लेखक परिचय

फ़िरदौस ख़ान

फ़िरदौस ख़ान

फ़िरदौस ख़ान युवा पत्रकार, शायरा और कहानीकार हैं. आपने दूरदर्शन केन्द्र और देश के प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों दैनिक भास्कर, अमर उजाला और हरिभूमि में कई वर्षों तक सेवाएं दीं हैं. अनेक साप्ताहिक समाचार-पत्रों का सम्पादन भी किया है. ऑल इंडिया रेडियो, दूरदर्शन केन्द्र से समय-समय पर कार्यक्रमों का प्रसारण होता रहता है. आपने ऑल इंडिया रेडियो और न्यूज़ चैनल के लिए एंकरिंग भी की है. देश-विदेश के विभिन्न समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं के लिए लेखन भी जारी है. आपकी 'गंगा-जमुनी संस्कृति के अग्रदूत' नामक एक किताब प्रकाशित हो चुकी है, जिसे काफ़ी सराहा गया है. इसके अलावा डिस्कवरी चैनल सहित अन्य टेलीविज़न चैनलों के लिए स्क्रिप्ट लेखन भी कर रही हैं. उत्कृष्ट पत्रकारिता, कुशल संपादन और लेखन के लिए आपको कई पुरस्कारों ने नवाज़ा जा चुका है. इसके अलावा कवि सम्मेलनों और मुशायरों में भी शिरकत करती रही हैं. कई बरसों तक हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की तालीम भी ली है. आप कई भाषों में लिखती हैं. उर्दू, पंजाबी, अंग्रेज़ी और रशियन अदब (साहित्य) में ख़ास दिलचस्पी रखती हैं. फ़िलहाल एक न्यूज़ और फ़ीचर्स एजेंसी में महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं.

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देश में एक अप्रैल से देश के 6-14 उम्र के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने का क़ानून लागू हो गया है. केंद्र सरकार ने पिछले साल बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार एक्ट-2009 को मंज़ूरी दी थी. यह क़ानून देश के नौनिहालों को कितना शिक्षित कर पाता है, यह तो आने वाला वक़्त ही बताएगा, क्योंकि पहले बने क़ानूनों में भी बच्चों को शिक्षा देने की वकालत की गई थी, लेकिन उनका क्या हश्र हुआ? भारतीय संविधान के अनुछेच्द 45 में 0-14 उम्र के बच्चों को शिक्षा देने की बात कही गई और 2002 में 86 वें संशोधन में शिक्षा के अधिकार का ज़िक्र है. यह विडंबना ही है कि देश में क़ानून बन तो जाते हैं, लेकिन उन पर अमल नहीं हो पाता.

अब नए क़ानून में कई अच्छी बातें कही गई हैं. इस क़ानून की सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि अब सरकार के लिए उन बच्चों को शिक्षित करना जरूरी हो गया है जो 6-1

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