लेखक परिचय

केशव आचार्य

केशव आचार्य

मंडला(म.प्र.) में जन्‍म। माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से प्रसारण पत्रकारिता में एमए तथा मीडिया बिजनेस मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री हासिल कीं। वर्तमान में भोपाल से एयर हो रहे म.प्र.-छ.ग. के प्रादेशिक चैनल में कार्यरत।

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-केशव आचार्य

जिंदगी देने वाले, मरता छोड़ गये,

अपनापन जताने वाले तन्हा छोड़ गये,

जब पड़ी जरूरत हमें अपने हमसफर की,

वो जो साथ चलने वाले, रास्ता मोड़ गये।

178 लोगों के जुबान से निकला दर्द भी सरकार को नहीं पसीजा पाया

भोपाल गैस त्रासदी के 25 साल बाद जो फैसला आया है उसने ना कितनी उम्मीदों को मौत दे दी है। 25 साल तक न्याय की आस में अपनो को खो जाने का दर्द समटे लोगों की आंखों के आंसूओं का मोल लगा महज 25 हजार। ये भारतीय न्याय प्रणाली। ये नरसंहार के लिए मिलने बाले दंड का स्वरूप अचानक ही दुर्घटना में बदल गया। वाह….25 साल का समय कम नहीं होता एक पूरी पीढ़ी तैयार हो जाती है ना कितने परिवार इस आस में जी रहे थे कि न्याय की देवी की तराजू में उनके आंसूओं का मोल कुछ तो होगा। महज 25 हजार के जुर्माने औऱ दो साल की कैद ये सज़ा है मौत के सौदागरों की। साल दर साल जाने कितनी लड़ाईयों के बाद पीडितों का ये सपना टूट गया है। 25 साल से जहरीली गैस से प्रभावित लोगों की नरक यात्रा आज भी उनकी पीढ़ी झेल रही है।ऐसे में इस फैसले ने त्रासदी के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे लोगों को जीते जी ही मार डाला है। मामले में मुख्य अभियुक्त वॉरेन एंडरसन आज भी फरार दुनिया के पापा ने उसे भारत को सौपने से इंकार कर दिया है। एक तरफ इस तथाकथित वैश्विक पापा की एक हुंकार पर बाकी के सारे देशों की पेट गीली होने की नौबत तक आ जाती है ऐसे मैं कभी यह अपराधी सज़ा पा सकेगा इस बात पर भी नचिकेता प्रश्न लगा हुआ है क्या हम कभी इतने शक्तिशाली हो पायेगें कि इस वैश्विक पापा के सामने सीना तान के वारेन नामक इस अपराधी को समर्पण के लिए कह सके ना जाने कब ये समय आयेगा आयेगा या नहीं भी कोई नहीं जानता है।

यूनियन कार्बाइड़ कार्पोरेशन लिमिटेड़ की स्थापना से लेकर,गैस रिसाव और उसके बाद इस मामले की सुनवाई से लेकर फैसले के दिन तक हर बार लोगों की भावनाओं और उनके विश्वास को छला गया है और इस फैसले ने तो अब हमारे वैश्विक पप्पा के लिए एक दरवाजा औऱ खोल दिया है जाहिर सी बात है जब हमारे देश न ही हमारे लोगों को छला तो फिर अमेरिका क्यों चाहेगा इस मामले को आगे बढ़ाने सरकार है पूरी तरह से जिम्मेदार 25 साल के इस लंबे समय का सबसे कारण सरकार औरयूनियन कार्बाइड कंपनी के बीच 1989 को हुए एक समझौता है इसके तहत कंपनी को दिसंबर 1984 की गैस त्रासदी से जुड़े सभी आपराधिक और नागरिक उत्तरदायित्वों से मुक्त कर दिया गया था।

