आज के परिवेश में मीडिया का रोल


       आज के युग एवं परिवेश में मीडिया का एक महत्वपूर्ण रोल है चाहे वह प्रिन्ट मीडिया हो चाहे वह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हो या सोशल मीडिआ हो | आम तौर पर हम टेलीविजन,रेडियो और अख़बार आदि को ही मीडिया को ही  प्रमुख अंग  मानते रहे है क्योकि हम इनके द्वारा ही सूचनाओं का आदान – प्रदान होना  समझते है | परन्तु उदारीकरण नीति  के कारण  मोबाइल व इंटरनेट आ जाने से सूचनाओं का  आदान प्रदान काफी बढ़ गया है | इन्ही कारणों से  सोशल मीडिया ने भी अपनी विशेष स्थान बना लिया है क्योकि इसके द्वारा सूचनाओं का आदान- प्रदान बहुत ही आसान और प्रभावशाली  हो गया है |  हर किसी  को अपनी बात  रखने का एक बेहद आसान प्लेटफॉर्म मिल चुका है  जो आज के परिवेश में एक बड़ा रूप ले चुका है | आप चाहे किसी जगह बैठे हो या कोई भी समय हो,आपने अपना मोबाइल या लेपटॉप उठाया और उसके द्वारा आप तुरंत आपनी  बात को पहुंचा सकते है,जो कि सबके हाथ में एक अदृश्य कलम है जो समय समय पर अपनी ताकत दिखाती रहती  है | लेकिन इसके कुछ दुष्परिनाम भी सामने आ रहे है,जिसके परिणाम हमे व्यक्तिगत और सामुहिक रूप से भुगतने पड़ रहे है,क्योकि इसके द्वार गलत सूचनाएं व अफवाहे आग की  तरह समाज व संसार में फैल रही  है | जिनका सम्पादित करना परखना व जांच करना एक बड़ी टेढ़ी खीर ही नहीं है अपितु बड़ा मुश्किल भी है | आकड़ो के अनुसार पूरी दुनिया में इस सोशल मिडिया को लगभग एक अरब से ज्यादा लोग प्रयोग करते है जो की काफी सक्रिय है भारत में इनकी संख्या बीस करोड़ से ज्यादा है | इस सोशल मिडिया के सबसे खास बात ये है कि आप दुनिया के किसी कोने में बैठे हो आप वही से अपनी बात को शेयर कर सकते  बात को किसी भी कोने में पंहुचा सकते है |             आज के परिवेश में मीडिया का रोल बहुत ही महत्वपूर्ण हो गया है इसके बिना तो आज  किसी की गाडी एक इंच भी आगे नहीं बढ़ सकती । चाहे वह नेता हो अभिनेता हो या साधारण व्यक्ति हो  वह अपनी बात किसी को भी इस सोशल माध्यम द्वारा पंहुचा जा सकता यह बात दूसरी कि उसके बात कोई सुने या ना सुने पर वह अपनी बात आसानी से कह सकता है क्योकि उसे बोलने लिखने और अपनी अभिव्यक्ति करने का अधिकार उसे सविंधान दिया है इसके  लिए उसे किसी सोर्स या सिफारिश की जरूरत नहीं पड़ती | आज के कोरोना काल में इसका महत्व और भी  बढ़ गया है | आप अपने बंद कमरे में बैठकर भी इसका प्रयोग कर सकते है और सबकी बात देख व सुन सकते  है पर इसका दुष्परिणाम यह है कि इसकी सत्यता आप नहीं परख सकते | अफवाओं का बाजार इसी सोशल मीडिया द्वारा गर्म होता है |  अक्सर इस सोशल मीडिया का फायदा दुश्मन देश ज्यादा उठाते है और कई प्रकार के अफवाहे अपने दुश्मन देश को भेजते रहते है |             आज लगभग सभी टी वी चैनल कोरोना से सम्बन्धी आकड़े दे रहे है और बतलाते है की किस राज्य में या किस देश में कितने लोग कोरोना से प्रभावित और संकरित  हुए ,कितने ठीक हुए कितने मरे, इन सब बातो से केवल पब्लिक में डर का माहौल पैदा होता और यह माहौल दिन प्रतिदिन  बढ़ता जा रहा है और लोग नर्वस होते जा रहे है | पहले ही लोगो के काम धंधे बंद हो गए | कल कारखाने बंद हो गए है मजदूर बेरोजगार हो गए है और दर दर की ठोकरे खा रहे है और दूसरी तरफ टी वी  चैनलों द्वारा इन सबकी खबर देकर लोगो को काफी नर्वस या निराश कर रहे है जो हमारे देश में नहीं अपितु पूरे विश्व में मौत का कारण बन हुए  है | आज मौतों कारण कोरोना तो है ही बल्कि दूसरी तरफ निराशा का माहौल व डर भी  है |  मेरा सुझाव है कि इस प्रकार के वातवरण को रोका जाये और देश वासियो की लिए सकारात्मक कदम उठाये जाये जिससे विश्व का कल्याण हो और इस आपदा से निबटा जाये न की इसका सभी  टी वी चैनलों द्वारा इन सबका प्रदर्शन व प्रसारण किया जाये जो की देश के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है  जय हिन्द जय भारत भारत माता की जय | 
आर के रस्तोगी 

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