लेखक परिचय

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

वामपंथी चिंतक। कलकत्‍ता वि‍श्‍ववि‍द्यालय के हि‍न्‍दी वि‍भाग में प्रोफेसर। मीडि‍या और साहि‍त्‍यालोचना का वि‍शेष अध्‍ययन।

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-जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

तमिलनाडु राज्य के किशनगिरी से करीब 15 किलोमीटर दूर इत्तीग्राम में एक हरिजन बस्ती है। इस बस्ती में रहने वाले दलितों को मुख्यमार्ग से काटकर कांटे के तारों से इलाके को हिन्दुओं ने घेर दिया है। यह माना जा रहा है इस कांटे की बाढ़ को गांव प्रधान के इशारों पर कुछ स्थानीय दलित विरोधी लोगों ने लगाया है। यह खबर दैनिक अखबार ‘हिन्दू’ (15 अक्टूबर 2010) में छपी है। यह दलितों के स्वाभिमान, स्वतंत्रता और अस्मिता पर सीधा हमला है। इस घटना की सूचना मिलते ही भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के विधायक एस.के.महेन्द्नन ने मौके पर जाकर का मुआयना किया और स्थानीय प्रशासन से कहा है कि एक सप्ताह के अंदर दलित बस्ती के चारों ओर लगाई गई कांटों की बाढ़ को यदि नहीं हटाया गया तो माकपा के कैडर सीधे कार्रवाई करने के लिए बाध्य होंगे।

हम इस इलाके के दलितों से यही कहना चाहते हैं कि वे स्वयं प्रतिवाद करें,बाहर आएं और कांटेदार बाढ़ को उखाड़ फेकें। यह कांटे की बाढ़ नहीं है बल्कि दलित गुलामी के अवशेष का प्रतीक है। हमें यदि सुंदर और आधुनिक भारत बनाना है तो हमें सभी किस्म के सांस्कृतिक गुलामी के रूपों को नष्ट करना होगा। आधुनिक भारत के निर्माण में जाति गुलामी आज भी सबसे बड़ी बाधा है। जाति गुलामी के कारण हम किसी किस्म की आजादी, आधुनिकता और नागरिक स्वतंत्रताओं का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। जाति गुलामी भारत का सबसे बड़ा कलंक है। इससे भारत को जितनी जल्दी मुक्ति मिले उतना ही जल्दी भारत का उपकार होगा।

इस प्रसंग में यह सवाल उठता है कि आखिरकार आजादी के 60 साल बाद भी हमारे देश में शूद्रों के साथ दुर्व्यवहार क्यों किया जाता है? क्या वजह है कि कहीं पर भी हरिजनों को जाति उत्पीड़न का सबसे ज्यादा सामना करना पड़ता है ? कहने के लिए कांग्रेस यह दावा करती है कि वह दलितों की चैम्पियन है,मायावती भी चैम्पियन हैं और भी दल चैम्पियन होने का दावा करते हैं, इसके बावजूद हरिजनों की उपेक्षा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।

इस प्रसंग में मैं आम्बेडकर के एक सुझाव को संशोधन के साथ पेश करना चाहता हूँ। प्रत्येक राजनीतिक दल अपने सदस्य को एक दलित बच्चे को पढ़ाने का दायित्व सौंपे। कम से कम सप्ताह में एकबार वह अपने यहां एक दलित को चाय-पानी पर बुलाए,दलित के बच्चे को विद्यार्थी की तरह पढ़ाए। किसी अस्पृश्य को अपने यहां काम पर रख लें और उससे मानवीय व्यवहार करें। जो व्यक्ति ऐसा करे उसे ही कांग्रेस, भाजपा, कम्युनिस्ट पार्टी, डीएमके, अन्नाडीएमके, टीएमसी, जदयू आदि दलों की सदस्यता दी जाएगी। राजनीतिक दल की सदस्यता को अछूतोद्धार के साथ जोड़ने से सामाजिक असंतुलन दूर करने में मदद मिलेगी।

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27 Comments on "गुलामी का कलंकित रूपः हम क्या करें ?"

