लेखक परिचय

डॉ. राजेश कपूर

डॉ. राजेश कपूर

लेखक पारम्‍परिक चिकित्‍सक हैं और समसामयिक मुद्दों पर टिप्‍पणी करते रहते हैं। अनेक असाध्य रोगों के सरल स्वदेशी समाधान, अनेक जड़ी-बूटियों पर शोध और प्रयोग, प्रान्त व राष्ट्रिय स्तर पर पत्र पठन-प्रकाशन व वार्ताएं (आयुर्वेद और जैविक खेती), आपात काल में नौ मास की जेल यात्रा, 'गवाक्ष भारती' मासिक का सम्पादन-प्रकाशन, आजकल स्वाध्याय व लेखनएवं चिकित्सालय का संचालन. रूचि के विशेष विषय: पारंपरिक चिकित्सा, जैविक खेती, हमारा सही गौरवशाली अतीत, भारत विरोधी छद्म आक्रमण.

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अमेरिकन नहीं, भारतीय एच डी एल

-डॉ. राजेश कपूर

समाचारों के अनुसार अमेरिका के एक विश्वविद्यालय के खोजियों ने दावा किया है कि उन्होंने स्वर्ण के प्रयोग से ‘एच डी एल’ का निर्माण कर दिया है। सोने के नैनो कणों से बना यह ”सिन्थैटिक एच डी एल” कोलेस्ट्रॉल के बुरे प्रभावों को रोकने का काम करता है। कोलेस्टॉल के कारण बढ़ा एल डी एल हृदय के लिये घातक सिद्ध होता है जबकि ‘एच डी एल’ उसके बुरे प्रभावों को समाप्त करने में कारगर सिद्ध होता हैं। तले पदार्थों का स्वाद लेने से वंचित हृदय रोगीं भी तला-भुना इस नए एच डी एल की मद्द से खा सकेंगे।

भारतीय समाधान

नि:सन्देह नार्थ वेस्ट्रन विश्व विद्यालय की खोजी यह दवा शायद लाखों रुपये मूल्य की होगी, बार-बार खरीदनी पड़ेगी। पर इसका भारतीय समाधान अत्यंत सरल और सस्ता है। एक पतीली में आधा लिटर पानी में एक शुध्द सोने की जंजीर, सिक्का या कोई गहना जो नग, रंग रहित हाक डालकर इतना पकाएं कि वह पानी आधा रह जाए। बस आपका नैनों स्वर्ण तैयार है। गहना निकाल कर पानी को किसी कांच के पात्र में रखें ठण्डा होने दें। दिन भर में 2-3 बार इसे पी जाए। आपका कोलेस्टॉल काबू में आ जायेगा। खर्च होगा एक साल में आधा ग्राम स्वर्ण यानि केवल 1000 रु. यानि रोज का तीन रु. से भी कम खर्च और हृदय रोग से दूर। एच डी एल लगभग मुफ्त में मिल जाएगा।

गौघृत का कमाल

अनेक खोजों द्वारा प्रमाणित हो चुका हैं कि गौघृत से हृदय रोग नहीं होता। इसका एक कारण है उसमें पाए जाने वाला स्वर्ण अंश। केवल भारतीय गौवंश की रीड़ में सूर्यकेतु नाड़ी होती है जो सूर्य से स्वर्ण के अंश प्राप्त या पैदा करती है । शायद तभी वह कोलेस्ट्रॉल को नहीं बढ़ाता। गौमूत्र में भी स्वर्ण के अंश पाए गए हैं।

स्वर्ण और गौमूत्र का कमाल

अमेरिका ने स्वर्ण के अणुओं के कोलेस्ट्रॉल पर प्रभाव का अध्ययन करके कोई बहुत बड़ा कमाल नहीं किया। भारत में आज भी दर्जनों दवाएं स्वर्ण युक्त बनती है। स्वर्ण रहित दवा अल्प प्रभावी होती है और स्वर्ण युक्त होने पर अत्याधिक प्रभावी हो जाती है। स्वर्ण के इस गुण को भारतीय आचार्यों ने कई हजार वर्ष पहले ही जान कर प्रयोग करना शुरू कर दिया था। अमेरिका केवल कोलेस्ट्रॉल पर स्वर्ण के प्रभावों तक ही पहुंचा है।

