• मुख पृष्ठ
  • राजनीति
    • चुनाव
      • लोकसभा चुनाव
      • विधानसभा चुनाव
      • घोषणा-पत्र
      • चुनाव विश्‍लेषण
      • आंकडे
  • आर्थिकी
  • विश्ववार्ता
  • मीडिया
  • मनोरंजन
    • खेल जगत
    • टेलिविज़न
    • रेडियो
    • सिनेमा
    • संगीत
    • चुटकुले
    • कार्टून
  • धर्म-अध्यात्म
  • कला-संस्कृति
  • साहित्‍य
    • लेख
    • कहानी
    • कविता
    • गजल
    • आलोचना
    • व्यंग्य
    • पुस्तक समीक्षा
  • समाज
  • साक्षात्‍कार
  • विविधा
  • अन्य
    • वीडियो
    • महिला-जगत
    • बच्चों का पन्ना
    • विधि-कानून
    • हिंद स्‍वराज
    • सार्थक पहल
    • खेत-खलिहान
    • जन-जागरण
    • विज्ञान
    • स्‍वास्‍थ्‍य-योग
    • सैर-सपाटा
    • खान-पान
  • संपर्क

Archive for the Category ‘कला-संस्कृति’


  • Page 3 of 4
  • <
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • >

भारतीय संस्कृति और डॉ. राम मनोहर लोहिया

भारतीय संस्कृति और डॉ. राम मनोहर लोहिया - डॉ. मनोज चतुर्वेदी भारतीय संस्कृति का नाम लेते ही हमारे मन में एक ऐसे राष्ट्र का चित्र सामने आता है जो विश्व का सबसे प्राचीनतम राष्ट्र है। जिसके संबंध में महाकवि जयशंकर प्रसाद ने कहा - ''अरूण यह मधुमय देश हमारा। जहां पहुंच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा।'' 'अर्थात् ...

August 14th, 2010 | लेखक : डॉ. मनोज चतुर्वेदी | 578 views | 3 Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: भारतीय संस्‍कृति, राममनोहर लोहिया

लुप्त होती कठपुतली कला

लुप्त होती कठपुतली कला -फ़िरदौस ख़ान भारतीय संस्कृति का प्रतिबिंब लोककलाओं में झलकता है। इन्हीं लोककलाओं में कठपुतली कला भी शामिल है। यह देश की सांस्कृतिक धरोहर होने के साथ-साथ प्रचार-प्रसार का सशक्त माध्यम भी है, लेकिन आधुनिक सभ्यता के चलते मनोरंजन के नित नए साधन आने से सदियों पुरानी यह कला अब लुप्त होने ...

May 11th, 2010 | लेखक : फ़िरदौस ख़ान | 1,084 views | 4 Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: Puppetry Arts, कठपुतली कला

पेटू की संस्कृति है मासकल्चर

पेटू की संस्कृति है मासकल्चर -जगदीश्‍वर चतुर्वेदी लोक संस्कृति और लोक कलाओं का उत्तर-आधुनिक अवस्था में स्वरुप बुनियादी तौर पर बदल जाता है। इन कला रुपों में दैनन्दिन जीवन की गहरी छाप होती है। उत्तर-आधुनिक स्थिति इनका औद्योगिकीकरण कर देती है। उन्हें संस्कृति उद्योग का माल बना देती है। मानकीकरण करती है। उनमें व्याप्त स्थानीयता का ...

May 5th, 2010 | लेखक : जगदीश्‍वर चतुर्वेदी | 364 views | No Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: culture, मासकल्चर, संस्कृति

भारतीय संस्कृति और भोगवाद

भारतीय संस्कृति और भोगवाद क्या भोगवाद उन्नति का नाप है और क्या भारतीय संस्कृति आउट आफ़ डेट है? (मानव व्यवहार इतना जटिल है कि उसके विषय में कोई भी कथन यदि 60 प्रतिशत भी सही हो तो उसे सही माना जाना चाहिये।) मुझे लगता है कि भोगवाद का विषय आज तर्क के तथा समझने समझाने ...

