लेखक परिचय

दानसिंह देवांगन

दानसिंह देवांगन

बीएससी गणित, एमएम भाषा विज्ञान में गोल्ड मेडेलिस्ट और बीजेएमसी तक आपकी शिक्षा हुई है। विगत दस सालों से पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं। जनसत्ता, दैनिक भास्कर, देशबंधु, नवभारत और जनमत टीवी से काफी समय तक जुड़े रहे। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद पर बेबाकी से राय देने के लिए जाने जाते हैं। संप्रति आप दैनिक स्वदेश, रायपुर के संपादक हैं।

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कहलाते हैं शांति के दूत और वकालत करते हैं तोप से उड़ाने की

-दानसिंह देवांगन

स्वामी अग्निवेश जी प्रखर गांधीवादी, अमन व शांति के दूत और न जाने क्या-क्या तमगा लिए देशभर में घूमते हैं, पर पिछले दिनों आईबीएन-7 में प्रसारित मुद्दा कार्यक्रम में उनका असली गांधीवाद (गुप्त एजेंडा) सामने निकलकर आ ही गया। उस कार्यक्रम में उन्होंने खुलेआम कहा कि आजादी की 63वीं वर्षगांठ पर लालकिला में प्रधानमंत्री को भाषण देने केबजाए देश के सबसे भ्रष्ट 63 नेता, अफसर, व्यापारी को तोप के मुंह पर बांधकर उड़ा देना चाहिए। जिस दिन ये होगा देश में नक्सलवाद समाप्त हो जाएगा। इससे पहले रायपुर में नक्सलवाद पर आयोजित एक सेमीनार में भी उन्होंने पत्रकारों से सीधी चुनौती देते हुए कहा था कि आप नक्सलवाद का समर्थन करिए, अन्यथा आज एक पत्रकार मारा गया है कल आप भी मारे जाएंगे। इस मुद्दे पर जमकर बवाल भी मचा था।

इन दोनों ही कार्यक्रम में उन्होंने गांधीवाद का जमकर ढिंढोरा पीटा। कहा कि मैं गांधीवादी तरीके से नक्सलवाद का हल निकालना चाहता हूं। न पुलिस की हिंसा सही है और न ही नक्सलवाद की। देश में किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं होनी चाहिए। इस लिहाज से दुनिया के सबसे अहिंसक व्यक्ति से आज मैं श्रद्धा और विनम्रता से पूछना चाहता हूं कि माना कि भ्रष्ट नेता, अफसर और व्यापारियों को सजा मिलनी चाहिए, लेकिन ये कौन सा गांधीवाद है जो ये सिखाता है कि लोकतंत्र और कानून की खुलेआम धाियां उड़ाते हुए आप लोगों को तोप से उड़ाने की सलाह दें। भ्रष्ट नेता और अफसरों को सजा मिले, ये हम भी चाहते हैं लेकिन तोप से बांधकर नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से। आजादी के आंदोलन में गांधी जी समेत लाखों देशवासियों पर अंग्रेजों ने न जाने कितने ही जुल्म ढहाए, बावजूद इसके उन्होंने कभी भी अंग्रेजों को तोप से बांधकर उड़ाने की वकालत नहीं की। फिर आप कौन से गांधीवाद की बात करते हैं स्वामी अग्निवेश जी? तोप और बंदूक से देश में क्रांति लाने का समर्थन तो सिर्फ नक्सलवादी करते हैं। तो क्या आप भी नक्सलवादी हैं, ये मान लें। या अब भी आप गांधीवाद के नाम पर देशवासियों को गुमराह करते रहेंगे।

मुझे लगता है कि स्वामी जी कन्फयूड हैं। वे नक्सलवाद को तो मानते हैं, लेकिन गांधीवाद का चोला पहनकर देशभर में अपने आप को पाक-साफ रखना भी चाहते हैं। पर जनता अब सब समझ चुकी है स्वामी जी। पहले आप यह तय करें किआपकी विचारधारा कौन सी है? फिर आप देश की जनता के सामने आएं तो बेहतर होगा। यहां मैं फिर दोहराना चाहता हूं कि हमें आपके गांधीवादी होने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन गांधीवादी होने का ढोंग रचकर फासीवादी तरीके से समस्या का हल निकालने की वकालत करने पर हमें ऐतराज है।

वे इन कार्यक्रमों में एक बात और कहते हैं कि आजाद को पुलिस ने गलत तरीके से मारा है। उनका आरोप है कि आजाद को फर्जी एनकाउंटर से मारा गया। इसलिए भारत सरकार उसकी जांच करे। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि पिछले तीन दशकों में नक्सलियों ने हजारों पुलिसवालों को मुठभेड़ में मारा। न सिर्फ मारा, बल्कि उनके शवों को बेदर्दी से काट भी डाला। पुलिस को मारा वहां तक ठीक है, लेकिन उनके शवों ने उनका क्या बिगाड़ा था जो मानवीयता की सारी हदें पार कर उन निर्जीव पड़े शवों के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। ऐसे देशद्रोहियों को मुठभेड़ में मारा हो या फर्जी मुठभेड़ में, स्वामी जी को उनसे इतनी हमदर्दी क्यों। यानि वे हमारे जवानों की शवों के साथ नंगा नाच करे और हमें उन्हें मारने का हक भी नहीं है। पुलिस के जवान नक्सली के नाम पर किसी बेकसूर को मारते तो हम मान सकते थे कि इसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन जब नक्सली समेत आप स्वयं यह मान रहे हैं कि आजाद हार्डकोर नक्सली ही था, फिर उसे मारने में कैसा अफसोस अग्निवेश जी?

