राम जन्मभूमिः एक नया सपना

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मेरे पिछले दो-तीन दिन पुणे में गुजरे। इन दो-तीन दिनों में हम एक सपना देखते रहे। दिन में सपना! यह सपना था- अयोध्या के राम मंदिर के बारे में। बाबरी मस्जिद के बारे में। 60 एकड़ के राम जन्म भूमि परिसर के बारे में। यह सारा मामला दशकों से अदालत में अटका हुआ है। ऐसा… Read more »

कुष्ठ रोग पीड़ितों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास की जरूरत

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कुष्ठ रोग निवारण दिवस, 30 जनवरी 2017 पर विशेष कोढ़ को ही कुष्ठ रोग कहा जाता जो कि एक जीवाणु रोग है। यह एक दीर्घकालिक रोग है जो कि माइकोबैक्टिरिअम लेप्राई और माइकोबैक्टेरियम लेप्रोमेटॉसिस जैसे जीवाणुओं कि वजह से होती है। कुष्ठ रोग के रोगाणु कि खोज 1873 में हन्सेन ने की थी, इसलिए कुष्ठ… Read more »

भारत की आबादी में मुसलमानों का अनुपात: एक विश्लेषण

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भारत में राज्य स्तर पर जनसंख्या के अनुपात में सबसे ज़्यादह 68.31% प्रतिशत मुसलमान जम्मू-कश्मीर में आबाद हैं। इसके विपरीत राज्य स्तर पर ही सबसे कम मिजोरम में 1.35% मुसलमान हैं। दूसरी ओर असम, पश्चिम बंगाल और केरल में 25% प्रतिशत से अधिक मुसलमान रहते हैं। वहीं 15 से 20% प्रतिशत वाले राज्य, बिहार और… Read more »

भारत के विरूद्ध सक्रिय संगठनों का वैश्विक तंत्र – ०२

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यह विडम्बना ही नहीं धूर्त्तता भी है कि जिन लोगों को आध्यात्मिक ज्ञान का ककहरा-मात्रा भी नहीं मालूम है वे दलितों को आध्यात्मिक लाभ देने में लगे हुए हैं और इस तथाकथित लाभ के नाम पर उनके गले में गुलामी का फंदा डालने वाले वे लोग उस फंदे को ही मुक्ति का माध्यम व स्वयं को मुक्तिदाता भी बता रहे हैं । इतना ही नहीं, इसकी पूरी अनुकूलता नहीं मिल पाने के कारण वे भारत के कानून-व्यवस्था को धार्मिक स्वतंत्रता का उत्पीडक बताते हुए इसके विरूद्ध अमेरिका से हस्तक्षेप की मांग भी कर रहे हैं ।

बचपन मुस्कुराने से महरूम न हो जाए

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– ललित गर्ग – इन दिनों बन रहे समाज में बच्चों की स्कूल जाने की उम्र लगातार घटती जा रही है, बच्चों के खेलने की उम्र को पढ़ाई-लिखाई में झोंका जा रहा है, उन पर तरह-तरह के स्कूली दबाव डाले जा रहे हैं। अभिभावकों की यह एक तरह की अफण्डता है जो स्टेटस सिम्बल के… Read more »

काले धन के जड-मूल : पाश्चात्य-पद्धति के स्कूल

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काले धन के विष-वृक्ष से समाज व देश को अगर सचमुच ही मुक्त
करना है , तो इसकी पत्तियों व डालियों के ‘विमुद्रीकरण’ अथवा लेन-देन की
प्रक्रिया के ‘कम्प्युटरीकरण’ से कुछ नहीं होगा ; बल्कि इसके लिए इसके
जड-मूल अर्थात दीक्षाहीन पाश्चात्य शिक्षा-पद्धति को उखाड कर
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष-सम्पन्न भारतीय शिक्षण-पद्धति का पुनर्पोषण करना
होगा ।

कामयाबी से भरा रहा साल

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साल 2016 में टीम इंडिया का प्रदर्शन साल 2016 टीम इंडिया के लिए शानदार रहा। टीम इंडिया ने इस दौरान इस एक भी टेस्ट मैच नहीं गंवाया। तो वहीं कोहली की अगुआई में टीम ने टेस्ट रैंकिग में नंबर एक की पोजिशन पर काबिज हुई। धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया टी-20 विश्व कप में… Read more »

ग्राहक जागरूकता समय की आवश्यकता

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राष्ट्रीय ग्राहक दिवस (24 दिसम्बर) पर विशेष दिनकर सबनीश   देश की अर्थव्यवस्था में ग्राहक का महत्वपूर्ण स्थान होता है, वह राजा होता है। ग्राहक तय करता है कि उसे क्या खरीदना है ? क्योंकि उसे चयन का अधिकार प्राप्त है। परंतु अब बाजार घरों में घुस गया है, अब बाजार तय कर रहा है… Read more »

हिन्दी की अस्मिता पर प्रहार करने वाले हिन्दी के अपने ।

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– प्रो. कृष्ण कुमार गोस्वामी हिंदुस्तान समाचारपत्र के 13 नवंबर 2016 के अंक में केंद्रीय गृह मंत्री माननीय श्री राज नाथ सिंह के एक सभा में भोजपुरी को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने के लिए संसद में विधेयक पारित करने का आश्वासन दिया है। यह बहुत बड़ी विडंबना है कि हिन्दी को तोड़ने… Read more »

दूसरों की इन चीजों को उधार मांगने से खाली रहती है जेब….

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प्रिय पाठकों/मित्रों, प्रथवी पर मौजूद प्रत्येक व्यक्ति में नकारात्मक-सकारात्मक उर्जा होती है। जिसका प्रभाव न केवल उसके चारों ओर बल्कि उन चीजों के व्यावहारिक प्रयोग पर भी पड़ता है, जो वो रोजमर्रा के जीवन में उपयोग करते हैं। कुछ वस्तुएं ऐसे होती हैं जो दूसरों से उधार मांगने से व्यक्ति की जेब में कभी धन… Read more »