April 27th, 2010 | लेखक : विश्‍वमोहन तिवारी | 1,712 views | 22 Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: Indian Culture, भारतीय संस्कृति, भोगवाद

संस्कृति में रीतिवाद के खतरे

जैसे विज्ञापन में रीतिवाद का महत्व होता है, प्रचार मूल्य होता है। विनिमय मूल्य होता है। उसी तरह लेखक संगठनों के द्वारा आयोजित कार्यक्रम भी होते हैं। उनका विज्ञापनमूल्य से अधिक मूल्य आंकना बेवकूफी है। जिस तरह मध्यकाल में आए बदलावों से संस्कृत के लेखक अनभिज्ञ थे उसी तरह आधुनिकाल ...

April 5th, 2010 | लेखक : जगदीश्‍वर चतुर्वेदी | 186 views | No Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: culture, संस्‍कृति

विश्व मंच पर पहचान बना रही हैं भारतीय ललित कलाएं

विश्व मंच पर पहचान बना रही हैं भारतीय ललित कलाएं देर से ही सही भारतीय ललित कलाएं विश्व की कला दुनिया में अपनी जगह बना रही हैं। शास्त्रीय संगीत और नृत्य से शुरुआत तो हुई पर अब चित्रकला की दुनिया में भी भारत की पहल को स्वागतभाव से देखा जा रहा है। सतत जिद और जिजीविषा के चलते भारतीय कलाकारों ...

April 1st, 2010 | लेखक : संजय द्विवेदी | 279 views | No Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: Lalit Kala, ललित कला

दफन हो जाये ऐसी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता

दफन हो जाये ऐसी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मकबूल फिदा हुसैन को लेकर फिर चर्चा है। कतर की नागरिकता लेने के बाद उनके पक्ष में तकरीरें की जा रही है। प्रगतिशील और भारतीय आस्थाओं के विरोधी एक बार फिर लामबंद, सक्रिय और आक्रामक हैं। हुसैन की करतूतों के कारण भारत में उनका काफी विरोध हुआ। भारत में कानून ...

March 12th, 2010 | लेखक : प्रवक्‍ता ब्यूरो | 408 views | 6 Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: Fida Hussain, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मकबूल फिदा हुसैन

हुसैन की बिल्ली थैले से बाहर निकली

हुसैन की बिल्ली थैले से बाहर निकली [caption id="attachment_7655" align="aligncenter" width="350" caption="MF Hussain's Painting 'Rape of India'"][/caption] बिल्ली तो अब थैले से बाहर आ ही गई। यह कहावत विख्यात चित्रकार मुहम्मद फिदा हुसैन पर पूरी तरह चरितार्थ होती है। साथ ही उनकी पोल भी खुल गई है। भारत की नागरिकता त्याग कर खाडी ...

March 9th, 2010 | लेखक : अम्बा चरण वशिष्ठ | 355 views | 6 Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: MF Hussain, एफ एम हुसैन, मकबूल फिदा हुसैन

कला के जरिए कंडोम के प्रयोग पर जोर

कला के जरिए कंडोम के प्रयोग पर जोर हमारे समाज में सेक्स को वर्जित माना जाता है और शारारिक जरुरतों की अवहेलना की जाती है। दरअसल जीवन को संपूर्णता में जीने की कोशिश कोई नहीं करना चाहता। यौन कार्यकलापों को अश्‍लीलता की श्रेणी में रखा जाता है। इसका मूल कारण है हमारी सभ्यता और संस्कृति, जो हमें उन्मुक्त ...

March 9th, 2010 | लेखक : सतीश सिंह | 369 views | No Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: Condom, कंडोम, कला

मकबूल फिदा हुसैन के पलायन को लेकर उठे प्रश्न

मकबूल फिदा हुसैन के पलायन को लेकर उठे प्रश्न मकबूल फिदा हुसैन ने 95 साल की उम्र में भारत की नागरिकता छोडकर कतर देश की नागरिकता स्वीकार कर ली है। वे जाने माने चित्रकार हैं और उनके चित्र लाखों में बिकते हैं। जो चीज लाखों में बिकती है वो सैकडों में ही चर्चित होती है। आम आदमी से उसका ...

March 8th, 2010 | लेखक : डॉ. कुलदीप चन्‍द अग्निहोत्री | 637 views | 10 Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: MF Hussain, मकबूल फिदा हुसैन

लोकतंत्र में निर्जन एकांत नहीं होता मकबूल फिदा हुसैन

लोकतंत्र में निर्जन एकांत नहीं होता मकबूल फिदा हुसैन एफ एम हुसैन साहब बहुत बड़े चित्रकार हैं,भारतीय चित्रकला परंपरा में उनका गौरवपूर्ण स्थान है। भारतीय कला के उन्होंने अनेक नए मानक बनाए और तोड़े है। उनकी कला में भारत की आत्मा निवास करती है। कलाकार के रंगों के साथ उसके देश का अभिन्न संबंध होता है। उनकी कला का ...