आखिर में आपसे सीधा और सरल सवाल है कि आप कौन हैं? पहले आप स्वयं तय करिए। यदि गांधीवादी हैं तो कृपा करके लोगों को तोप से मारने की वकालत कर गांधीजी पर तमाचा मर मारिए और यदि नक्सल समर्थक हैं तो फिर उसी तरीके से सरकार से लड़िए। उसके लिए गांधीवाद का चोला ओड़ने की क्या जरूरत है?

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26 Comments on "ये कैसा गांधीवाद है स्वामी अग्निवेशजी"

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डॉ. राजेश कपूर
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दान सिंह जी का यह लेख स्वामी अग्निवेश जी की असलियत उजागर करने वाला है. वे अनेकों बार अपने दोगले चरित्र का परिचय दे चुके हैं. पर नक्सलियों के बारे में ज़रा गहराई से विचार करने की ज़रूरत है. काश्मिरी आतंकवादी और नक्सली आन्दोलन एक तराजू पर रख कर तोलना उचित नहीं होगा. ज़रा निम्न बिन्दुओं पर ध्यान दें—- – काशमीरी आतंकवादी तो विश्व भर में फैले जिहादी आतंकवाद का एक अभिन्न हिस्सा हैं. – आर्थिक रूप से वे भारत के किसी भी प्रदेश से अधिक समृद्ध हैं. अतः उनके आतंकवाद को आर्थिक कारणों से जोड़ना शरारत पूर्ण प्रयास है… Read more »
manoj shrma
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आदरणीय दान सिंग जी मै तो इस बात से हैरान हु की कुछ लोग दबे स्वर में देश विरोधी गतिविधियों में जी जान से लगे रहते है ऐसे कपट रूपी ध्रीतरासट यदि आपसे आलिंगन करना चाहे तो आपको लोहे का पुतला आगे बढ़ाना चाहिए मेरे कहने का मतलब है की स्वामी अग्निवेश जी तो कम से कम अपनी भावनाओ को पब्लिक में ला रहे है हमारे रास्त्र के लगभग सभी राज्य के नेता नक्सलियों से बात करना चाहता है ऐसे में यदि स्वामी जी प्रयास रत है तो आपको बुरा क्यों लग रहा है यदि आप स्वामी जी के विरोधी… Read more »
दानसिंह देवांगन
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manoj ji aapne achchha sawal uthaya hai. apne hamari bhumika puchhee hai to suniye- vo 4 jawan ham mediakarmiyo ki wajah se hi naxaliyo se chhut payen hai. jaha tak swamiji ki alochna ka sawal hai, mai unke kaamkaaj ki aalochna nahi kar raha hu. mai to sirf unke kahe gaye sabdo ko pirokar aapke samane rakha raha hu. ye aalochna hai to ye aap unki aalochna kar rahe hai mai nahi. aur yadi taarif hai to bhi aap kar rahe hain mai nahi. so mujhe lagata hai aapko ek baar bhir se aarticle padne ki jarurat hai. fir mujhe… Read more »
Anil Sehgal
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Swami Agnivesh is from Arya Samaj. His Holiness is an activist and gets associated with issues that arise from time to time. He has no political or social organization or other regular business. Swami Ramdev, also from Arya Samaj, has brought revolution in spread of Yoga and Ayurved. I think Swami Agnivesh also has the right to get associated with different issues and leaders (like Mamta Banerjee) requiring him. Swami Agnivesh has great abilities which are not being used by Arya Samaj. Swami Agnivesh has been working on ad hoc basis jumping from issue to issue for decades.
डॉ. महेश सिन्‍हा
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नक्सलियों ने तो सबको जाहिर कर दिया है की कौन उनके खैरख़्वाह हैं। इस अब आतंकवाद, भ्रष्टाचार इत्यादि का कारण यही है की हमारी बनाई हुई कानून और राज्य व्यवस्था उचित परिणाम देने में सक्षम नहीं है , फेल हो गयी है.

श्रीराम तिवारी
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विनाशकाले विपरीत बुद्धि स्वामी जी को याद रखना चाहिए – ‘संतन को का सीकरी सों काम ‘ उनका इस तरह का आचरण की गुड खाएं ;गुलगुलों से परहेज ;अफसोसजनक ही है .अरुंधती रॉय .महाश्व्ता देवी .;मेघा पाटकर और कतिपय एन जीओ का इस पूंजीवादी साम्राजवादी -नव उदारवादी दौर में ;शोषक वर्ग के साथ खड़े होना कोई अनहोनी नहीं है .नक्सलवाद हो या ममता का पाखंडपूर्ण नाटकीय चरित्र .ये सभी chhadmbuddhijeevi desh को sankat में daalne का काम karte rahte hain .

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