लेखक परिचय

डॉ. प्रवीण तोगड़िया

डॉ. प्रवीण तोगड़िया

वैभवपूर्ण जीवन को भारतमाता के श्रीचरणों की सेवा में समर्पित करने वाले ख्‍यातलब्‍ध कैंसर सर्जन तथा विश्‍व हिंदू परिषद के अंतरराष्‍ट्रीय महामंत्री।

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-डॉ. प्रवीण तोगड़िया

गत कुछ वर्षों से भारत पर, भारत के तीर्थस्थानों पर इस्लामी आक्रामणकारियों द्वारा किये विकृत आक्रमणों का इतिहास दोहराने का घिनौना षड्यंत्र चल रहा है। वैसे तो भारत से इस्लामी आक्रमणकारियों की सत्ता भले चली गयी हो, लेकिन उनके पीछे छोड़े गए ‘मिनी बाबर’, ‘मिनी औरंगजेब’, ‘मिनी तुगलक’, ‘मिनी खिलजी’ आज ‘मिनी नहीं; ‘मेक्सी’ (विशाल) हुए हैं। हर गांव के, शहर के, गली-कूचों में मिनी-पाकिस्तान बन गए हैं और इनमें से बहुतांश मतों के राजनीतिक भिखारियों द्वारा बनाए हुए हैं। हर छोटे बड़े गांव के प्रवेश पर और हर मौके की जगह पर इनकी चमकती मस्जिदें, दमकते मदरसे बने हैं (फिर भी कहते हैं कि ये बेचारे गरीब हैं)।

अब तो यह हद हो गई कि हमारी पवित्र अयोध्या में इन आधुनिक बाबरों के लिए सरकार ने गरीब आवास में से 400 घर दिए हैं! कहां दिए हैं ? भगवान राम के जन्मस्थान में, जहां भगवान राम के मंदिर के तराशे हुए पाषाण रखे हैं। जो क्षेत्र अयोध्या परिक्रमा का अमूल्य हिस्सा है। अयोध्या की शास्त्रीय परिसीमा में ये 400 घर फैजाबाद के मुसलमानों को आज दिए गए हैं।

‘इतिहास भूल जाओ और भविष्य की ओर चलो’, कहनेवालों ने बाबर का घिनौना इतिहास दोहराया है। बाबर ने भगवान राम की जन्मस्थली पर बना भव्य मंदिर ही नहीं तोड़ा बल्कि वहां एक विकृत ढांचा बनाया और उसके बाद वह उस ढांचे को मस्जिद कहकर भगवान राम वहां थे ही नहीं, यहां तक कहने लगा। उसी स्थान पर आज उत्तर प्रदेश सरकार ने 400 घर फैजाबाद के मुसलमानों को गरीब आवास योजना में दिए हैं।

भगवान राम पर आज फिर से हुआ आधुनिक बाबर का यह आक्रमण नहीं तो और क्या कहा जायेगा ? मतों के लिए हिन्दुओं को गाली देनेवाले राजनीति वाले, मीडिया वाले, एनजीओ वाले बहुत देखे हैं भारत ने, आज उनसे भी आगे निकलकर स्वयं को आधुनिक बाबर जैसा पेश करने की यह हिन्दूद्रोही कलाकारी अयोध्या में हुई है।

पवित्र अयोध्या के साधु-संतों ने आन्दोलन छेड़ रखा है और भगवान राम की पवित्र नगरी में, पवित्र परिक्रमा मार्ग में मुसलमानों को 400 घर देने का यह विकृत ‘महत् कार्य’ भारत के हिन्दू यूं ही नहीं सहेंगे ना ! शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक ही सही, आन्दोलन तो छेड़ेंगे ना ! थोड़े में ही समझाता हूं कि जिस पवित्र अयोध्या की, भगवान् राम के जन्मस्थान की, अयोध्या की युगों से चली आयी परिक्रमा और अयोध्या का हिन्दुओं में श्रद्धा स्थान के नाते महत्व क्या, और ठीक उसी स्थान पर मुसलमानों को आज 400 घर देने का ‘जिहादी’ अर्थ क्या !