March 4th, 2010 | लेखक : जगदीश्‍वर चतुर्वेदी | 394 views | 3 Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: MF Hussain, एफ एम हुसैन, फिदा हुसैन, भारतीय चित्रकला

सभ्य मन की अनग अभिव्यक्ति है होली – जयप्रकाश सिंह

सभ्य मन की अनग अभिव्यक्ति है होली - जयप्रकाश सिंह भारतीय मनीषीयों ने ईवर की अनुभूति ‘रसो वै सः’ के रुप में की है । चरम अनुभति को रसमय माना है । यही मनीषी ईवर को सिच्चदानंद भी कहता है । यानी भारतीय मानस के लिए ईवर और आनंद की अनुभूतियां अलग अलग नहीं हैं । होली भारतीय चित द्वारा इसी रस की ...

February 28th, 2010 | लेखक : जयप्रकाश सिंह | 431 views | 7 Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: Holi, जयप्रकाश सिंह, होली

प्रदर्शनी में दिखी लोकतंत्र की झलक

प्रदर्शनी में दिखी लोकतंत्र की झलक लोस अध्यक्ष मीरा कुमार ने किया उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने बुधवार को भोपाल में देश के संसदीय इतिहास पर आधारित प्रदर्शनी का उद्धाटन किया। इस मौके पर राज्यसभा के उपाध्यक्ष के. रहमान, विधानसभा के अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी, उपाघ्यक्ष हरवंश सिंह सहित विभिन्न राज्यों से आए पीठासीन अधिकारी उपस्थित थे। भारत ...

February 4th, 2010 | लेखक : लिमटी खरे | 169 views | No Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: Meera Kumar, प्रदर्शनी, मीरा कुमार

ऊर्जावान, विवेकवान युवा भारत के लिए आओ करें सूर्य नमस्कार

ऊर्जावान, विवेकवान युवा भारत के लिए आओ करें सूर्य नमस्कार 12 जनवरी को विवेकानंद जयंती मनाई जाती है। स्वामी विवेकानंद को कौन नहीं जानता? उनके बारे में, उनके व्यक्ति के बारे में हर भारतीय भलीभांति परिचित होगा। सब जानते हैं कि किस तरह स्वामी विवेकानंद ने अपने विवेक से, अपनी मेधा से पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति का परचम फहराया। भारत ...

January 11th, 2010 | लेखक : पंकज व्‍यास | 453 views | 1 Comment »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: Swamy Vivekanand, स्‍वामी विवेकानंद

अपसंस्कृति और उपभोक्तावाद के प्रवक्ता

अपसंस्कृति और उपभोक्तावाद के प्रवक्ता “और आज छीनने आए हैं वे हमसे हमारी भाषा यानी हमसे हमारा रूप जिसे हमारी भाषा ने गढ़ा है और जो इस जंगल में इतना विकृत हो चुका है कि जल्दी पहचान में नहीं आता” हिंदी के प्रख्यात कवि स्व. सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की ये पंक्तियां किन्हीं दूसरे संदर्भों पर लिखी गई हैं, लेकिन वह टीवी चैनलों ...

January 8th, 2010 | लेखक : संजय द्विवेदी | 640 views | 2 Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: अपसंस्कृति, उपभोक्तावाद

कला समीक्षा: और अब मोहतरमा

कला समीक्षा: और अब मोहतरमा स्त्री केंद्रित चित्र, पुरुष चित्रकार और स्त्री कलाकार की समीक्षा-दृष्टि कला किसके लिए! इसके हज़ारों जवाब हैं, लेकिन मुकम्मल कोई नहीं, शायद इसीलिए ये सवाल अब तक मौजूं है। क्या कला इंसान के लिए, उसकी तक़लीफ़ बयां करने के लिए है? या रसना-नयन तृप्ति के लिए है...विलास का साधन है...? कला ...

