लेखक परिचय

रतन मणि लाल

रतन मणि लाल

भूतपूर्व संपादक, हिंदुस्तान टाईम्स तथा दी टाईम्स आफ इण्डिया लखनऊ, समन्वय संपादक दैनिक भास्कर भोपाल व राज्य संपादक, दैनिक भास्कर छत्तीसगढ़ रहे हैं. पिछले ३५ सालो से पत्रकारिता में सक्रिय, पत्रकारिता शिक्षा व प्रशिक्षण में भी लम्बा समय बिताया है. वर्त्तमान में लखनऊ में स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर स्थापित हैं.

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मिस्टर गड़बड़िया हमारे भूतपूर्व पड़ौसी हैं|भूतपूर्व इसलिये कि वे हमेशा मकान बदलते रहते हैं|जिस प्रकार नेताओं को दल बदलने की बीमारी होती है गड़बड़िया को मकान बदलने की बीमारी है|अपने अपने शौक हैं बदलने के,कुछ कार बदलने में अपनी शान समझते हैं कुछ लोग बाईक बदलकर अपनी भड़ास निकाल लेते हैं|विदेशों में तो साल बदला नहीं कि बीवी बदलने की तलब होने लगती है|ये तो अपना हिंदुस्तान ही है कि लाख अरमान हों कि बीवी बदलें पर कमवक्त समाज के डर के मारे कुछ ऐसा वैसा कर ही नहीं कर पाते|हमारे कई मित्र हैं जो कोसते रहते हैं उन पलों को जब हिंदुस्तान में पैदा हो गये| खैर छोड़ो बेकार बातों में क्या रखा है गड़बड़ियाजी पांच साल में दस मकान बदल चुके हैं| वैसे गिन्नीज़ बुक में नाम लिखाने का उनका हक बनता है परंतु वे कहते हैं कि जब काले धन के मामले में इंडिया एक नंबर हॊने के बाद भी गिन्नीज़ की चिंता नहीं कर रहा तो अपन क्यों करें|कल ही उन्होंने ग्यारहवां मकान बदला है और सुबह से मेरे घर पर आ धमके|अखवार बगल में दबा था और किसी बिन बुलाये मेहमान की तरह प्रकट हो गये|मैंने उनका भये प्रकट कृपाला दीन दयाला कौशल्या हितकारी के तौर पर स्वागत किया| आते ही बोले” क्या हो गया है संसार के लोगों को,यह देखो अब तो मिस मोटी प्रतियोगिता भी आयोजित होने लगी है” यह कहते हुये उन्होंने अखवार मेरे सामने पटक दिया| एक दिन की मुलाकात जो कल शाम कॊ ही हुई थी इतनी बेतकल्लुफ हो जायेगी मैंने सोचा भी न था|अखवार में एक खूब मोटी महिला का फोटो छपा था, नीचे लिखा थामिस मोटी 2012 चुनी गई| उन्हें इनाम के तौर पर दस लाख डालर दिये गये|” हो गया न कल्याण कैसी लीला है ऊपर वाले की यहां दिन भर कलम घिसो अफसर की चार बातें सुनों तब जाकर बीस पच्चीस हज़ार कमा पाते हैं और मोहतरमा खूब मोटीं क्या हो गईं करोड़पति हो गईं| गड़बड़ियाजी बोले जा रहे थे लोगों के पास कोई काम नहीं है जो कि इस प्रकार के बेढब आयोजन करते रह्ते हैं|

“गड़बड़िया भाई आगे ऐसा ही होना है,मिस मोटी के बाद मिस सुकट्टी,मिस भुखमरी, मिस लंपट मिस ठिनगी ऐसी ही प्रतियोगितायें आयोजित होना है,मैंने भविष्यवक्ता की तरह दांव फेका|