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डॉ. मधुसूदन
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Er. Diwas Dinesh Goud जी। विशेषतः आपकी आखरी टिप्पणी पढकर मैं यह लिखने के लिए उद्युक्त हुआ। आपकी टिप्पणी बहुत प्रमाण में प्रेमादरयुक्त, संतुलित, और तर्क सम्मत प्रतीत होती है। वाद या विवाद, नहीं पर संवाद प्रस्थापित करने के लिए प्रेरक प्रतीत होती है। साधुवाद।वाद या विवाद हार जीत के लिए माना जाता है। संवाद सकारात्मक सुलझाव ढूंढने के लिए होता है। हम संवाद करें। वाद विवाद नहीं।बिनती: आप समयानुकूलता से लिखते रहें। आदरणीय, डॉ. कपूर जी ने आपके लिए कहे हुए शब्दोंसे भी मैं सहमत हूं। शत्रुता ना जगाते हुए ही संवाद, संवादिता (समन्वय) और सुलझाव, लाता है। कडवाहट… Read more »
डॉ. राजेश कपूर
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दिनश गौड़ जी आप में देशभक्ती की भावना, प्रतिभा और विश्लेषण की क्षमता है, निरंतरता बनाए रखें.
– स्मरणीय है कि गीदारों की भीड़ होती है, शेर विरले ही होते हैं. काम वासना के दास करोड़ों हैं, वासना को जीत कर महान बनने वाले विरले होते हैं. कुछ ख़ास बनने के लिए ख़ास प्रयास करने पड़ते हैं. भारत महान वासना की नाली के कीटों के कारण नहीं, संयम, साधना करने वालों के कारण बना और आज भी ऐसे लोगों के कारण ही महान बनेगा. ये तो अपनी-अपनी पसंद है कि गीदड़ किसे और शेर किसे बनना है. मेरी शुभकामनाएं!

दिवस दिनेश गौड़
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aadarniiy gahlot ji maine aapke usi सवाल का जवाब दिया है, किन्तु जब तक mujhe aisi koi ghatna aap nahi bataaenge, mujhe pata nahi chalega| mai maanta hoon ki kuchh log jaati gat roop se chhuachhoot ko saamne ला रहे हैं, इनको यह कार्य nindaniiy है| किन्तु jis prakaar likhak ne is sabke लिये हिन्दू धर्म को दोषी ठहरा दिया, hinndu dharmgranthon का apmaan kiya, kya यह uchit है? kya हिन्दू धर्म hee iska mool kaaran है? kya angrejon ne hame baantne ke लिये is ghinone krit का sahaara nahi liya tha? mai bas aapko itna kahna chaahta hoon ki… Read more »
दिवस दिनेश गौड़
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आदरणीय कपूर साहब, उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद| मुझे ख़ुशी है कि आपने मुझे इस योग्य समझा| कपूर साहब मेरी तो मन से इच्छा है कि मै अपने साथ कार्यरत सभी साथियों को अपनी बात समझा पाटा, किन्तु बहुत दिनों से देख रहा हूँ कि सबसे ज्यादा गलती देश के युवाओं की ही है| अगर वह भली प्रकार से अपने कर्तव्यों का निर्वाह करता तो यह हालत न होती| मेरे कुछ मित्र ऐसे भी हैं कि जब मै उनके साथ राष्ट्र हित में चर्चा करना चाहता हूँ तो कई यह बोल पड़ते हैं कि “तू क्या कर लेगा अकेला?… Read more »
डॉ. राजेश कपूर
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सभ्यता व ज्ञान के आगार मित्र डा. चतुर्वेदी जी तथा डा. मीना जी से कहना है की सच का सामना होने पर तिलमिलाने और असभ्य भाषा के प्रयोग के स्थान पर वे तर्कपूर्ण उत्तर दें तो इस पत्रिका व उनके अपने सम्मान को आघात नहीं लगेगा. आप लोग जितनी निर्ममता व असभ्यता से हिन्दू समाज, संस्कृति व धर्म ग्रंथों का अपमान करते हैं वह आपके पूर्वाग्रहों व हिन्दू समाज के प्रती आप लोगों की घृणा को प्रदर्शित करता है. – ऐसे में आप जो दावे हिन्दू समाज के किसी वंचित वर्ग के कल्याण के करते हैं , उनपर संदेह होना… Read more »
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