January 7th, 2010 | लेखक : निधि सक्‍सेना | 610 views | 6 Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: Kala Review, अडिग, कला समीक्षा

रोमांच का स्थल सिनेमाघर

रोमांच का स्थल सिनेमाघर दिल्ली में कभी मोती सिनेमाघर का जलवा था। यह चांदनी चौक इलाके में स्थित है। पुराने लोग बताते हैं कि यह राजधानी के पुराने सिनेमाघरों में से एक है। शायद सबसे पुराना। सिनेमाघरों पर दृश्य-श्रव्य माध्यम से सराय/सीएसडीएस में शोध कर चुकीं नंदिता रमण ने कहा, “किरीट देशाई ने सन् ...

January 1st, 2010 | लेखक : ब्रजेश कुमार झा | 246 views | 1 Comment »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: Cinema house, सिनेमाघर

रीगल सिनेमाघर : ओपेरा हाउस से सिनेमाघर तक

रीगल सिनेमाघर : ओपेरा हाउस से सिनेमाघर तक फिजूल की बात लग सकती है ! पर ताज्जुब न हो, कई बार ऐसा होता है कि सिनेमाघर आपको उस शहर की ठीक-ठीक उम्र बतला दे। अब दिल्ली के कनॉट प्लेस में आबाद रीगल सिनेमाघर को ही लें। यह इमारत सन् 1920 में तैयार हुई थी। इसकी काया वास्तुकार वाल्टर ...

December 19th, 2009 | लेखक : ब्रजेश कुमार झा | 272 views | 2 Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: Cinema hall, सिनेमाघर

क्या सोचती हैं औरतें!

क्या सोचती हैं औरतें! कौन-सा पुरुष होगा, जो ना जानना चाहे—स्त्रियां उसके बारे में क्या सोचती हैं? ये पता करने का मौक़ा जयपुर में मिला, तो मैं भी छह घंटे सफ़र कर दिल्ली से वहां पहुंच ही गया। मौक़ा था—टूम-10 संस्था की ओर से सात महिला कलाकारों की संयुक्त प्रदर्शनी के आयोजन का. और ...

December 1st, 2009 | लेखक : चंडीदत्त शुक्‍ल | 1,654 views | 22 Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: Woman, औरत

गुरुपरब के लिए सैकड़ों श्रद्धालु पाकिस्तान रवाना

गुरुपरब के लिए सैकड़ों श्रद्धालु पाकिस्तान रवाना नई दिल्ली,  केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से हाल में जारी यात्रा निर्देश के बावजूद करीब 1,500 श्रद्धालुओं का एक जत्था गुरु नानक देव के जयंती उत्सव में भाग लेने पाकिस्तान के लिए रवाना हो गया है। यह जत्था शनिवार को रवाना हुआ है। जत्थे में सिख और हिंदू दोनों ही ...

November 1st, 2009 | लेखक : प्रवक्ता ब्यूरो | 159 views | No Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: Guruparv, pakistan, पाकिस्तान

  • Page 3 of 4
  • <
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • >


  • हिंदी में टाइप करें

    यहाँ क्लिक करें

  • हिंदी फॉण्ट कन्वर्टर

    हिंदी फॉण्ट से यूनिकोड

  • सबस्क्राइब

    प्रवक्‍ता डॉट कॉम के लेखों को अपने ईमेल पर प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए बॉक्‍स में अपना ईमेल पता भरें:

  • आपका मत

    उड़ीसा में अपहृत विधायक मामले में सरकार ने माओवादियों के सामने घुटने टेक दिए ?

    View Results

    Loading ... Loading ...
    • Polls Archive
  • परिचर्चा

    स्वस्थ बहस ही लोकतंत्र का प्राण होती है। यहां आप समसामयिक प्रश्‍नों पर अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं।
  • विषय सूची

