लेखक परिचय

डॉ. मधुसूदन

डॉ. मधुसूदन

मधुसूदनजी तकनीकी (Engineering) में एम.एस. तथा पी.एच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त् की है, भारतीय अमेरिकी शोधकर्ता के रूप में मशहूर है, हिन्दी के प्रखर पुरस्कर्ता: संस्कृत, हिन्दी, मराठी, गुजराती के अभ्यासी, अनेक संस्थाओं से जुडे हुए। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (अमरिका) आजीवन सदस्य हैं; वर्तमान में अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्‍था UNIVERSITY OF MASSACHUSETTS (युनिवर्सीटी ऑफ मॅसाच्युसेटस, निर्माण अभियांत्रिकी), में प्रोफेसर हैं।

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डॉ. मधुसूदन
black money

–एक निरीक्षण
(एक)प्रवेश:
निम्न आँकडों पर ध्यान देकर पढें।
ये २०१२ और २०१३ के आँकडे हैं।
संसार के अर्थ-समृद्ध देशों में इनकी प्रति व्यक्ति, औसत आय साथ लिखी है।
उसका आधार ले कर तुलना करें। कुछ वैध देशों को भी दर्शाया है।
जापान, सिंगापूर इत्यादि हमारे लिए मार्गदर्शक हो सकते हैं।

$— संसार के पहले १० में ३  देश, काले धन से समृद्ध हैं।
$— ५  देश पेट्रोलियम की निर्यात से समृद्ध है।
$—३ देश वैध मार्गों से समृद्ध  हैं।

(दो) संसार के पहले १० में ३ निम्न देश काले धन से समृद्ध प्रतीत होते हैं।

ये २०१२ और २०१३ के आँकडे हैं। संसार के अर्थ समृद्ध देशों में इनकी प्रति व्यक्ति औसत आय निम्न लिखित है।
(१) मकाऊ  $१४२,५६४ (२०१३ ) (Gambling Casinoes )—जूआ-द्यूत-इत्यादि खेलने के भव्य जलसा घर। एक वृत्तान्त के अनुसार ऐसे जूआघरों का उपयोग काले धनका शुद्धीकरण करने में होता है।
(२) लक्सेम्बर्ग $ ९०,७९० (२०१३) अवैध काले धन के अधिकोष (बॅन्क)का  लेन देन।

(९) स्विट्ज़रलण्ड $५३६७२ (२०१३) संसार की स्थिर(stable), विचलित न होनेवाली अर्थ व्यवस्था मानी जाती है। उसकी अर्थ नीति, दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षितता, और राजनैतिक स्थिरता, इन तीन कारणों से, निवेशकों का सुरक्षित आश्रय-स्थान, माना जाता है।
स्विट्ज़र्लण्ड की अपनी आर्थिक वृद्धि का, और अस्तित्व का सशक्त आधार ही ऐसा परदेशी निवेश है।

प्रश्न:
क्या ऐसा देश अपनी समृद्धि का कारण “काला धन” श्वेच्छा से आप को वापस देगा?
सोचिए। उसकी समृद्धि ही काले धन पर टिकी है। जब सारे खाते खाली हो कर काला धन
अन्य अवैध बॅन्कों में खिसकाया जाएगा, तब उनके नम्बर आप को दिए जाएंगे। नम्बर को जानकर क्या करोगे? कुछ लीपापोती भी हो सकती है।
चाहता तो हूँ, पर काला धन आने की मुझे आशा नहीं है।
{मैं स्वयं गलत प्रमाणित होना चाहता हूँ।}

(तीन)
पाँच देश पेट्रोलियम की निर्यात से समृद्ध है।

(१) कटार $ १३१,७५८ (२०१३)—-पेट्रोलियम की निर्यात
(३) कुवैत $ ८५,६६० (२०१२)—- पेट्रोलियम की निर्यात
(५) ब्रूनै $ ७१,७५९ (२०१३)— कच्चे तेल की निर्यात
(७) युनायटेड आरब अमिरात $ ५८,०४२ (२०१२) पेट्रोलियम आधारित।
(८) सौदी अरेबिया $५३७८० (२०१३) पेट्रोलियम आधारित।

