“शक्ति के उपासक बनें”

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भारत भूमि के महान सपूत महर्षि अरविन्द ने वर्षो पूर्व जब हम अंग्रेज़ो के अधीन थे, अपनी एक छोटी रचना ‘भवानी मंदिर’ की भूमिका में लिखा था कि “हमने शक्ति को छोड़ दिया है , इसलिए शक्ति ने भी हमें छोड़ दिया”। अतः पराधीनता में रहना हमारी दुर्बलता का ही परिणाम था। अनेक मनीषियों ने… Read more »

चैत्र नवरात्र : देवी कहती हैंं…अपनी शक्ति को पहचानो

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सूर्यकांत द्विवेदी देवी का अर्थ प्रकाश है। वह शक्तिस्वरूपा हैं। दुर्गा सप्तशती को ध्यान से पढ़ें तो उसमें तीन अवस्थाओं, तीन प्रकृति, तीन प्रवृत्ति की व्याख्या है। हमारा धर्म, कर्म और राजतंत्र तीन चरणीय व्यवस्था का स्वरूप है। धर्मशास्त्रों में भी तीन ही देवी हैं। तीन ही देव हैं। तीन ही सृष्टि हैं-जल, थल और… Read more »

सृष्टि एवं विक्रमी नव संवत्सर हमारे इतिहास का एक गौरवपूर्ण दिन

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हम संसार में यह भी देखते हैं कि संसार में जितने भी मत, सम्प्रदाय, वैदिक संस्कृति से इतर संस्कृतियां व सभ्यतायें हैं, वह सभी विगत 3-4 हजार वर्षों में ही अस्तित्व में आईं हैं जबकि सत्य वैदिक धर्म व संस्कृति एवं वैदिक सभ्यता विगत 1.96 अरब वर्षों से संसार में प्रचलित है। वैदिक धर्म ही सभी मनुष्यों का यथार्थ धर्म है, ज्ञान व विवेक पर आधारित, पूर्ण वैज्ञानिक, युक्ति एवं तर्क सिद्ध है। वेद के ईश्वरीय ज्ञान होने के कारण वैदिक सिद्धान्तों की पोषक अन्य मतों की मान्यतायें ही स्वीकार्य होती है, विपरीत मान्यतायें नहीं।

समस्त पापनाशक व सुख -समृद्धि प्रदायक पापमोचनी एकादशी

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पापमोचनी एकादशी के सन्दर्भ में एक पौराणिक कथा प्रचलित है । कथा के अनुसार महाराज युधिष्ठिर के द्वारा चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी के सम्बन्ध में पूछे जाने पर भगवान श्रीकृष्ण ने चैत्र मास के कृष्णपक्ष की एकादशी के नाम , व्रत विधि व महिमा के बारे में जानकारी देते हुए चक्रवर्ती नरेश मान्धाता के पूछने पर महर्षि लोमश के द्वारा बताई गई पापनाशक उपाख्यान सुनाई ।

आत्मा की उन्नति ही सच्ची जीवनोन्नति अन्यथा जीवन व्यर्थ

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आत्मान्नोति हेतु आत्मा व ईश्वर सहित संसार सं संबंधित वैदिक ज्ञान परम आवश्यक है जिसका सरलतम साधन सत्यार्थप्रकाश व ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका आदि ग्रन्थों सहित वेद, दर्शन, उननिषदों आदि का अध्ययन है। यह ज्ञान आत्मोन्नति के साधक हैं। आत्मोन्नति होने पर मनुष्य असत्य कामों व व्यवहारों को छोड़ कर सद्कर्मों से धनोपार्जन करता है जिसमें उसे सफलता मिलती है और वह सभी प्रकार के अभावों से दूर हो जाता है।

क्या करें और क्या ना करें मल मास/खर मास में..

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धर्मग्रंथों के अनुसार, खर (मल) मास को भगवान पुरुषोत्तम ने अपना नाम दिया है। इसलिए इस मास को पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं। इस मास में भगवान की आराधना करने का विशेष महत्व है। धर्मग्रंथों के अनुसार, इस मास में सुबह सूर्योदय के पहले उठकर शौच, स्नान, संध्या आदि अपने-अपने अधिकार के अनुसार नित्यकर्म करके भगवान का स्मरण करना चाहिए और पुरुषोत्तम मास के नियम ग्रहण करने चाहिए। पुरुषोत्तम मास में श्रीमद्भागवत का पाठ करना महान पुण्यदायक है।

जोगीरा हास्य व्यंग की अनूठी विधा

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किसके बेटा राजा रावण किसके बेटा बाली?
किसके बेटा हनुमान जी जे लंका जारी?
विसेश्रवा के राजा रावण बाणासुर का बाली।
पवन के बेटा हनुमान जी, ओहि लंका के जारी।
जोगी जी वाह वाह, जोगी जी सारा रा रा।

जानिए चैत्र नवरात्री 2017 के शुभ मुहूर्त–

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प्रिय पाठकों/मित्रों, नवरात्र भारतवर्ष में हिंदूओं द्वारा मनाया जाने प्रमुख पर्व है। इस दौरान मां के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। वैसे तो एक वर्ष में चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ के महीनों में कुल मिलाकर चार बार नवरात्र आते हैं लेकिन चैत्र और आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से… Read more »

आइये जाने होली खेलने के दौरान क्या रखें सावधानी…

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होली रंगों का त्योहार है जो भारत में हिन्दु धर्म के लोग हर साल बड़ी धूमधाम से मनाते है | ये पर्व हर साल वसंत ऋतु के समय फागुन (मार्च) के महीने में आता है | भारत पहले से ही कला और संस्कृति के क्षेत्र में अग्रणी रहा हैं अगर भारतीय समाज के त्यौहार की… Read more »

चैतन्य महाप्रभु की संकीर्तन रस संस्कृति

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चैतन्य महाप्रभु जयन्ती-12 मार्च 2017 पर विशेष ललित गर्ग चैतन्य महाप्रभु भारतीय संत परम्परा के भक्ति रस संस्कृति के एक महान् कवि, संत, समाज सुधारक एवं क्रांतिकारी प्रचारक थे। वैष्णव धर्म के परम प्रचारक एवं भक्तिकाल के प्रमुख कवियों में से एक थे। उन्होंने जात-पांत के बंधन को तोड़ने और सम्पूर्ण मानव जाति को एक… Read more »