  • लेखक के अनुसार पढ़ें

  • अब तक

  • आपने कहा…

    • tejwani girdhar on असली हीरो आप तो फास्ट ट्रेक कोर्ट आमिर के कहने पर क्यों?
    • dr. madhusudan on डॉ. मधुसूदन: ”हिंदी-अंग्रेज़ी टक्कर?” भाग-एक
    • dr. rajesh kapoor on भद्रजनों ने क्या कभी अपनी अभद्र भाषा पर गौर किया है ?
    • Danish umar on असली हीरो आप तो फास्ट ट्रेक कोर्ट आमिर के कहने पर क्यों?
    • Net Ram Maharania on बडबडाहट……गाँधीजी कि पुण्यतिथि पर मेरी दो कड़वी कविताएँ
    • manoj sharma on क्यों बनते हैं किन्नर – राजकुमार सोनी
    • LAL CHAND on आर.एस.एस. और पी. चिदंबरम
    • harpal singh on ‘नामवर सिंह आलोचक कम और साहित्य के प्रौपेगैण्डिस्ट ज्यादा नजर आते हैं’
    • Himkar Shyam on 60 साल की संसद, सड़ता अनाज और भूखे लोग
    • harpal singh on समलैंगिक स्वीकृति के मायने
    • AKASH MISHRA on 60 साल की बूढी संसद को दरकार है सम्मान की
    • MANJU MADHUR JOHRI on 60 साल की बूढी संसद को दरकार है सम्मान की
    • ePandit on डॉ. मधुसूदन: ”हिंदी-अंग्रेज़ी टक्कर?” भाग-एक
    • Prof. Mukund Hambarde on राहुल गांधी के इस बयान में कुछ भी गलत नहीं है : डॉ. मीणा
    • Prof. Mukund Hambarde on हिन्दुत्व और विश्व बंधुत्व : विपिन किशोर सिन्हा
    • girish pankaj on डॉ. मधुसूदन: ”हिंदी-अंग्रेज़ी टक्कर?” भाग-एक
    • R.Singh on 60 साल की संसद, सड़ता अनाज और भूखे लोग
    • वीरेन्द्र जैन on आर.एस.एस. और पी. चिदंबरम
    • dr. rajesh kapoor on नीबू से कैंसर का इलाज संभव / डॉ. राजेश कपूर
    • tejwani girdhar on असली हीरो आप तो फास्ट ट्रेक कोर्ट आमिर के कहने पर क्यों?
    • iqbal hindustani on तय सीमा में करें काम-काज
  • Alexa Rank

  • FOLLOW US ON

  • ‘प्रवक्‍ता’ एक नजर में

    6,000 से अधिक लेख / 500 से अधिक लेखक / 68,534 एलेक्‍सा रैंकिंग / 51,281 पेजव्‍यू प्रतिदिन (जनवरी 2012)
  • प्रवक्ता पर लेख भेजे

    प्रवक्ता पर लेख भेजने के लिए यहां क्लिक करें या फिर सीधे prawakta@gmail.com पर हमें लिख भेजें।
  • नवीनतम लेख

    • ऐतिहासिक करालपूरा उपेक्षा का शिकार
    • कब जगमग होगा गांव
    • तुष्टिकरण का सबब है हज यात्रा में छूट
    • 60 साल की बूढी संसद को दरकार है सम्मान की
    • भद्रजनों ने क्या कभी अपनी अभद्र भाषा पर गौर किया है ?
    • क्या २जी घोटाले का सच सामने आएगा?
    • नक्सल समस्याः जड़ में हल तलाश कीजिए
    • खदानों में लगी आग से जल रहा झारखंड
    • बडबडाहट……गाँधीजी कि पुण्यतिथि पर मेरी दो कड़वी कविताएँ
    • गजल-भेंट मज़दूरों की क्यों लेती बताओ चिमनियां-इकबाल हिंदुस्तानी
  • परिचर्चा

    • तीन साल का हो गया ‘प्रवक्‍ता डॉट कॉम’
    • ‘प्रवक्‍ता डॉट कॉम’ बना वैकल्पिक वेबसाइटों का सिरमौर
    • परिचर्चा : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम
    • यूपीए-2 के दो वर्ष: आम आदमी की कीमत पर असफलताओं का जश्‍न
    • परिचर्चा: काला धन
    • परिचर्चा : क्या डॉ. विनायक सेन देशद्रोही हैं?
    • परिचर्चा : यूपीए सरकार और भ्रष्‍टाचार
    • बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम पर परिचर्चा
    • ‘प्रवक्‍ता डॉट कॉम’ के दो वर्ष पूरे होने पर विशेष
    • राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ और सिमी में कोई फर्क नहीं : राहुल गांधी
    • परिचर्चा : अयोध्‍या मामले पर इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय की लखनऊ पीठ का निर्णय
    • एलेक्‍सा एक लाख क्लब में ‘प्रवक्‍ता’ शामिल
    • परिचर्चा : राष्ट्रमंडल खेल और सेक्स
    • परिचर्चा : आम आदमी आज दाल-रोटी तक के लिए मोहताज
    • परिचर्चा : क्या जाति आधारित जनगणना होनी चाहिए?
    • परिचर्चा: ‘नक्‍सलवाद’ के बारे में आपका क्‍या कहना है…
    • परिचर्चा : राज ठाकरे की राजनीति के बारे में आप क्‍या कहते हैं?
    • परिचर्चा : मार्क्‍सवाद और धर्म
    • परिचर्चा : हिंद स्वराज की प्रासंगिकता
  • जरूर पढ़ें

