लेखक परिचय

लिमटी खरे

लिमटी खरे

हमने मध्य प्रदेश के सिवनी जैसे छोटे जिले से निकलकर न जाने कितने शहरो की खाक छानने के बाद दिल्ली जैसे समंदर में गोते लगाने आरंभ किए हैं। हमने पत्रकारिता 1983 से आरंभ की, न जाने कितने पड़ाव देखने के उपरांत आज दिल्ली को अपना बसेरा बनाए हुए हैं। देश भर के न जाने कितने अखबारों, पत्रिकाओं, राजनेताओं की नौकरी करने के बाद अब फ्री लांसर पत्रकार के तौर पर जीवन यापन कर रहे हैं। हमारा अब तक का जीवन यायावर की भांति ही बीता है। पत्रकारिता को हमने पेशा बनाया है, किन्तु वर्तमान समय में पत्रकारिता के हालात पर रोना ही आता है। आज पत्रकारिता सेठ साहूकारों की लौंडी बनकर रह गई है। हमें इसे मुक्त कराना ही होगा, वरना आजाद हिन्दुस्तान में प्रजातंत्र का यह चौथा स्तंभ धराशायी होने में वक्त नहीं लगेगा. . . .

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भारत धर्मभीरू देश है, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। हिन्दुस्तान में हर धर्म, हर भाषा, हर संप्रादाय, हर पंथ के लोगों को आजादी के साथ रहने का हक है। भारत ही इकलौता देश होगा जहां मस्जिद, मंदिर, गुरूद्वारे, चर्च सभी की चारदीवारी एक दूसरे से लगी होती है। भारत में अनेक एसे संत पुरूष हुए हैं, जिनकी जात पात के बारे में आज भी लोगों को पता नहीं है, और ये सभी धर्मों के लोगों के द्वारा निर्विकार भाव से पूजे जाते हैं।

करोडों रूपए का चढावा आने वाले मंदिरों में सबसे उपर दक्षिण भारत में तिरूपति के निकट तिरूमला की पहाडियों पर विराजे भगवान बालजी जिन्हें तिरूपति बाला जी के नाम से जाना जाता है, सबसे आगे हैं। इसके बाद नंबर आता है उत्तर भारत में जम्मू के निकट त्रिकुटा पहाडी पर विराजीं मातारानी वेष्णव देवी का। इन दोनों ही के बाद महाराष्ट्र प्रदेश के अहमदनगर जिले के शिरडी गांव के फकीर साई बाबा के धाम का नाम लिया जाता है।

शिरडी की भूमि में अचानक आए साई बाबा ने जो चमत्कार दिखाए वे पौराणिक काल के नहीं थे, आज के युग में लोगों ने बाबा को देखा है, महसूस किया है, और आज भी बाबा के प्रति लोगों की अगाध श्रृध्दा का कारण उनका चमत्कारिक व्यक्तित्व ही कहा जा सकता है। जीवन भर जिस फकीर ने अपने बजाए मानव मात्र की चिंता की है, उसके नाम को आज व्यवसायिक चोला पहनाया जाना निस्संदेह निंदनीय है।

सत्तर के दशक के बाद मनोज कुमार कृत ”शिरडी वाले साई बाबा” चलचित्र और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की फिल्म ”अमर अकबर एंथोनी” में ऋषि कपूर का गाना ”शिरडी वाले साई बाबा, आया है दर पे तेरे सवाली. . .” ने धूम मचा दी। जिस तरह गुलशन कुमार के माता रानी के भजनों के बाद समूची देश त्रिकुटा पर्वत पर विराजी माता वेष्णव देवी का दीवाना हो गया था, ठीक उसी तरह बाबा के भक्तों की कतारें बढती ही गईं।

साई भक्तों की आस्था के केंद्र शिरडी का चर्चा में रहना पुराना शगल है। जब तक बाबा सशरीर थे, तब तक फर्जी नीम हकीम और ओझाओं द्वारा बाबा पर प्रश्नवाचक चिन्ह लगाकर इस स्थान को चर्चाओं का केंद्र बनाया और अब तो सोने के सिंहासन और करोडों के दान के चलते यह स्थान चर्चाओं का केंद्र बिन्दु बने बिना नहीं है। अब यह बाबा के व्हीआईपी दर्शन के चलते चर्चाओं में आ गया है।

साई बाबा संस्थान द्वारा लिए गए निर्णय कि काकड आरती के लिए पांच सौ रूपए तो धूप आरती के लिए ढाई सौ रूपए वसूले जाएंगे, साई भक्तों को जम नहीं रहा है। यद्यपि यह व्यवस्था वर्तमान में प्रयोग के तौर पर ही लागू की गई है, किन्तु तीन माह में ही बाबा के भक्तों के बीच इस व्यवस्था को लेकर रोष और असंतोष गहराने लगे तो बडी बात नहीं। किसी भी अराध्य के दर्शन के लिए अगर उसके अनुयायी को कीमत चुकानी पडे तो यह उसकी आस्था पर सीधा कुठाराघात ही कहा जाएगा।

हो सकता है कि बाहर से आने वाले लोगों की परेशानी को ध्यान में रख संस्थान ने यह व्यवस्था बनाना मुनासिब समझा होगा, किन्तु उत्तर भारत में माता रानी वेष्णव देवी के दर्शन के लिए आरंभ की गई हेलीकाप्टर सेवा का लाभ आम श्रृध्दालु उठाने की कतई नहीं सोचता है। वैसे भी माना जाता है कि अपने अराध्य के दर्शन जितने कष्ट के बाद होते हैं उतना ही पुण्य प्रताप भक्त को मिलता है।

