लेखक परिचय

राजू सुथार

राजू सुथार

विकिपीडियन

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 kisan कुमार अपने बच्चों से बहुत प्रेम करता था , लेकिन लड़के आधुनिक जीवन शैली में रहना चाहते थे ‘ बाप घर पर खेती बाड़ी के धंधे में हमेशा व्यस्त ही रहता था ‘   कुमार अपने बच्चों से हमेशा अच्छी तरीके से बातें करता था लेकिन बेटे जो काफी नखरा करते हमेशा उनकी बात काट देते थे ‘ कुमार के दो बेटे थे – रवि और हरेंद्र और पत्नी भी  हमेशा बेटों का साथ देती थी ‘

”कुमार” – बेटे तुम जब विद्यालय से घर लौट आओ तो खाना खाने के बाद मेरे पास खेत में मेरी मदद करने के लिए आ जाना हाँ मैं तुम्हारा इंतजार करुंगा ‘

“बेटा” –  पिता जी आप भी ना हमारे पीछे पड़ गये हैं

“पत्नी” – ठीक ही तो कह रहे हैं मेरे लाल बेचारे विद्यालय जाएंगे फिर वहाँ से पैदल घर आएंगे और ऊपर से आप काम के लिए खेत में बुलाना चाहते हैं ‘

“बाप” – ठीक है मैं अकेले ही खेत पर घिसुंगा ‘

“बेटे” – हमें नहीं पता अगर हम खेत पर काम करने के लिए आएंगे, तो क्या आप हमारे लिए मोटरसाइकिल आएंगे ‘

“पिता” – क्यों घर वालों से सौदेबाजी कर रहे हो वैसे भी इस साल मैं तुम्हारे लिए गाड़ी लाऊंगा ही ‘

दोनों लड़के भले ही विद्यालय जाते हो लेकिन दोनों में संस्कार नाम की कोई चीज नहीं थी ‘
दोनों हमेशा विद्यालय में दूसरे छात्रों को जो ज्यादातर उनसे छोटे ही थे क्योंकि रवि और हरेंद्र दो तीन बार फेल हो चुके थे रोजाना मारपीट करते थे लड़ाई झगड़ा करते ही रहते थे ‘
यह सिलसिला चलता ही रहा पत्नी घर का काम करती थी और खेती के काम में हाथ ही नहीं डालती थी ‘
कुमार उम्र में ६०-६५ वर्षों का था लेकिन हमेशा सक्रिय रुप से खेती का कार्य करता था इस कारण उनकी तबीयत बिगड़ रही थी , जिससे घर की स्थिति में भी बदलाव सा आ गया था ‘

“बेटे” – पिताजी आपने जो हमसे वादा किया था कि आप हमें गाड़ी दिलवाएंगे पर अभी तक नहीं दिलाई ‘

“पिता” – रवि कभी तो किसी पर दया किया करो , मैं बीमार पड़ा हूँ और तुम्हें बाइक चाहिए , वाह ! बेटे वाह ! तुमसे अच्छे बेटे किसी को ना मिले ‘

कुमार की तबीयत बिगड़ने पर खेती का सारा काम बंद हो गया सारी फसलें खराब हो रही थी और बिचारा “कुमार” चारपाई पर सोता हुआ रो रहा था क्योंकि उसने काफी लगन और मेहनत से फसल को संवारा था और अब ऐसी हालत हो गई है कि चारपाई से खड़ा भी नहीं हो सकता ‘
कुमार ने अपनी पत्नी जानकी से कहा – एक बार तुम समझाओ ना अपने बेटे को कहीं तुम्हारी बात सुन ले ‘

“माँ” – रवि ,हरेन्द्र एक बार तो इस फसल को निपटा लो क्योंकि तुम्हारे पिता की स्थिति ठीक नहीं है ‘

“बेटे” –  माँ अब तो आप भी बदल गईं हो हम से नहीं होगा यह सब ‘

कुछ दिनों बाद कुमार की हालत में सुधार आया और कुमार के खेत में चल पड़ा ‘ उसकी हालत इतनी भी ठीक नहीं थी कि वह कोई कार्य कर सके , लेकिन कुमार खेत में काम करने लगा ‘ काम करते करते-

“कुमार” –  हे ! राम अब इतना दर्द और नहीं सहा जा सकता है उठा ले भगवान उठा ले ‘ और कुमार अचानक गिर पड़ा , पत्नी सामने से खाना लेकर आ रही थी उसने देखा और तेजी से भागी उसने देखा तो कुमार इस दुनिया में नहीं रहा ‘
दोनों लड़के सोचने लगे और लज्जित होकर रोने लगे अगर एक बार पिताजी की बात सुन लेते तो यह हादसा नहीं होता कुमार का अंतिम संस्कार किया गया ‘
कुमार के चले जाने के बाद घर की स्थिति पूरी तरह से बिगड़ गई थी ना तो समय पर खाना मिल रहा था और न ही पानी ‘
दोनों बेटों की पढ़ाई भी छुट गई थी और दोनों खेत में काम पर जुट गये ‘

“हरेन्द्र” – रवि अगर एक बार बात मान लेते तो ऐसा नहीं होता ‘

“रवि” –  यार अब क्या करें , चाहे जैसे भी थे पिता जी, लेकिन बहुत याद आ रही है ‘
खेत में काम करते करते रवि रोने लगा इस कारण हरेन्द्र को भी आंसू आ गए ‘

राजू सुथार ‘स्वतंत्र’

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