    • भारत को कैसे मिले अब तक के अपने राष्ट्रपति
    • हिन्दुत्व और विश्व बंधुत्व : विपिन किशोर सिन्हा
    • समलैंगिक स्वीकृति के मायने
    • ‘नामवर सिंह आलोचक कम और साहित्य के प्रौपेगैण्डिस्ट ज्यादा नजर आते हैं’
    • शब्द वृक्ष दो: डॉ.मधुसूदन
    • खिचड़ी भाषा अंग्रेज़ी – डॉ. मधुसूदन
    • एक बंगारू तो पकड़ा गया बाकी पर न्यायतन्त्र की आंखों पर पट्टी क्यों ?
    • बंगारू लक्ष्मण का अपराध क्या था?
    • बंगारू लक्ष्मण की सजा से उठे सवाल
    • रघुनाथ सिंह की दो कविताएं
    • ॥अमृत भाषा संस्कृत॥- डॉ. मधुसूदन उवाच
    • वे जो हर सांस में भारत को ही जीते हैं / नरेश भारतीय
    • सभी धर्मों में एक ही बात नहीं / शंकर शरण
    • कम्युनिस्टों का असली चेहरा / विपिन किशोर सिन्हा
    • ईसाई धर्म और नारी मुक्ति / प्रो. कुसुमलता केडिया
    • भारतीय वामपंथ के पुनर्गठन की एक प्रस्तावना / अरुण माहेश्‍वरी
    • आदिवासी कुंभ से क्या हासिल होगा आरएसएस को / संजय द्विवेदी
    • पश्चिमी रंग में रंगा भारत: नकलची भूरा बंदर / विश्व मोहन तिवारी
    • IIT रुड़की : ये कैसी इंजीनियरिंग है? / सुरेश चिपलूनकर
    • दबाव की राजनीति में इतिहास और तथ्य की विदाई / जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

  • मुख पृष्ठ
  • हमारे बारे में
  • संपर्क
  • प्रवक्‍ता मण्डली
  • लेख भेजें
  • संपादक
  • ई-मेल
  • चर्चा में प्रवक्‍ता
  • प्रवक्ता पर विज्ञापन
  • Log In
  • पोल Archive
  • Pravakta Ads
    • Chhatisgarh-Ads
    • प्रवक्‍ता के सम्‍मानित पाठक
  • User Online
  • Hindi Font Converter
  • आर्थिकी
  • कला-संस्कृति
  • चुनाव
    • घोषणा-पत्र
    • जन-जागरण
    • लोकसभा चुनाव
      • आंकडे
      • चुनाव विश्‍लेषण
    • विधानसभा चुनाव
  • जरूर पढ़ें
  • ज्योतिष
    • राशिफल
    • वर्त-त्यौहार
  • टॉप स्टोरी
  • धर्म-अध्यात्म
    • चिंतन
  • पत्रिका पर नजर
  • परिचर्चा
  • पर्व – त्यौहार
  • प्रवक्ता न्यूज़
  • मनोरंजन
    • कार्टून
    • खेल जगत
    • चुटकुले
    • टेलिविज़न
    • रेडियो
    • संगीत
    • सिनेमा
  • महत्वपूर्ण लेख
  • मीडिया
  • राजनीति
  • विधि-कानून
  • विविधा
    • उत्‍पाद समीक्षा
    • खान-पान
    • खेत-खलिहान
    • टेक्नोलॉजी
    • पर्यावरण
    • बच्चों का पन्ना
    • महिला-जगत
    • विज्ञान
    • शख्सियत
    • साक्षात्‍कार
    • सार्थक पहल
    • सैर-सपाटा
    • हिंद स्‍वराज
  • विश्ववार्ता
  • वीडियो
  • समाज
  • साहित्‍य
    • आलोचना
    • कविता
    • कहानी
    • गजल
    • पुस्तक समीक्षा
    • लेख
    • व्यंग्य
  • स्‍वास्‍थ्‍य-योग

Copyright © 2010 PRAVAKTA.COM
Designed & Developed by Manu Info Solutions (MiS)