किसकी आवाज़ बिकाऊ नहीं यहां

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-अंशु शरण- 1.  अवसरवाद लोकतन्त्र स्थापना के लिए वो हमेशा से ऐसे लड़ें, कि उखड़े न पाये सामंतवाद की जड़ें, इसलिए तो लोकतंत्र के हर स्तम्भ पर पूंजी के आदमी किये हैं खड़े। किसकी आवाज़ बिकाऊ नहीं यहाँ, संसद से लेकर अख़बार तक, हर जगह दलाल हैं भरे पड़े। तो हम क्यों ना जाये बाहर,… Read more »

तुम्हारा नाम क्या है ?

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-बीनू भटनागर- पिछले दो अंकों मे मैंने घर का नाम जिसे पैट नेम या निक नेम कहते हैं, उसकी चर्चा नहीं की थी तो आज यहीं से आरंभ करते हैं। बच्चे के पैदा होते ही अगर पहले से नाम न सोचा हो तो लोग उसे मुन्ना-मुन्नी, गुड्डु-गुड़िया या बंटी-बबली जैसे नामो से पुकारने लगते हैं,… Read more »