लेखक परिचय

शिवदेव आर्य

शिवदेव आर्य

आर्ष-ज्योतिः मासिक द्विभाषीय शोधपत्रिका के सम्पादक

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 ब्र. शिवदेव आर्य

इस आधुनिकता भरे भौतिकवादी युग की युवतियां पश्चिमी सभ्यता की मैली घिनौनी चादर ओड़कर सही गलत के निर्णय करने में विफल हो रही हैं। भौतिकवादी युग की फिल्मों की चकाचौंध भरी किरणे उनके चित्त पर इस प्रकार प्रस्तारित हो रही है जैसे डीजल में आग। प्यार ;सवअमद्ध शब्द उनमें जीवन की अमूल्य निधि है, एक डिग्री है, एक फैशन है, जिसको पाने के लिए प्रत्येक युवती में होड़ लगी हुई है। इसी डिग्री को पाने के लिए वो न तो कोई धर्म, चाल-चलन, रहन-सहन और उसका खान-पान कुछ भी नहीं देखती।

अद्यत्वे इसका फायदा मुसलमान उठा रहे हैं, सम्पूर्ण राष्ट्र पर इस्लाम का अधिपत्य स्थापित करना चाहते हैं, जिसकी पूर्ति के लिए मुस्लिम नवयुवकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। उनको मोबाईल चलाना, इन्टरनेट पर चैट करना, फैशन करना एवं युवतियों को अपनी ओर कैसे आकृष्ट करें इत्यादि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जैसे-कलावा बांधना, कड़ा पहनना, टीका लगाना, हिन्दू नाम रखकर युवतियों को आकृष्ट कर ऊॅंचे-ऊॅंचे स्वप्न दिखा प्यार के जाल में फंसा उन्हें भगा ले जाते हैं। बाद में उनके माता-पिता लड़की की खोज में दर-दर भटकते फिरते हैं, ज्ञात हो जाने पर कि मेरी लड़की किसी मुस्लमान युवक के साथ भागी है, उसके प्रति केस करते है, तब पुलिस अधिकारी लड़की के बालिग होने से हाथ झटक देते हैं पुनः माता-पिता इस बयान को बयां करते है कि लड़की को गुमराह किया है, भटकाया है इत्यादि। पुलिस कुछ प्रयास करके लड़के वा लड़की को कोर्ट में पेस करती है। वहां लड़की अपने बालिग होने का जिक्र करते हुए कहती है कि-हमारा संविधान हमें प्यार करने को अधिकार देती है। और मैं इसी युवक से शादी करुंगी। इस बयान पर कोर्ट उन्हें सम्मान पूर्वक छोड देता है। लव जिहाद का असली खेल तो अब शुरु होता है। जब कुछ दिन व्यतित हो जाते हैं तब लड़की से ऐसे कर्म करवायें जातें हैं जो इनके मजहब (इस्लाम) को फैलाने में मदद करे। जैसे-उस लड़की से तब तक बच्चे हो करो जब तक कि वो मर ना जाये। उसे बच्चे पैदा करने वाली मसीन समझ कर निरन्तर बच्चे पैदा करना जब लड़की के बच्चा पैदा न करने की स्थिति में उसको इस्लामी जिहादी बम के रूप में परिणित करके आतंकवादी संगठनों में शामिल कर लिया जाता है या लड़की को अरब एवं इस्लामी देशों में बेच दिया जाता है। और वहां उससे वेश्यावृती करवाई जाती है। इन लड़कियों को मदरसों में नौकरानी के कार्यों में लगा देना या उस लड़की को अन्य लड़कियों को लव जिहाद के जाल में फसाने में मदद लेना इत्यादि अनेकों ऐसे कृत्य जो मानवता के विपरित हो , ऐसे कुकृत्य करवायें जाते हैं।

इस लव जिहाद की अंधी दौड़ में कई हजार लड़कियां  ध्वस्त हो चुकी हैं और इस अग्नि में कुदने के लिए अनेक युवतियां तैयार हो रही है।  यदि समय रहते अपने को नहीं बचाया तो आपका सम्पूर्ण जीवन अन्धकारमय हो सकता है।

इस पापजन्य कृत्य से बचने के लिए लड़कियों को ही   ध्यान देने की आवश्यकता नहीं बल्कि माता-पिताओं को भी ध्यान देना होगा।

माता-पिता को अपनी बच्ची के साथ मित्रता का व्यवहार करना चाहिए। जब माता-पिता नौकरी-पेश में लगे हुए है तो उन्हे अपनी बच्ची की गतिविधियों पर विशेष ध्यान देना होगा। घर आते ही उसे समय दे, उसके बीते दिन के बारे में पूछे, उसकी स्कूल या कालेज अगर घर में इन्टरनेट  है तो उसकी पूरी गतिविधियां देखें।

बच्ची के मित्रों को सप्ताह या 15 दिनों में एक या दो बार जरुर मिले ताकि उसके मित्रों उसके बारे में पूर्ण जानकारी दे, सभी मित्रों की बातों को महत्व दे और अन्त में सभी दोस्तों के कथित वक्तव्यों को मिलान करें।

इस बात पर विशेष ध्यान  दे कि जब बच्चे टी.वी. देखते हो और उसमें यदि कोई प्यार के अंतरंग विषय पर चर्चा हो रही हो तो चैनल बदल दे या उस समय अपने बच्चों को किसी काम से टी.वी. से दूर रखें।

यदि मुश्लिम बहुल समाज में रहते है तो जहां तक वन सके बच्ची को घर से बाहर अकेले ना जाने दे अगर कुछ नहीं हो सकता तो कम-से-कम अपनी बच्ची को मुस्लिम लड़कों से दोस्ती ना करने दें।

समय रहते अपने बच्चों को बचा लें नहीं तो वो समय दूर नहीं जब आपका वा आपके बच्चे का जीवन अंधकारमय हो जायेगा।

 

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3 Comments on "लव जिहाद से ध्वस्त होता भारत"

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Sachin Tyagi
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लडकियों या बच्चो को स्कूल या कॉलेज तो भेजना ही होगा . अगर किसी मुस्लिम बहुल इलाके में स्कूल और कोलेज में भी शैतान मुसलमान लडके ही भरे हो , जिनका शौक या मकसद ही हो — हिन्दू लडकियों और लडको को बर्बाद करना ….. तो क्या किया जाये …..??

basant ary
Guest

u r ryte

saurabh sharma
Guest

sabse pahele hum ko jarurat h apne ghar me aisa mahol banane ki
ghar se suat karni chaye

Aap ka lekh bahut acha laga

Dhanvad samaj ko jagruk karne ke liye

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