शुल्क के बदले अराध्य के दर्शन की व्यवस्था माता वेष्णो देवी श्राईन बोर्ड ने आरंभ की थी, जिसमें दो सौ रूपए से एक हजार रूपए तक का मूल्य चुकाने पर विशेष दर्शन की व्यवस्था की गई थी। बाद में भक्तों के भारी विरोध के बाद इस व्यवस्था को श्राईन बोर्ड ने बंद कर दिया था। देश की राजधानी दिल्ली में साकेत में विशाल साई प्रज्ञा धाम चलाने वाले स्वामी प्रज्ञानंद का कहना एकदम तर्कसंगत है कि शिरडी के संत साई बाबा गरीबों के मसीहा थे और उनके दर्शन के लिए धन के आधार पर भेदभाव किसी भी सूरत में तर्क संगत नहीं ठहराया जा सकता है।

शिरडी के साई बाबा पर देश के करोडों लोगों की अगाध श्रृध्दा है। बाबा किस जात के थे, यह बात आज भी रहस्य ही है। बाबा जहां बैठते थे, उस स्थान को द्वारका मस्जिद कहा जाता है। सभी धर्मों के लोगों द्वारा साई बाबा के प्रति आदर का भाव है। यही कारण है कि साई बाबा संस्थान शिरडी के कोष में दिन दूगनी रात चौगनी बढोत्तरी होती जा रही है। कोई बाबा को सोने का सिंहासन तो कोई रत्न जडित मुकुट चढाने की बात करता है।

बाबा को समाधि लिए अभी सौ साल भी नहीं बीते हैं और विडम्बना ही कही जाएगी कि बाबा की इस प्रसिध्दि को भुनाने में धर्म के ठेकेदारों ने कोई कोर कसर नहीं रख छोडी है। आज देश भर में बाबा के नाम पर छोटे बडे अस्सी हजार से अधिक मंदिर अस्त्त्वि में आ चुके हैं। इनसे होने वाली आय किस मद में खर्च की जा रही है, इसका भी कोई लेखा जोखा नहीं है। साई के नाम पर लोगों को ठगने वालों की तादाद आज देश में तेजी से बढी है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है।

शिरडी का वह फकीर जो माया मोह से दूर था के समाधि लेने के बाद उनके मंदिर या समाधि स्थल को भव्य बनाना उनके भक्तों की भावनाएं प्रदर्शित करता है, जिसका सम्मान किया जाना चाहिए। इसके साथ ही साथ बाबा के भक्तों को यह भी सोचना चाहिए कि साई बाबा ने सदा ही मानवमात्र के कल्याण की बात सोची थी। बाबा के प्रति सही भक्ति अगर प्रदर्शित करना है तो संस्थान और उनके दानदाता भक्तों को चाहिए कि शिरडी में सोने के सिंहासन या रत्न जडित मुकुट आदि के बजाए एक भव्य सर्वसुविधायुक्त अस्पताल अवश्य बनवा दें जिसमें हर साध्य और असाध्य रोगों का इलाज एकदम निशुल्क हो, इससे बाबा की कीर्ति में चार चांद लग सकते हैं।

-लिमटी खरे

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14 Comments on "रोकना होगा साई बाबा के नाम का व्यवसायीकण"

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anita (aapka sardar)
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संत दिखे पर संत न देखा. जो सच है वोह समझाया नहीं जा सकता और जो है ही नहीं उसकी दुकान चल रही है. क्या होगा गुरूजी ! आप थे, अब भी है और हमेशा रहेंगे. मगर जरा सोचो प्रभु हम इंसान है और सब्राकी सीमा होती है कोई. सबका प्रणाम स्वीकार को मेरे मोनिबबा.

डॉ. राजेश कपूर
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सगीता पुरी जी ज़रा सावधान! ये हस्पताल का सुझाव अब दुबारा देने से पहसले ठीक से सोच- समझ लेना. नहीं जानती तो जान लें की इसराईल में चिकित्सकों ने गत दिनों हड़ताल कर दी जब हड़ताल समाप्त हुई तो पता चला की चाँद मॉस में ही मिरियु दर घाट कर २००% कम हो गयी. मुझे विश्वास है की आप लोगों की मृत्यु दर बढाने की कामना नहीं कर सकतीं. इस चकित्सा पध्जती के खतरों से अनजान होने के कारण ही अप ने ये खतरनाक सुझाव दे डाला है. आपको यह भी पता न होगा की अमेरिका में हर साल २,५०.०००… Read more »
anita (aapka sardar)
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गुरूजी, अपने गज़ेत्तेद को देखो. वोह हर वक़्त रोने की बातें करता है. मुझसे क्या आशा है आपको कब तक होगा यह सब. आप कब आओगे मोनिबबा. मेरे vishwas की laj rakhna. हर baat ka ख्याल रखना. आप की सदा जय हो गुरूजी.

anita (aapka sardar)
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इंसान के बस में कुत्छ नहीं. सब कुत्छ भगवान् को करना पड़ता है और वोह ही करेगा अपना काम. जिसका कोई नहीं होता उसका भी कोई तोह होता ही हगा. क्यों गुरूजी!

anita (aapka sardar)
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रेमेम्बेरिंग ओउर गुरूजी श्री मोनिबबजी एवेरी मोमेंट वे अरे अन्क्षिऔस्ल्य वेटिंग सोमेथिंग गुड तो हपपें. आप कब दर्शन दोगे प्रभु अब जल्दी करो आ जाओ मोनिबबा मेरे साईं nath

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