लेखक परिचय

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

वामपंथी चिंतक। कलकत्‍ता वि‍श्‍ववि‍द्यालय के हि‍न्‍दी वि‍भाग में प्रोफेसर। मीडि‍या और साहि‍त्‍यालोचना का वि‍शेष अध्‍ययन।

Posted On by &filed under राजनीति, समाज.


आरएसएस और उसके सहयोगी संगठनों ने मुसलमानों के खिलाफ जिस तरह प्रचार आरंभ किया है उसे देखते हुए सामयिक तौर पर मुसलमानों की इमेज की रक्षा के लिए सभी भारतवासियों को सामने आना चाहिए। मुसलमानों को देशद्रोही और आतंकी करार देने में इन दिनों मीडिया का एक वर्ग भी सक्रिय हो उठा है,ऐसे में मुसलमानों की भूमिका को जोरदार ढ़ंग से सामने लाने की जरुरत है। सबसे पहली बात यह कि भारत के अधिकांश मुसलमान लोकतांत्रिक हैं और देशभक्त हैं। वे किसी भी किस्म की साम्प्रदायिक राजनीति का अंग नहीं रहे हैं। चाहे वह मुस्लिम साम्प्रदायिकता ही क्यों न हो। भारत के मुसलमानों ने आजादी के पहले और बाद में मिलकर देश के निर्माण में बड़ी भूमिका निभायी है और उनके योगदान की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।

भारतीय मुसलमानों के बारे में जिस तरह का स्टीरियोटाइप प्रचार अभियान मीडिया ने आरंभ किया है कि मुसलमान कट्टरपंथी होते हैं,अनुदार होते हैं,नवाजी होते हैं,गऊ का मांस खाते हैं,हिन्दुओं से नफरत करते हैं,चार शादी करते हैं,आतंकी या माफिया गतिविधियां करते हैं।इस तरह के स्टीरियोटाइप प्रचार जरिए मुसलमान को भारत मुख्यधारा से भिन्न दर्शाने की कोशिशें की जाती हैं। जबकि सच यह है मुसलमानों या हिन्दुओं को स्टीरियोटाइप के आधार पर समझ ही नहीं सकते। हिन्दू का मतलब संघी नहीं होता। संघ की हिन्दुत्व की अवधारणा अधिकांश हिन्दू नहीं मानते।भारत के अधिकांश हिन्दू- मुसलमान कुल मिलाकर भारत के संविधान के द्वारा परिभाषित संस्कृति और सभ्यता के दायरे में रहते हैं और उसके आधार पर दैनंदिन आचरण करते हैं।अधिकांश मुसलमानों की सबसे बड़ी किताब भारत का संविधान है और उस संविधान में जो हक उनके लिए तय किए गए हैं उनका वे उपयोग करते हैं। हमारा संविधान किसी भी समुदाय को कट्टरपंथी होने की अनुमति नहीं देता। भारत का संविधान मानने के कारण सभी भारतवासियों को उदारतावादी मूल्यों, संस्कारों और आदतों का विकास करना पड़ता है।