गड़बड़िया त्रिकाल दर्शी हो गये,कहने लगे एक बात समझ में नहीं आई प्रभुदयाल सरजी ,सारी प्रतियोगितायें मिसों के नाम पर क्यों रजिस्टर्ड हैं, मिस्टरों के नाम क्यों नहीं| मैं समझ गया मिस्टर गडबड़िया अभी अपरिपक्क्व बुद्धि के ही हैं,मैने प्रत्यक्ष तौर पर कहा भाई साहब आप अपने घामड़ दिमाग पर जरा जोर तो डालिये योगाभ्यास कीजिये और प्राणायाम कीजिये| इस सनातन क्रिया से आपकी छठी इंद्रिय जागृत हो जायेगी और आपको ग्यानार्जन होने लगेगा कि आजकल कितनी सारी मिस्टर प्रतियोगितायें आयोजित हॊ रही हैं|मैंने ग्यान गंगा बनकर उपदेशों के गंगाजल से उन्हें सराबोर कर दिया|’मिस्टर भ्रष्टाचारी,मिस्टर घूसखोर,मिस्टर बेईमान ,मिस्टर घुटाला मिस्टर टालू क्या इतनी सारी मिस्टर प्रतियॊगितायें यहां नहीं चल रहीं हैं?

“हाँ सर बात तो सही कह रहे हैं आप” अपनी कम अक्ली पर झेंप मिटाते हुये वे कुछ उत्तॆजित हो गये| फिर चुप हो गये| बात मैंने ही बढ़ाई

“राजधानी से लेकर छोटे छोटे गांव तक में ये प्रतियोगितायें आयोजित हो रही हैं|केंद्रीयकरण से विकेंद्रीकरण की ओर बढ़ते ग्राम संपर्क अभियान के कदम इन प्रतियोगिताओं की शत प्रतिशत सफलताओं में किलोमीटर के पत्थर साबित होंगे| बड़े बड़े दिग्ग्ज भ्रष्टाचारी,घूसखोर अपने अपने स्वागत कंठों में गेंदों और गुलाब के फूलों की मालायें डाले,ईमानदारी और सत्यनिष्ठा का मुखौटा लगाये प्रतिस्पर्धा में भाग लेने के लिये देश के विकसित मंच पर खड़े हैं|”मिस्टर गड़बड़िया पर हमारी धारावाहिक बातों का गहरा प्रभाव पड़ा|”दयाल भैया आप बिल्कुल ठीक कह रहे हैं,मिस्टर गुंडा, मिस्टर आतंकवादी,मिस्टर धर्म निरपेक्ष,मिस्टर साम्प्रदायिक प्रतियॊगिताएं तो देश के हर प्रांतीय शहरीय और ग्रामीण‌ मंच पर हो ही रहींहैं|अब तो शक्ति प्रदर्शन भी प्रतियॊगिता का मुद्दा हो गया है||लाख दो लाख की किराये की भीड़ जुटाकर मिस्टर शक्तिमान प्रतियॊगितायें बड़े धुरंधर हर साल छ: महीने में आयोजित कर ही लेते हैं|”

मैँएं कहा मिस्टर कातिल,मिस्टर बलात्कारी,मिस्टर अपहरण,मिस्टर खाऊ जैसे सफल आयोजनों पर अब सरकार लगता है कि सबसीडी देने का विचार कर रही है|ग्राम प्रमुख एवं सरपंच इनके संचालक बनाये जा रहे हैं|सुना है सांसदों एवं विधायकों के संरक्षण में इन महान ऐतिहासिक उत्सवों को फलीभूत करने के लिये सरकारी अमला जी जान से जुटा है||मिस्टर लफंगा,मिस्टर लतखोर,मिस्टर भगोड़ा जैसी स्वास्थ्य वर्धक एवं सुखदायक योजनायें प्रतिस्पर्धा के लिये प्र्स्तावित हैं|राम भली करे |

मिस्टर गड़बड़िया प्रसन्न थे|

,हम मिस्टर लतखोर बनेंगे,हम सर्वोत्तम चोर बनेंगे

मिस मिस्टर के पदक जीतकर चंदा और चकोर बनेगे|

गुनगुनाते हुये अपने ग्यारहवें घर की ओर प्रस्थान कर गये|

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