स्कन्द पुराण और गरुड़ पुराण में अयोध्या नगरी का उल्लेख ‘सिद्ध क्षेत्र’ ‘वल्लभ बैठक’ ऐसा आता है। ब्रह्म पुराण में कहा गया है :-

अयोध्या मथुरा माया, काशी कांची ह्यवंतिका।

एता: पुण्यतमा: प्रोक्ता: पुरीणामुतामोत्तमा:॥

कोशल देश की राजधानी ऐसा अयोध्या का महत्व वाल्मीकि रामायण में है। अयोध्या याने ‘अयुध्य याने ‘अजेय’- जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता। आज तक 4 लाख हिन्दुओं ने अयोध्या में भगवान राम के जन्मस्थान के लिए लड़कर अपने प्राण दिए और युगों-युगों तक अयोध्या में पूजा परिक्रमा चलती आयी। ऐसी अजेय अयोध्या में आज 400 घर आधुनिक बाबरों को क्यों ?

अयोध्या कोई 1 मंदिर, 2 मंदिर, अलग-अलग घाट ऐसा स्थान नहीं है, अयोध्या एक ‘संपूर्ण’ पवित्र स्थान है। वाल्मीकि रामायण में पवित्र अयोध्या की व्याप्ति 12 ग 3 योजन कही गयी है। जैन साहित्य में 12 ग 9 योजन है। चीनी प्रवासी ह्यू एन त्संग ने 4 मील से कई अधिक केवल अन्तर्गृही कही है। बगीचें, उपनगर जोड़कर प्राचीन भूगोल में कनिंगहेम ने अयोध्या का 12 कोस ऐसा वर्णन किया है और यह भी केवल अन्तर्नगर का भाग मानकर।

इसी क्षेत्र में मुसलमानों को 400 घर अब क्यों ? अयोध्या की स्थापना पृथ्वी के प्रथम राजा मनु ने की। अयोध्या नगरी में 8 चक्र थे और अयोध्या के 9 विशाल द्वार थे। ब्राह्मण ग्रन्थ में अयोध्या का वर्णन है- अयोध्या परिक्रमा के बाहरी हिस्से पर ऊंची दीवारें थीं जिनके द्वारों पर अयोध्या नगरी की सुरक्षा के लिए अश्म प्रक्षेपक यंत्र और अन्य अस्त्र लगे थे। अयोध्या में गगन को छूनेवाली अनेकों इमारतें थीं जिनमें घरों के ऊंचे सौंध और मंदिरों के सुवर्ण शिखर चमकते थे।

अयोध्या नगरी के सर्वदूर नगरी की अधिक सुरक्षा के लिए जल की चक्राकार खाइयां भी थीं। इक्ष्वाकु वंश के 65 राजाओं ने अयोध्या राजधानी बनाकर परिसर के गांवों से लेकर संपूर्ण कोशल देश पर राज किया, वह भी कैसे ? पराक्रमी चक्रवर्ती सम्राट मान्धाता द्वारा की हुई और अपने वंशजों के लिए रखी हुई प्रतिज्ञा के अनुसार कल्याणकारी राज किया- ‘मन्त्रश्रुत्यम चरामसि’ यानि शास्त्र के अनुसार व्यवहार रखूंगा! आज की अयोध्या में मतों का नया ‘जिहादी’ शास्त्र (शस्त्र) पैदा किया जा रहा है। इसी के अनुसार परिक्रमा मार्ग में मुसलमानों को नए सिरे से 400 घर!

महाभारत में अयोध्या को ‘पुण्यलक्षणा’ कहा गया है। महाभारत के षोडश राजकीय आख्यान में वर्णित 16 श्रेष्ठ राजाओं में अयोध्या सम्राट ही 6 हैं। वे हैं- मान्धाता, सगर, भगीरथ, अम्बरीश, दिलीप, खट्वांग और दशरथी राम! ह्यू एन त्संग ने जिस अयोध्या राज का क्षेत्रफल 1000 मील से अधिक कहा हो, जिस अयोध्या नगरी का उल्लेख समुद्रगुप्त से लेकर पुष्यमित्र शुंग (जिसने अयोध्या में 2 अश्वमेध किये!) अनेक प्राचीन शिलालेखों में हो, धनदेव, विशाखदत्ता इनके सिक्कों पर अयोध्या का उल्लेख हो, ऐसी अयोध्या में आज मुसलमानों को 400 नए घर क्यों ?