(चार)

वैध मार्गों से समृद्ध  देश

इस प्रारूप पर भारत आगे बढ सकता है।

(४) सिंगापूर $७८, ७४४ (२०१३)।
व्यापार लक्ष्यी आर्थिक व्यवस्था का बहु विकसित, भ्रष्टाचार रहित, खुली, वैध अर्थ व्यवस्थावाला देश, और व्यापार को प्रोत्साहित करनेवाला, अल्पतम कर वाला, देश माना जाता है।तीसरे क्रम का प्रतिव्यक्ति सकल राष्ट्रिय उत्पाद वाला देश है।

(६) नॉर्वे $ ६५,४६१ (२०१३)  भरपूर प्राकृतिक स्रोतों के कारण, नॉर्वे की आर्थिक वृद्धि जिसमें पेट्रोलियम उत्पाद, जल विद्युत और मछली उद्योग इत्यादि के कारण सम्मिलित हैं।
(९) हॉंग कॉंग ($५३,२०३)( Free trade Capitalist Economy )मुक्त व्यापार पूँजी वादी अर्थ व्यवस्था।

(१०) अमरिका (U S A ) $ ५३,१४३ (२०१३)  — यह वैध पूंजीवादी जनतंत्र है। और खुला व्यवहार करता है।

(१९) जापान का क्रम १९ वा है। कुछ $३७००० प्रति व्यक्ति आय है। यह कठोर परिश्रम और वैधता का फल है।

भारत के लिए सिंगापूर, जापान, इत्यादि देशों के पद चिह्नों पर चलना वैध भी है।
परदेशों से संबंध बढाना इस लिए भी आवश्यक मानता हूँ। प्रधान मंत्री जी की परदेशी यात्राएँ इसी उद्देश्य से मुझे सही लगती है।

आँकडे कुछ जालस्थलों से लिए गए हैं। प्रश्न हो तो अवश्य पूछें।
उत्तर देने में कुछ विलम्ब होगा।

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7 Comments on "काले धन को सफेद करनेवाले देश"

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आर. सिंह
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डाक्टर साहिब,बहुत अच्छा लगा जब आपने भाजपा और आर.,एस एस की पद्धति अपना ली.यह अच्छी पद्धति है कि प्रश्न का उत्तर देने के बदले प्रश्न करने वाले पर ही प्रश्न दाग दो.तरीका अच्छा है और बहुत जगहों पर सफल भी हो जाता है,पर आआप के साथ वैसा करने का अभी समय नहीं आया है.अभी तो कुछ दिन ही हुए हैं,आआप की सरकार को बने हुए.आपके डाक्टर मित्र ने इस सुझाव देने के पहले कुछ तो इन्तजार किया होता. खैर. अब आगे बढ़ते हैं.आपने मेनिफेस्टो की बात तो कह दी,पर आपने नमो और राजनाथ के चुनावी भाषणों का कोई जिक्र नहीं… Read more »
डॉ. मधुसूदन
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सिंह साहब आप भी सहमत होंगे।

(१) क्या सब्सीडी देकर नहीं किया? ऐसा तो कोई भी कर सकता है। ये कौनसा कर्तृत्व? खर्च करने से बुद्धिमानी नहीं परखी जाती। कोई भी खर्च कर के दिखा देगा।

(२) मॅनिफ़ेस्टो लिखित ही, विश्वासार्ह होता है। सारा ( लिगल ) क्रय-विक्रय लिखित ही वैध मानते हैं; युनो से लेकर न्यायालय तक।

