आर्यसमाज के वेदसम्मत 10 नियमों के आदर्श पालक ऋषि दयानन्द

Posted On by & filed under धर्म-अध्यात्म

मनमोहन कुमार आर्य आर्यसमाज की स्थापना 10 अप्रैल, सन् 1875 को ऋषि दयानन्द सरस्वती ने मुम्बई में की थी। इसका उद्देश्य था विलुप्त वेदों की यथार्थ शिक्षाओं का जन-जन में प्रचार और उसके अनुरूप समाज व देश का निर्माण। महर्षि ने आर्यसमाज की स्थापना उनके वेद विषयक विचारों के प्रशंसकों वा अनुयायियों के अनुरोध पर… Read more »

महर्षि दयानन्द और आचार्य सायण के वेद भाष्य

Posted On by & filed under धर्म-अध्यात्म

मनमोहन कुमार आर्य आर्य विद्वान श्री कृष्णकान्त वैदिक शास्त्री जी ने एक लिखा है जिसका शीर्षक है ‘‘क्या आचार्य सायण वेदों के विशुद्ध भाष्यकार थे?’’ लेखक ने अपने लेख में स्वीकार किया है कि आचार्य सायण का भाष्य पूर्ण विशुद्ध भाष्य नहीं है। श्री वैदिक जी के लेख पर एक टिप्पणीकार के अनुसार ‘‘सायण महोदय… Read more »

ईश्वर सर्वतोमहान और वेदानुयायी ऋषि महान और संसार के आदर्श

Posted On by & filed under धर्म-अध्यात्म

मनमोहन कुमार आर्य इस संसार और पूरे ब्रह्माण्ड में सबसे महान कौन है? इसका उत्तर है कि इस संसार को बनाने व चलाने वाला जगदीश्वर सबसे अधिक महान पुरुष है। ईश्वर के बाद संसार में सबसे महान पुरूष व मनुष्यों के आदर्श कौन हैं, इसका उत्तर है वेदों के अनुयायी व अनुमागी सभी ऋषि महान… Read more »

वैदिक वर्ण-व्यवस्था वर्तमान में खण्डित होते हुए भी अंशतः जीवित है’

Posted On by & filed under धर्म-अध्यात्म

-डॉ. जयदत्त उप्रेती, स्वस्त्ययन पाक्षिक पत्र ‘‘आर्य जीवन” के 18-11-2016 के अंक में प्रकाशित श्री मनमोहन कुमार आर्य जी का लेख वैदिक वर्ण-व्यवस्था की वर्तमान में व्यावहारिकता के प्रश्न पर छपा है, जिसमें उन्होंने आर्यसमाज के विद्वानों से इस विषय पर अपने विचार देने का अनुरोध किया है। इस सम्बन्ध में मुझे यह निवेदन करना… Read more »

रोग, राग, दुःख और दरिद्रता के निवारणार्थ स्कन्द षष्ठी व्रत

Posted On by & filed under कला-संस्कृति, धर्म-अध्यात्म, वर्त-त्यौहार

अशोक “प्रवृद्ध” भारतीय सांस्कृतिक चिन्तन में जहाँ भगवान शिव आत्मा तत्त्व या सृष्टि के केंद्र विन्दु के रूप में स्वीकार किये जाते हैं , वहीं उनकी अर्धागिनी माता पार्वती शक्ति का शिखर बिन्दु मानी जाती हैं। पौराणिक ग्रन्थों के अनुसार आत्मा रूपी सत्य और शक्ति के संयोग से ही सृष्टि गतिशील होती है तथा आत्मा… Read more »

गुरु गोविन्द सिंह : सभ्यता और संस्कृति के प्रतीकपुरुष

Posted On by & filed under कला-संस्कृति, धर्म-अध्यात्म

गुरु गोविन्द सिंह के 350वें प्रकाश उत्सव- 5 जनवरी 2017 – ललित गर्ग- भारत का सौभाग्य है कि यहां की रत्नगर्भा माटी में महापुरुषों को पैदा करने की शोहरत प्राप्त है। जिन्होंने अपने व्यक्तित्व और कर्तृत्व से न सिर्फ स्वयं को प्रतिष्ठित किया वरन् उनके अवतरण से समग्र विश्व मानवता धन्य हुई है। इसी संतपुरुषों,… Read more »

वेद की आज्ञा मनुर्भव और कृण्वन्तो विश्वमार्यम् के आदर्श पालक महर्षि दयानन्द

Posted On by & filed under धर्म-अध्यात्म

मनमोहन कुमार आर्य वेद ईश्वरीय ज्ञान है। ईश्वर प्रदत्त ज्ञान होने के कारण वेद पूर्णतः तर्क व युक्ति संगत होने के साथ विज्ञान के अनुकूल भी हैं। वेदों में ‘मनुष्य को मनुष्य बनने’ की शिक्षा है। मनुष्य का अर्थ होता है मननशील होना। क्या हम मननशील हैं? मननशील मनुष्य मनन अर्थात् सत्य व असत्य का… Read more »

मनुष्य के पतन का एक मुख्य कारण लोभ की प्रवृत्ति

Posted On by & filed under धर्म-अध्यात्म

मनमोहन कुमार आर्य काम, क्रोध, लोभ व मोह मनुष्य के प्रबल शत्रु हैं जो मनुष्य का जीवन नष्ट कर देते हैं। मनुष्य मदिरा के नशे की भांति जीवन में इनके वशीभूत रहता है। इनसे बचने का उपास केवल अविद्या का नाश है जिसके अनेक उपाय हैं, परन्तु बहुत से लोगों को इन उपायों का ज्ञान… Read more »

स्वाध्याय और ईश्वरोपसना

Posted On by & filed under धर्म-अध्यात्म

मनमोहन कुमार आर्य स्वाध्याय का ईश्वरोपसना से क्या कोई सम्बन्ध है? इस प्रश्न पर विचार करना आवश्यक है क्योंकि मनुष्य के जीवन से इसका गहरा सम्बन्ध है। प्रायः सभी मतों के लोग ईश्वरोपासना करते हैं परन्तु सद्ग्रन्थों के स्वाध्याय से पृथक रहते हैं। उन्हें परिवार व अन्यत्र जो उपासना बता दी जाती है, उसी को… Read more »

हम सब ईश्वर की सन्तान हैं व ईश्वर हमारा सच्चा माता व पिता है

Posted On by & filed under धर्म-अध्यात्म

मनमोहन कुमार आर्य हमारे माता-पिता कौन हैं? जन्म देने वाले व उसमें सहायक को माता-पिता कहते हैं। हमें अपनी माता से जन्म मिलता है, वह हमारा निर्माण करती है, इसलिए वह हमारी माता कहलाती है। पालन करने से पिता कहलाता है। माता-पिता तो हमारे जन्म में सहायक होते हैं किन्तु हमारा शरीर बनाना और उसमें… Read more »