अर्थशास्त्र के सिद्धांतों को मानें तो बिना उधोग-धंधों के विकास के, किसी भी प्रदेश की विकास की बात करना बेमानी है। आमतौर पर माना जाता है कि विकास की प्रथम सीढ़ी कृषि के क्षेत्र में विकास का होना होता है। विकास का रास्ता खेतों से निकल कर के ही कल-कारखानों ...
कांग्रेसनीत संप्रग सरकार को जनता ने जिस विश्वास के साथ सत्ता पर बैठने का अधिकार सौंपा वस्तुत: सरकार की नीतियों से नहीं लग रहा है कि वह जनता के प्रति गंभीर है। सरकार द्वारा जारी आकडों में भारत वैश्विक स्तर पर तेजी से उभर रहा है। देश में हर सेक्टर ...
'जहाँ चाह वहाँ राह' वाली बरसों पुरानी कहावत को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अक्षरश: चरितार्थ कर दिया है। केन्द्रीय सांख्यकीय संगठन के ताजा रपट को यदि सच मानें तो बिहार का विकास दर 11.03 फीसद है जो गुजरात के विकास दर 11.05 फीसद से मात्र 00.02 फीसद कम ...
मध्यप्रदेश के खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री पारस जैन की सोच के अनुसार यदि तख्तियां टांगने या घरों के सामने लिखने का काम किया जाये तो हर घर के सामने की दीवार मे नेम प्लेट की जगह किसी के घर मैं बेईमान हँ, मैं चोर हँ, मैं डकेत हँ, मैं राष्ट्रद्रोही ...
न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी। यह कहावत प्रदेश के लाखों वंशकारों की आजीविका पर आये संकट का हाल बंया करती है। बांस पर निर्भर रहने वाले इन बांस कारीगरों के लिये बांस वनों में न कोई जगह है और न ही राज्य सरकार की कार्ययोजना में। राष्ट्रीय बांस मिशन ...
केंद्र की संप्रग सरकार ने खाद्य पदार्थों की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने हेतु उनके भंडारण पर सीमा और कारोबार पर लाइसेंस आदि की शर्तो की मियाद एक साल के लिए बढा दिया है .
सरकार ने इसके लिए आवश्यक वस्तु कानून के तहत दालों, चीनी, धान, खाद्य तेल, तिलहन और चावल ...
भारतीय अर्थशास्त्रियों ने विश्व आर्थिक मंदी का भारत पर कम असर होने के कई कारण दिए हैं. कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी दुनिया की मुख्यधारा से बची हुई है, निर्यात पर निर्भरता कम है, बैंकों पर अभी भी काफ़ी नियंत्रण है, और आमतौर पर पश्चिमी देशों की ...
अब आओ ऊपर वाले तुम, गायों को अगर बचाना है,
इंसान के बस की बात नहीं, वह स्वारथ में दीवाना है।।
जिस माँ का दूध पिया सबने, उस माँ पर नित्य प्रहार किया।
बदले में दूध-दही देकर, माता ने बस उपकार किया।
जो है कपूत उन लोगो को, गायों का पाठ पढ़ना है।। .....
कहने ...
प्रणव दा ने देश का बजट पेश किया तो लगा कि इस बार हमारी सारी समस्याओं का निदान अपने आप ही हो जावेगा क्योंकि पहली बार बजट गांव व गरीब के लिये पेश किया गया है। हम बजट को ध्यान में रख कर यह विचार कर रहे थे बजट के ...
भारत गांवों का देश है। गांव देश की आत्मा और कृषि उसकी योति है। इनका प्राण-तत्व गाय है। प्रकृति की यह अनमोल दैन (गो वंश) विलुप्त होने की कगार पर है। देश में गाय की सैकड़ों प्रजातियां (नस्लें) थीं। मोटे तौर पर आज इनमें से मात्र तैंतीस प्रजातियां बची हैं। ...
गाय विश्व में कमोबेश सभी देशों में पाली जाती है। लेकिन भारत में गाय गौमाता है। यहां गौ संस्कृति है। पश्चिमी दुनिया में गाय सिर्फ दूध और मांसाहार का स्रोत है। भारत में गौ कामधेनु है। इसे सब सुख प्रदा माना जाता है। लेकिन पश्चिमी दुनिया में अब मेडकाऊ रोग ...
सेवा में,
दिनांक - 16 /07/09
प्रधानमंत्री और ख्यातिप्राप्त अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह जी !
विषय :- नक़ल की आर्थिक घुसपैठ को नियंत्रित करने के सन्दर्भ में ।
महोदय ,
आजकल भारतीय बाज़ार में जाली नोटों का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है । जिधर देखिये उधर से जाली नोट इस कदर घुसा आ रहा है ...
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इटली में दुनिया के आठ धनी देशों के संगठन यानी जी-आठ के सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रवाना हो रहे हैं। इससे पहले जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि वे बैठक में वैश्विक आर्थिक संकट, ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन पर भारत का रुख स्पष्ट ...
वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के बजट भाषण से देश का कारोबारी जगत उदास है। इसकी झलक शेयर बाजारों में भी देखने को मिली। सोमवार को शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, आयकर की छूट सीमा में 10 हजार की वृद्धि करने को कई लोग अच्छा मान रहे हैं।
वित्त ...
वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने संसद में बजट पेश करते हुए आयकर में छूट की सीमा बढ़ाकर डेढ़ लाख से बढ़ाकर एक लाख 60 हज़ार कर दी गई है। साथ ही महिलाओं के लिए आयकर में छूट की सीमा एक लाख 80 हज़ार से बढ़ाकर एक लाख 90 हज़ार कर ...
इस साल रेल बजट में यात्री किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। साथ ही 57 नई ट्रेनें चलाई जाएंगी। शुक्रवार को लोकसभा में रेल बजट पेश करते हुए रेल मंत्री ममता बनर्जी ने इसकी घोषणा की है।
रेल बजट पेश करते हुए ममता बनर्जी ने कहा है कि यात्रियों ...
क्या इन ८ सवालों के जवाब हैं, अगर हाँ ? तो हमें बताएं ! क्यों की पश्चिम के पिचासी संस्कृति का दिन-ब-दिन हावी होते जाना, हमारी अपनी कमजोरी और मानसिक दिवालियापन का सूचक तो नहीं ? बाज़ार शब्द अपनी शाब्दिक परिधि तक तो बड़ा हीं मोहक और प्रभावी लगता है, इससे बहार ...
दुनिया की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनियों में एक अमेरिका की जनरल मोटर्स स्वयं को दिवालिया घोषित कर सरकारी सहायता की मांग कर सकती है। व्यापार जगत में इसे एक बड़ी घटना के रूप में देखा जा रहा है।ऐसी उम्मीद है कि घोषणा के बाद कंपनी की कई उत्पादन इकाइयां ...
भारतीय संस्कृति में पूजा-पाठ, कर्मकांड का चलन हमेशा से ही शीर्ष स्तर पर रहा हैं। पूजन की परम्परा युगों-युगों से चली आ रही हैं। जिसमें पूजन स्थल व मंदिरों का निमार्ण राजा-महाराजाओं के लिए सम्मान की बात होती थी।
भारतीय हिन्दू संस्कृति में चार चीजों को हमेशा से ही महत्व दिया ...
यूपीए सरकार की ओर से अंतरिम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्रालय का काम संभाल रहे प्रणब मुखर्जी ने यह घोषणा किया कि सरकार ने इस साल के रक्षा बजट में पैंतीस फीसद की बढ़ोतरी की है। प्रणब मुखर्जी ने अपने बजट भाषण में कहा कि इस साल रक्षा के ...