स्कन्द पुराण में अयोध्या के 53 तीर्थस्थानों का अति सुंदर और यथावत वर्णन है। स्कन्द पुराण में अयोध्या की 2 दिन की परिक्रमा दी है जो इस प्रकार है:- विष्णुहरी, स्वर्गद्वार, पापमोचनक, ऋणमोचनक, सहस्रधारा, चन्द्रहरी, धर्महरी, चक्रहरी, ब्रह्मकुण्ड, महाविद्या, स्वर्गद्वार, रुक्मिणी तीर्थ। युगों से अयोध्या की वृहद् परिक्रमा है- स्वर्गद्वार, सूर्यकुण्ड, जनौरा, निर्मल कुण्ड, गोप्रतार घाट, स्वर्गद्वार और लघु (अन्तर्वेदी) परिक्रमा है:- रामघाट, सीताकुण्ड, अग्निकुण्ड, विद्या कुण्ड, लक्ष्मण घाट, स्वर्गद्वार, राम घाट। इन्हीं परिक्रमाओं के पवित्र मार्ग पर आज अयोध्या में मुसलमानों को 400 नए घर क्यों ?

अयोध्या में अनेक पवित्र स्थान हैं- राम से जुड़ा कनक भवन, राम जन्मस्थान, चीरोदक (चीर सागर) जहां राजा दशरथ ने पुत्र कामेष्टि हवन किया, सीता रसोई, 24 अवतार, कोप भवन, रतन सिंहासन, आनंद भवन, रंग महल, साक्षी गोपाल, रतन मण्डप, जहां भगवान् राम का दरबार भरता था। स्वर्गद्वार जहां भगवान राम के दाह संस्कार हुए। गो प्रतार तीर्थ (गुप्तार घाट) जो अयोध्या का हिस्सा है और 9 मील पर है। सरयू नदी पर लक्ष्मण कुण्ड, राम राजवाड़ा जो हनुमान गढ़ी में है, सुग्रीव टीला, अंगद टीला, मत गजेन्द्र, तुलसी चौरा- जहाँ तुलसी रामायण का रचना स्थान है, जो कनक भवन के सामने आता है। घोषार्क कुण्ड जो राम घाट से 5 मील है, जिसका उल्लेख स्कन्द पुराण में आता है जो आधुनिक सूर्य कुण्ड है। सुवर्णखनी तीर्थ – जहां राजा रघु ने कौत्स ऋषि को सुवर्ण दान किया, जहां कुबेर ने सुवर्णवर्षा की। जनकौरा- जो जनक राजा का घर था, जो आज फैजाबाद-सुल्तानपुर रास्ते पर आता है (अयोध्या राज की व्याप्ति समझें?), दशरथ तीर्थ है जहां राजा दशरथ के दाह संस्कार हुए…, ऐसी अद्भुत, पवित्र और हिन्दुओं का युगों-युगों से श्रद्धास्थान अयोध्या में आज आधुनिक बाबरों को 400 घर क्यों?

काशी विश्वनाथ के दर्शन करने गए थे? कभी विशाल नंदी के पास खड़े रहकर उनकी नजर से काशी विश्वनाथ के मूल मंदिर को देखने का प्रयास किया? 2 मिनट भी आप उस विशाल नंदी के पास खड़े रहोगे तो वहां की पुलिस आपसे कहेगी – वहां से हटो, ‘मस्जिद’ की ओर ना देखो! हमारा पवित्र शिव मंदिर तोड़कर बांधा हुआ ढांचा है, जो काशी की पवित्र पंचकोशी परिक्रमा मार्ग पर बंधा है और हम हमारे नंदी के पास खड़े रहें तो भी सरकार को हमारी नजरों की दिशा की चिंता! फिर हमारी पवित्र अयोध्या में या अयोध्या की पवित्र परिक्रमा के मार्ग में जहां भगवान राम भव्य मंदिर के सुंदर पाषाण रखे हैं- वहां मुसलमानों को 400 घर क्यों ?

क्योंकि, अयोध्या में भव्य राम मंदिर हो, इसके जो घोर विरोधी हैं- याने जो हिन्दुओं के घोर विरोधी हैं- याने जो बाबर-औरंगजेब-खिलजी-तुगलक के साथ हैं – उन्होंने मतों के लिए ऐसे विकृत आक्रामकों के रास्ते पर चलकर आज फिर से मुसलमानों को जानबूझकर अयोध्या की पवित्र भूमि पर 400 घर दिए हैं।

हिन्दुओं, आगे आओ और मेरे मेरे ई-मेल drtogadiya@gmail.com पर सुझाव दो कि इस आधुनिक बाबरी कृति/विकृति का किस-किस प्रकार से हम सब मिलकर लोकतांत्रिक विरोध करें?

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19 Comments on "भगवान राम की अयोध्या पर फिर से आधुनिक बाबरों का आक्रमण?"

