्म दिवस पर मनमोहन कुमार आर्य देहरादून की भूमि सन् 1879 में महर्षि दयानन्द जी के चरणों से पहली बार पवित्र हुई थी जब वह यहां आये थे। इसके बाद 7 अक्तूबर 1880 को उनका दूसरी बार आगमन हुआ था। उनके आने के साथ ही यहां आर्य समाज स्थापित हुआ… Read more »

कम्युनिज्म से अध्यात्म की यात्रा : उदासीन संत रामजीदास

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मार्क्स और लेनिन को पढ़ने वाला, लिख-गा रहा है नर्मदा के गीत – लोकेन्द्र सिंह ऐसा कहा जाता है- ‘जो जवानी में कम्युनिस्ट न हो, समझो उसके पास दिल नहीं और जो बुढ़ापे तक कम्युनिस्ट रह जाए,समझो उसके पास दिमाग नहीं।’ यह कहना कितना उचित है और कितना नहीं, यह विमर्श का अलग विषय है। हालाँकि मैं यह नहीं मानता, क्योंकि… Read more »

क्षणजन्मा डॉक्टर हेनरी नॉर्मन बेथुन

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किताब चलते रहने का हौसला पैदा करती है, रास्ता दिखाती है और कभी कभी हमारा रास्ता रोककर खड़ी हो जाती है। — अनाम   कभी कभार ही ऐसा होता है कि आपके हाथ ऐसी किताब लग जाए जो सालों बीत जाने पर भी आपकी चेतना को संस्कार-मण्डित करती रहती है और सदा के लिए महत्वपूर्ण… Read more »

सब कुछ अपने आप मिलता गया : असीमा भट्ट

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बिहार के छोटे से शहर नवादा की असीमा भट्ट ने अपनी हिम्मत और जुनून के दम पर रंगमंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है। धारावाहिक ‘मोहे रंग दे’ और ‘बैरी पिया’ में उन्होंने सशक्त अभिनय कर दर्शकों की वाहवाही भी बटोरी। वह इन दिनों फिल्मों में चरित्र भूमिकाएं भी निभा रही हैं… इन दिनों आप… Read more »

सावरकर

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कांग्रेस के नेतृत्व की इन भूलों पर सावरकर बहुत खिन्न थे। वह ये नही समझा पा रहे थे कि जब चीन जैसे देश अणुबम बनाने की बात कर रहे हैं, तो उस समय भारत ‘अणुबम नही बनाएंगे’ की रट क्यों लगा रहा है? क्या इस विशाल देश को अपनी सुरक्षा की कोई आवश्यकता नही है? वह नही चाहते थे कि इतने बड़े देश की सीमाओं को और इसके महान नागरिकों को रामभरोसे छोड़कर चला जाए। इसलिए उन्होंने ऐसे नेताओं को और उनकी नीतियों को लताड़ा जो देश के भविष्य की चिंता छोड़ ख्याली पुलाव पका रहे थे।

“मेरा गीत मुझे गाने दो”…..स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर…..

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आज राष्ट्र चेतना के धधकते अंगारे, हिन्दू राष्ट्र के प्रचंड परंतु सर्वाधिक प्रताड़ित योद्धा स्वातंत्र्यवीर विनायक दमोदर सावरकर जी को उनके 135 वें जन्मोत्सव पर अधिकांश राष्ट्रवादी समाज स्मरण कर रहा है। प्रतिवर्ष आने वाली यह तिथि (28 मई) हिन्दुत्वनिष्ठ समाज को एकजुट व संगठित करके संगोष्ठी व वार्ताओं के विभिन्न कार्यक्रमों द्वारा वीर सावरकर… Read more »