समाज में हिन्दू का संसार गीता या मनुस्मृति से संचालित नहीं होता बल्कि भारत के संविधान से संचालित होता है। उसी तरह मुसलमानों के जीवन के निर्धारक तत्व के रूप में भारत के संविधान की निर्णायक भूमिका। भारत में किसी भी विचारधारा की सरकार आए या जाए उससे भारत की प्रकृति तय नहीं होती, भारत की प्रकृति तो संविधान तय करता है। यह धर्मनिरपेक्ष-लोकतांत्रिक देश है और इसके सभी बाशिंदे धर्मनिरपेक्ष-लोकतांत्रिक हैं। संविधान में धार्मिक पहचान गौण है, नागरिक की पहचान प्रमुख है। इस नजरिए से मुसलमान नागरिक पहले हैं, धार्मिक बाद में। आरएसएस देश का ऐसा एकमात्र बड़ा संगठन है जिसकी स्वाधीनता संग्राम में कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं रही , यह अकेला ऐसा संगठन है जिसके किसी बड़े नेता को साम्प्रदायिक-आतंकी-पृथकतावादी हमले का शिकार नहीं होना पड़ा। उलटे इसकी विचारधारा के भारत की धर्मनिरपेक्ष-लोकतांत्रिक संस्कृति और सभ्यता विमर्श पर गहरे नकारात्मक असर देखे गए हैं। इसके विपरीत भारत के मुसलमानों ने अनेक विपरीत परिस्थितियों में रहकर भी भारत के स्वाधीनता संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अनेक मुसलिम नेताओं ने कम्युनिस्ट आंदोलन और क्रांतिकारी आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। ब्रिटिश शासन के खिलाफ मुसलमानों की देशभक्तिपूर्ण भूमिका को हमें हमेशा याद रखना चाहिए। मसलन्, रौलट एक्ट विरोधी आंदोलन और जलियांवालाबाग कांड में 70 से अधिक देशभक्त मुसलमान शहीद हुए। इनकी शहादत को हम कैसे भूल सकते हैं। आरएसएस के प्रचार अभियान में मुसलमानों को जब भी निशाना बनाया जाता है तो उनकी देशभक्ति और कुर्बानी की बातें नहीं बतायी जाती हैं। हमारे अनेक सुधीजन फेसबुक पर उनके प्रचार के रोज शिकार हो रहे हैं। ऐसे लोगों को हम यही कहना चाहेंगे कि मुसलमानों के खिलाफ फेसबुक पर लिखने से पहले थोड़ा लाइब्रेरी जाकर इतिहास का ज्ञान भी प्राप्त कर लें तो शायद मुसलमानों के प्रति फैलायी जा रही नफरत से इस देश को बचा सकेंगे।

आरएसएस के लोगों से सवाल किया जाना चाहिए कि उनको देश के लिए कुर्बानी देने से किसने रोका था ? स्वाधीनता संग्राम में उनके कितने सदस्य शहीद हुए ? इसकी तुलना में यह भी देखें कितने मुसलमान नेता-कार्यकर्ता शहीद हुए ? देश प्रेम का मतलब हिन्दू-हिन्दू करना नहीं है । हिन्दू इस देश में रहते हैं तो उनकी रक्षा और विकास के लिए अंग्रेजों से मुक्ति और उसके लिए कुर्बानी की भावना आरएसएस के लोगों में क्यों नहीं थी ? जबकि अन्य उदार-क्रांतिकारी लोग जो हिन्दू परिवारों से आते थे, बढ़-चढ़कर कुर्बानियां दे रहे थे, शहीद हो रहे थे। संघ उस दौर में क्या कर रहा था ? यही कहना चाहते हैं संघ कम से कम कुर्बानी नहीं दे रहा था। दूसरी ओर सन् 1930-32 के नागरिक अवज्ञा आंदोलन में कम से कम 43 मुसलमान नेता-कार्यकर्ता विभिन्न इलाकों में संघर्ष के दौरान पुलिस की गोलियों से घायल हुए और बाद में शहीद हुए। सवाल यह है संघ इस दौर में कहां सोया हुआ था ?

कायदे से भारत के शहीद और क्रांतिकारी मुसलमानों की भूमिका को व्यापक रुप में उभारा गया होता तो आज नौबत ही न आती कि आरएसएस अपने मुस्लिम विरोधी मकसद में सफल हो जाता। मुसलमानों के प्रति वैमनस्य और भेदभावपूर्ण रवैय्ये को बल इसलिए भी मिला कि आजादी के बाद सत्ता में रहते हुए कांग्रेस ने मुसलमानों की जमकर उपेक्षा की। इस उपेक्षा को सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में साफ देख सकते हैं। संघ के प्रचार का कांग्रेस पर दबाव रहा है और कांग्रेस ने कभी मुसलमानों को लेकर दो-टूक रवैय्या नहीं अपनाया। इसका ही यह परिणाम है कि मुसलमान हाशिए पर हैं। संघ ने मुस्लिम तुष्टीकरण का झूठा हल्ला मचाकर कांग्रेस को मुसलमानों के हितों की उपेक्षा करने के लिए मजबूर किया और कांग्रेस ने संघ को जबाव देने के चक्कर में नरम हिन्दुत्व की दिशा ग्रहण की और इसका सबसे ज्यादा खामियाजा मुसलमानों को उठाना पड़ा।