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satish
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सबसे पहले तो मैं आप सब से ये कहूँगा की कभी किसी शुद्र की आवाज़ भी तो सुनिए……मैं ब्राम्हणों के द्वारा मान्य वर्ण व्यवस्था का एक शुद्र हु और जाती का चमार हु पर ये शुद्र शब्द को नहीं मानता क्युकी ये वैदिक सभ्यता के लोगो द्वारा दिया गया नाम है…आपने लेख लिखा उसके लिए कोटि कोटि धन्यवाद पर अगर आप शुद्रो की आज के स्तिथि के बारे में जानना चाहती है तो आपको इतिहास के पीछे जाना पड़ेगा…..कभी भी वर्ण व्यस्था को बनाने का उद्देश्य कर्म के आधार पे नहीं था ,अगर इस व्यवस्था का प्रयोजन कर्म पे आधारित… Read more »
vinita raga
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श्रीमान लेखक महोदय और टिप्पणीकार गण लेख पढ़कर बड़ा आश्चर्य हुआ लेखन में एकपक्षीय तथ्य दिए गए हैं अन्य तथ्यों पर भी विचार हो तो अच्छा है + भारत में इतने महापुरुष होते हुए भी दलितों के साथ अशोभनीय व्यवहार होता आया क्यों? + आज तक हिन्दू धर्म में ब्राह्मणों के बिना कोई धार्मिक अनुष्ठान नहीं हो सकता क्यों? + ब्राह्मण और शुद्र जन्म से होता है कर्म से नहीं क्यों? + क्या राम लला का मंदिर बनने से दलितों की दशा में सुधार हो सकेगा? इतिहास वो है जो आज आप हम लिख देते हैं भले वो झूठ ही… Read more »
डॉ. राजेश कपूर
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डा तोगडिया जी की एक भी बात का तर्कसंगत उत्तर देते मैंने उदारता का नाटक करने वालों को आजतक नहीं देखा. उनका एक ही सुपरिचित तरीका होता है की विषय को भटकादों, बेतुके और अप्रासंगिक प्रश्न करके. कोई विवाद खड़ा करदो और मूल विषय-वास्तु पर चर्चा न होने दो. खैर फिर भी कुछ उठाये गए प्रश्नों का उत्तर इसलिए दे रहा हूँ क्योंकि यह भी एक सुअवसर है कि हम हिन्दू धर्म के बारे में महत्व पूर्ण जानकारी दें—————————– १. धर्म संसार में केवल एक है और वह है ‘सनातन धर्म’ जिसे आर्य और हिन्दू धर्म के नाम से भी… Read more »
डॉ. मधुसूदन
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एक कुतर्क शास्त्र (१) कुछ टिप्पणीकार, जब किसी प्रश्नका, सही और सच्चायी पर आधारित, तर्क शुद्ध उत्तर नहीं दे पाते, तो कुछ अन्य प्रश्न खडे कर देते हैं, जिस से सारी चर्चा की दिशा ही, बदल जाती है। (२) जो मूल-टिप्पणीकारको अभिप्रेत नहीं है, गौण बिंदू को आगे बढाकर, फिर उसी से “राइ का पहाड़ (वह भी हिमालय)” खडा करके, जाने निकले थे, पूरब में, अंतमें पश्चिम में पहुंच जाते हैं। (३) इस तकनिक से प्रवक्ता के बुद्धिमान टिप्पणीकारों को बचना चाहिए, प्रवक्ताको भी ऐसी हीन चर्चा से बचाना चाहिए, नहीं तो एक सही दिशामें बढता हुआ “प्रवक्ता”, बिके हुए… Read more »
श्रीराम तिवारी
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आदरणीय गहलोत जी आपने किस आधार पर समझ लिया की मेने aapki किसी टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया दी है .आप मेरी उस प्रतिक्रिया को चिन्हित करें की मेने कहाँ पर आपको उल्लेखित किया ;या आपके विचारों पर अनुकूल -प्रतिकूल टिप्पणी की . आपने मुझे तोगड़िया जी का अनुयाई समझ कर भयंकर भूल की है ;आप तोगड़िया जी के किसी भी आलेख पर मेरी टिप्पणी उनके अनुकूल कभी नहीं पायेंगे ; हाँ यह अवश्य है की में rss या आप जैसों की शब्दावली का प्रयोग करने में कृपण हूँ ;क्योंकि मुझे हमेशा यह विश्वास रहता है की सिर्फ समझदारी और सत्यार्थ… Read more »
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