लेखक परिचय

प्रतिमा शुक्ला

प्रतिमा शुक्ला

मूलत: लखनऊ से हूं। पत्रकारिता जगत में कार्यरत हूं। कविताएं, जनसरोकार के विषयों पर महिला और बाल कल्याण पर स्वतंत्र लेखन कार्य पिछले कई वर्षों से कर रही हूं। वर्तमान कार्यक्षेत्र नई दिल्ली हैं।

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-प्रतिमा शुक्ला-

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5 सितंबर को एक बार फिर महान शिक्षाविद् एवं दार्शनिक भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद करेंगे। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जीवन सभी शिक्षकों के लिए प्रेरणा स्त्रोत है। डॉ. सर्वपल्लवी राधाकृष्णन जी की मान्यता थी कि यदि सही तरीके से शिक्षा दी जाय़े तो समाज की अनेक बुराइयों को मिटाया जा सकता है।

आज के दिन का स्कूली बच्चों में बड़ा उत्साह रहता है कि कैसे क्या करे कि अपने अध्यापक को खुश कर सके। स्कूलों में भी रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन कर बच्चों का उत्साह बढ़ाया जाता है।

हालाकि अब आज के परिवेश में गुरू और शिष्य दोनों की ही भूमिकाए बदल चुकी है। अब न वो पहले जैसे गुरू रहे जिनका सम्मान होता है और न वो पहले जैसे शिष्य की गुरूओं का आदर सम्मान करे। आजकल कई ऐसी आपराधिक खबरें आ जाती है जो गुरू और शिष्य के रिश्ते को अपमानित और कलंकित करती है। जिस तरह शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है वैसे ही शिक्ष का स्तर भी गिर रहा है। आज शिक्षा को गरीब व आम छात्रों के लिए सुलभ और उसको रोजगार परक बनाने के लिए शिक्षा का राष्ट्रीयकरण किया जाना जरूरी है। इसी संदर्भ में यह आवश्यक है कि शिक्षा पर जीडीपी का 6 प्रतिशत या उससे अधिक खर्च करते हुए निजी शिक्षण संस्थाओं का राष्ट्रीयकरण कर सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के बच्चों को सरकारी एवं अनुदानित स्कुलों में ही पढ़ाने का कानुन बनाया जाना आवश्यक है, जिससे इन विद्यालयों में शिक्षा का स्तर ऊंचा उठ सके, क्योंकि शिक्षा के निजीकरण के परिणामस्वरुप शिक्षा बेहद मंहगी हो गयी है और उसमें व्याप्त भारी भ्रष्टाचार के चलते उसकी गुणवता में भी भारी गिरावट आ गई है जिसका सीधा खामियाजा गरीब और आम समाज से आये विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। कहीं न कहीं आज के शिक्षक भी लोभी और भारी भ्रष्टाचार में लिप्त है।

शिक्षक अपने विद्यार्थियों को अनुशासनप्रिय बनाने एवं उनमें नैतिक मूल्यों के गुण रोपित करने, उदारता, सहयोग और सही साध्य एवं साधन को अपनाने की प्रेरणा देते हैं और विद्यार्थियों में छुपी प्रतिभा का विकास करते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में आ रही नई चुनौतियों के कारण शिक्षकों का दायित्व और भी बढ़ गया है।

सभी शिक्षकों को सत् सत् नमन –

ज्ञानी के मुख से झरे, सदा ज्ञान की बात।

हर एक पांखुङी फूल, खुशबु की सौगात।।

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1 Comment on "शिक्षकों को याद करने का दिन आया"

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Dr. Ashok Kumar Tiwari
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Dr. Ashok Kumar Tiwari
मोदी के गुजरात में स्थित तथा उनके परम मित्र मुकेश अम्बानी की कम्पनी रिलायंस में शिक्षक-शिक्षिकाओं तथा उनके पूरे परिवार के साथ अमानवीय बर्ताव होता है फिर उन्हें शिक्षक दिवस पर बोलने का क्या नैतिक अधिकार है ? ? ? “सबके मन को भाती हिंदी ” पर गुजरात के रिलायंस कम्पनी को हिंदी नहीं भाई और 14 सितम्बर 2010 को के.डी.अम्बानी विद्या मंदिर रिलायंस जामनगर ( गुजरात ) के प्रिंसिपल एस. सुंदरम ने सभी बच्चों और स्टाफ के सामने प्रात:कालीन सभा में माइक पर एनाउंस किया ” हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं हिंदी टीचर्स आपको गलत बताते हैं” उनके पाकिस्तानी बॉर्डर पर… Read more »
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