Leave a Reply

26 Comments on "भारतीय मुसलमानों के पक्ष में"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
ABHISHEK
Guest
हिन्दुओ का दृढ संकल्प है हम मर जायेगे ,मिट जायेगे,तबाह हो जायेगे , बर्बाद हो जायेगे पर इतिहास से कुछ नहीं सीखेगे ! आदरणीय चतुर्वेदी जी – जो इतिहास से नहीं सीखता वो नष्ट हो जाता है ! आप जिन्हें शहीद बता रहे है क्या उन्होंने आपके लिए शहादत दी ! नहीं ,क्योकि अगर वे आपके लिए शहीद होते तो आज पकिस्तान नहीं होता ! पता है विभाजन का परिणाम क्या हुआ तीस लाख लोगो की निर्मम हत्या हुयी ! विभाजन का कारण जानते है धर्म का आधार ! जिसकी विचारधारा,सभ्यता ,संस्कृति आदि हमसे अलग है हम उनके साथ नहीं… Read more »
Parag Pisokar
Guest

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी जी जैसे “वामपंथी विचारक” से आप उम्मीद भी क्या कर सकते हैं, इनके लेखों पर टिका करना भैंस के आगे बीन बजाने जैसा है।

Sachin Tyagi
Guest
इस लेख में ज्यादातर बातें बकवास है और जिन बातोँ को गलत बताया गया है वे ज्यादातर सही हैं …… वामपंथियों के कुप्रचार अभियान में , जब आरएसएस को निशाना बनाया जाता है तो उनके देशभक्ति व देशसेवा के कामों को छुपाया जाता है ………… वर्तमान में 100 से ज्यादा संगठन , संघ परिवार से जुड़े हैं जिनके ज़रिये सवा लाख से ज्यादा सेवा कार्य ,देश भर में चल रहे हैं ………. कश्मीर की बाढ़ में संघ के कितने स्वयंसेवक सहायता कर रहे हैं और केंद्र की भाजपा सरकार ने कश्मीर को कितनी सहायता राशि ( 2100 करोड़ रु .… Read more »
JaggaramJat
Guest

सिधासट व सही जवाब दिया है इस छ्द्म सेकूलरवादी को,

डॉ. मधुसूदन
Guest
प्रो. चतुर्वेदी जी { या अन्य विद्वान)– क्या आप निम्न प्रश्नों का प्रामाणिक उत्तर दे सकते हैं? पहले डेटा (वास्तविकता) प्रस्तुति। डेटा : जैसे स्थूलतः अनेक हिंदू नामधारी विद्वान, श्री. रमेश सिंह जी, सुश्री बीनू जी भटनागर, और प्रोफ़ेसर जगदीश्वर चतुर्वेदी जी, इस हिन्दू-बहुल सेक्यूलर भारत में, बडी उदारता पूर्वक मुसलमानों के पक्ष में लिखा करते हैं। ऐसे लेखन का विरोध नहीं। अवश्य, आप, मूल्यवान दृष्टिकोण प्रस्तुत करते रहें। जिस से हमारी विचारशुद्धि होती है। निंदक नीयरे रखना ही चाहिए। पर मेरे मस्तिष्क में निम्न प्रश्न है, जिनका तर्क सम्मत, समाधान किसी सेक्युलर या अन्य चिंतक द्वारा आज तक मैं… Read more »
आर. सिंह
Guest

मैं न किसी की तरफदारी करता हूँ नकिसी के लिए बोलता हूँ.एक आम या ख़ास सनातनी या एक आम या ख़ास मुसलमान क्या कर रहा है और क्या कह रहा है,उससे मुझे कुछ लेना देना नहीं.मैं जो कुछ मेरी दृष्टि में ठीक लगता है ,मैं वही कहता हूँ और अन्य मित्रों और विचारकों से मेरा अनुरोध है के केवल उसी सम्बन्ध में प्रश्न करें याउसका प्रतिकार करें. ऐसे इस विषय पर आज मोदी जी का सी.एन एन के साथ साक्षात्कार भी बहुत महत्त्व रखता है.