गौमूत्र की भावना होकर बने आयुर्वेदिक योगों में भी स्वर्ण जैसे गुण आ जाते हैं। गौमूत्र में पाए जाने वाले अनेक उपयोगी पदार्थों के इलावा उसमें स्वर्ण भी होता है। गौमूत्र के अनेक गुणों का कारण उसमें पाया गया यह सोना भी हैं।

मर्दन से गुण संवर्धन यानि नैनों अणु प्रयोग

नैनों अणुओं में स्वर्ण को तोड़कर उसका प्रयोग भारत के लिये कोई नई खोज नहीं। स्पष्ट वर्णन हैं ”मर्दनम् गुण वर्धनम्” अर्थात घोटने-पीसने से गुण बढ़ते हैं। स्वर्ण वर्क बनाना, उन्हें घण्टों पीसना, स्वर्ण भस्म बनाना आदि सब नैनो टैक्नोलॉजी ही तो हैं। अन्तर केवल इतना हैं कि पश्चिमी ने इस विज्ञान को नया नाम दे दिया, हमने बहुत कुछ भुला दिया।

निष्कर्ष :- स्वर्ण का प्रयोग सूक्ष्म मात्राओं में करने से हानिकारक कोलेस्ट्राल (LDL)का प्रभाव घटता हैं और लाभदायक  (HDL) का प्रभाव बढ़ता है। अत: सोना पहना, उसे उबालकर पीना, स्वर्ण भस्म, वर्क आदि का प्रयोग उपयोगी है।

भारतीय गौवंश के घी, दूध का हर सम्भव प्रयोग करें। हो सके तो गौमूत्र का प्रयोग भी रोज एक बार करें।

सन्दर्भ : जनरल ऑफ अमेरिका कैमिकल सोसाईटी में अमेरिकन शोध की रपट।

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11 Comments on "हृदय रोगों का हिन्दुस्तानी समाधान"

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nand kishor somani
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bahut hi sunsder jankari dene wala lekh

डॉ. राजेश कपूर
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एक नवीन जानकारी इसी विषय पर पाठकों से सांझी करनी है. ज्ञान तो पुराना है पर मेरे द्वारा यहाँ प्रस्तुति पहली है. यदि पुनर्नवा के पंचांग का चूर्ण २-३ चम्मच की मात्रा में हर रोज़ पानी या गो के दूध से (चीनी का प्रयोग न करें) प्रातः काल लेते रहें तो आश्चर्य जनक परिणाम मिलेंगे. आर्टरी-ब्लोकेज समाप्त हो जायेगी और आपरेशन की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.तीन माह तक इस प्रयोग को करना प्रयाप्त होगा, अधिक समय तक प्रयोग करने से भी हनी कोई नहीं, लाभ ही होगा. ह्रदय के इलावा गुर्दे, लीवर आदि भी स्वस्थ हो जायेंगे. पुनर्नवा पंचांग ६ मॉस… Read more »
kalpana
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आपका लेख मुझे बहुत अछा लगा .
धन्यवाद

डॉ. राजेश कपूर
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डा. सिन्हा जी ये बात तो सही है की बाज़ार में मिलने वाले स्वर्ण योग हो सकता है की बहुत विश्वस्त न हों. हम स्वरण भस्में खरीदते ही नहीं. स्वर्ण वर्क लेकर उनकी घुटाई शुगर ऑफ़ मिल्क में कर लेते हैं. खांड या शक्कर में भी की जा सकती है. इसके इलावा स्वर्ण को पानी में रात भर भिगो कर भी प्रयोग किया जा सकता है. – हमारे गाँव में आज भी एक प्रयोग प्रचलित है. जब घीया, तोरी आदि के फूल गलने-झड़ने लगते हैं तो रात को पानी में थोड़ा गंगाजल, सोना व गोमूत्र दाल कर रख देते हैं.… Read more »
vijayprakash
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हम भारतीय स्वर्ण का उपयोग युगों-युगों से कर रहे हैं.इसका महत्व और लाभ क्या हैं इस बारे में नई बातें पता चली. स्वर्ण के बारे में इतना कुछ बताने के लिये धन्यवाद

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