मेरे सपनों का बिहार, मेरे अपनों का बिहार

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-फख़रे आलम- मैंने कभी भी बिहार को इतना खुशहाल, सम्पन्न नहीं देखा, जितना प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास बिहार को आर्थिक प्रशासनिक और संस्कृति रूप से ध्नी और सम्पन्न दिखाता है। कभी कभी मुझे इतिहास पर शक और सुभा होने लगता है के आखिरकार हमारा प्रदेश कब आत्मनिर्भर, सम्पन्न और खुशहाल बनेगा, आखिरकार प्रदेश का चौमुखी… Read more »