आर. सिंह
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मैं नहीं जानता कि मेरे ये प्रश्न लोगों को अच्छा लगेगा या नहीं,पर १ पिछले लोक सभा चुनाव में विदेशों से काला धन वापसी एक अति विशिष्ट मुद्दा था या नहीं? २.बाबा राम देव ने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाया था या नहीं? ३क्या नमो और उनकी पार्टी के अन्य माननीय सदस्य देश भर में घूम घूम कर इसको जनता को अमृत घुट्टी की तरह नहीं पिला रहे थे? ४.क्या देश वासियोंको यह सब्ज बाग़ नहीं दिखाया जा रहा था कि नमो के प्रधान मंत्री बनने के छः महीनों के अंदर विदेशों से इतना कालाधन वापस आ जाएगा कि सब… Read more »
डॉ. मधुसूदन
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सिंह साहब निम्न वादे तो “आप” के घोषणा पत्र से ही निकलते है। प्रश्न पूछकर विषय को सामान्यतः फैलाने की मेरी पद्धति नहीं है। आप के-७० में से केवल २५ चुने हुए वादों पर उत्तर देने प्रयास कीजिए। कितने पूरे हुए? आलेख डालिए। मैं भा ज पा का सदस्य नहीं हूँ। भारत का शुभेच्छक अवश्य हूँ। आप के, मेनिफेस्टो की मुख्य बातों का जिक्र करते हुए केजरीवाल ने कहा था दिल्ली में— (१) जन लोकपाल बिल लाया जाएगा।(२) साथ ही स्वराज बिल भी पास कराया जाएगा।(३) महिला सुरक्षा, बुजुर्गों के बारे में हमारा खास जोर है।(४) महंगाई,(५) रिश्वतखोरी,(६) बच्चों की… Read more »
डॉ. मधुसूदन
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क्षमा कीजिए। आप की बात भा ज पा के चुनावी घोषणा पत्र से मेल नहीं खाती। कृपया ==>भा. ज. पा. के चुनावी घोषणा पत्र का काले धन वाला निम्न परिच्छेद देख लीजिए। Black Money By minimizing the scope for corruption, we will ensure minimization of the generation of black money. BJP is committed to initiate the process of tracking down and bringing back black money stashed in foreign banks and offshore accounts. We will set up a Task Force for this purpose and to recommend amendments to existing laws or enact new laws. The process of bringing back black money… Read more »
Dr. Arvind Kumar Singh
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आदरणीय डा. साहब चाहता तो मैं भी हूॅ कि देश समृद्ध हो लोगो का जीवन स्तर उपर उठे। काला धन देश में वापस आये। पर सवाल ये उठता है कि काला धन रखने वाला देश हमारा पैसा क्यों वापस करे? सारी दुनिया लाभ और हानि के दृष्टीकोण से कार्य करती है। यदि हमारे पास इस प्रश्न का उत्तर है तो हमे काला धन वापस आने पर विश्वास करना चाहिये। यदि इस प्रश्न का उत्तर आप तलाश सके तो मेहरबानी होगी। मैं तो खोज ही रहा हूॅ। आपके स्नेहिल जबाव की प्रतीक्षा में। आपका अरविन्द
डॉ. मधुसूदन
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डॉ. अरविन्द कुमार सिंह जी।

आप मेरी दृष्टि में सही कह रहे हैं। सारे देश (१)अपने हित की दृष्टि से ही पैंतरा लेते हैं। (२) फिर अपने पैंतरे को टेढा-तिरछा तर्क कुशलता पूर्वक जोड देते हैं। (३) केवल युनो में कुछ किया जाता है। पर उसमें भी काले को सफेद दिखाकर–और शक्ति शाली राष्ट्र अपनी पूरी शक्ति और धन अपने मित्र देशों में बाँट कर बहुमत अपने हित में करवा लेता है।

हम अकेले सिद्धान्त पर डटकर ६७ वर्षों से मूरख बन रहे हैं।

आज तक जो हुआ नहीं, वह आगे कैसे होगा?

देरी के लिए क्षमस्व।

मधुसूदन

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