इक़बाल हिंदुस्तानी
Guest
बंगलादेशी मुस्लिम आ सकते हैं तो पाकिस्तानी हिंदू क्यों नहीं! इक़बाल हिंदुस्तानी August 25, 2012 राजनीति 1 Comment इक़बाल हिंदुस्तानी हम अपनी नालायक़ी का क़सूरवार कब तक दूसरों को ठहरायेंगे? मैंने कुछ दिन पहले फेसबुक पर एक पोस्ट में पाकिस्तान के हिंदुओं के साथ भी अन्याय और पक्षपात बंद करने की अपील की थी। इस पोस्ट पर जहां कई लोगों के सकारात्मक कमैंट आये और कुछ ने लाइक किया वहीं एक साहब ने मुझे फोन पर भविष्य में ऐसी पोस्ट ना लिखने की सख़्त लहजे में हिदायत दी जो धमकी अधिक लग रही थी। जब मैंने उनसे पूछा कि आदमी… Read more »
JaggaramJat
Guest

सेकूलर कहलाने वालो को हिन्दु पसन्द नही है क्योकि वे भारतवर्ष के राष्ट्रवाद में विश्वास करते है जब कि सेकूलर एन केन प्रकारेण सत्ता पर काबिज रहने में, बांग्लादेश का हो या पाकिस्तान का, मुसलमान इन सेकूलरो की नजर मे उनका एक वोट है जो उन्हे सत्ता की सिढिया चढने मे मदद करता है जातिवाद मे बटा हिन्दु उनके लिये बेहकूब है जो सेकूलरता के चक्कर मे आकर इन्हे वोट करता है।

मुकेश चन्‍द्र मिश्र
Guest

क्षमा करें मै दूसरे को दिये जवाब मे बीच मे कूद रहा हूँ:
आपके ज़्यादातर पुराने लेख मैंने पढे हैं जिसमे आप मुझे सच्चे सेकुलर नजर आते थे इसलिए मै आपका प्रशंसक हो गया था किन्तु पिछले कई महीनो या कहे 1-2 साल के अंदर आप के विचारो मे भी सायद सांप्रदायिकता घुस गयी या फिर वो किसी मौलाना की धमकी की वजह से बदल गयी है। उम्मीद है आप पहले वाले इकबाल साहब की तरफ दुबारा लौटेंगे

इक़बाल हिंदुस्तानी
Guest

अगर मौलानाओं से डरता तो उनके कट्टर पन्थ के खिलाफ कलम न चलाता और अगर मुस्लिमों का हर बात पर अंध विरोध करना ही सच्चा सेकुलर होना है तो मैं ऐसा सेकुलर न हूँ और न ही कभी बनूंगा चाहे आप इस वजह से मुझे कुछ भी कहें।
जिस पर ज़ुल्म और अन्याय होगा उसके खिलाफ निष्पक्ष होकर लिखता रहूँगा चाहे वो कोई भी इंसान हो।

इंसान
Guest

राष्ट्रवादी विचार: पाठकों से मेरा विनम्र अनुरोध है कि श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व अधीन पहली बार भारत में सम्पूर्ण राष्ट्रवादी केन्द्रीय शासन के स्थापित होते राष्ट्र-विरोधी शक्तियों के प्रति सतर्क रहें| हाल में हुए निर्वाचनों में बुरी तरह विफल राष्ट्र-विरोधी तत्व फिर से सत्ता में आने के क्रूर उद्देश्य से उनके कुशासन से लाभान्वित मीडिया व सफेदपोश लोगों द्वारा अप्रासंगिक अथवा राष्ट्र-विरोधी लेखों में संशयी विचारों को प्रस्तुत कर सरलमति भारतीयों को पथभ्रष्ट कर रहे हैं| प्रस्तुत लेख में व्यर्थ ही वाद विवाद खड़ा कर लेखक भारतीयों में आशंका व अविश्वास पैदा करते दीखता है।

wpDiscuz