अदालत ने आठ में से सात दोषियों को दो-दो साल की सजा सुनाई है और प्रत्येक पर 1,01,750 रुपये का जुर्माना लगाया जबकि इस मामले में दोषी करार दी गई कंपनी यूनियन कार्बाइड इंडिया पर 5,01,750 रुपये का जुर्माना लगाया गया। त्रासदी के बाद के शुरूआती वर्षो में सरकार ने कंपनी और उसकी अमेरिकी कंपनी यूनियन कार्बाइड कार्पोरेशन पर आपराधिक मामले दर्ज करने की बजाए उसके साथ करार कर उसे हर तरह के उत्तरदायित्व से मुक्त करदिया। भोपाल गैस ट्रेजडी विक्टिम्स एसोसिएशन’ के अनुसार 14-15 फरवरी 1989 को हुए इस करार के तहत यूनियन कार्बाइड के भारत और विदेशी अधिकारियों को 47 करोड़ डॉलर की एवज में हर प्रकार के नागरिक और आपराधिक उत्तरदायित्व से मुक्त कर दिया गया। इस करार में कहा गया कि कंपनी के खिलाफ सभी आपराधिक मामले खत्म करने के साथ-साथ सरकार इस त्रासदी के कारण भविष्य में होने वाली किसी भी खामी मसलन से उसके अधिकारियों की हर प्रकार के नागरिक और कानूनी उत्तरदायित्व से हिफाजत भी करेगी।जिसे सर्वोच्च न्यायालय अक्टूबर1991 में आंशिक रूप से खारिज कर दिया था।

30 Responses to “25 साल के आंसूओं की कीमत 25 हजार”

  1. डॉ. मधुसूदन

    डॉ.मधुसूदन उवाच

    केशवजी-रोए बिना मां भी दूध पिलाती नहीं, तब अमरिका सरकार क्यों खोजे उसे, जब भारतने कोई दबाव डाला न हो?–पढिए–
    आजके “वॉशिंग्टन टाईम्स” के समाचार का सार——
    ==अमेरिकी सरकार पर उसे खोजने के लिए कोई दबाव नहीं है==
    समाचारका हिंदी अनुवाद–
    भारतीय अधिकारी, यूनियन कार्बाइड के पूर्वाध्यक्ष वारेन एंडरसन का प्रत्यर्पण अगर चाहते हैं, तो उसकी खोज कठिन नहीं है। उसपर प्राथमिक आरोप लगाया गया है, और उसे, भोपाल गैस रिसाव मामले में भगोड़ा घोषित किया गया है। वह कई वर्षों से Hamptons में रहता हैं। यह दुर्घटना दुनियाकी सबसे खराब औद्योगिक दुर्घटना थी, जिसमें, 15000 लोग मारे गए थे, और 500,000 घायल हो गए थे।.
    2002 में ग्रीनपीस(स्वयंसेवी संस्था) के कार्यकर्ता श्री. के. सी. Harrell, Bridgehampton, NY में रहनेवाले एंडरसन और उसके घरपर नज़र रखा करते थे। एक बार उसे भोपाल के बारे में कुछ टिप्पणी सुनानेपर एंडरसन झटसे घरके अंदर भागा था।
    “श्री Harrell ने कहा कि “वह बिल्कुल भी छुपा नहीं है, वास्तवमें, अमेरिकी सरकार पर उसे खोजने के लिए कोई दबाव नहीं है.”— यह कहना है ग्रीन पिस के श्री Harrellका—————————————————————–
    क्या हमारी सरकार बिकी हुयी है?—-मधुसूदन उवाच
    और हम विश्वशक्ति???????? बगल का कुत्ता भी आकर हमपर भौंक जाता है।चीन बार बार बिना वीसा सैर कर जाता है।हम बयानोमें चतुराई दिखाकर अपनी ही जनताको सपने दिखाकर चुनाव जीतकर दुःशासन करते हैं।

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  2. संजय द्विवेदी

    sanjay dwivedi

    केशव आपने जो सवाल उठाए हैं वे बहुत प्रासंगिक हैं। हमारी राजनीति और व्यवस्था ऐसी है कि एंडरसन को सरकारी विमान से भगाया जाता है और उसकी जिम्मेदारी लेने को न केंद्र की सरकार तैयार न राज्य की। इस बात पर कौन भरोसा कर सकता है कि स्व. राजीव गांधी और श्री अर्जुन सिंह नहीं जानते थे और एंडरसन अमरीका चला गया। 15 हजार मौतों के बाद 25 साल बाद जो न्याय मिला उसमें कोई इस समय जेल में नहीं है। वाह हमारे नेता, वाह हमारी सरकार। क्या करूं यार.. दुखवा कासे कहूं।

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  3. Prafull Kr Sinha

    इस अंधे कानून की भेंट शिर्फ़ भोपाल गैस त्रासदी के भुक्तभोगी ही नहीं चढ़े हैं बल्कि भारतीय कानून अंधे की वो लाठी है जो सिर्फ मजलूमों के सरों से ही घन की तरह टकराती है ….. इस बिकाऊ दुनिया में कानून भी बिकाऊ है और न्याय भी…… यह एक बार नहीं अपितु हजारों बार सभीत हो चूका है……..

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  4. केशव आचार्य

    acharya

    आप सभी के सहयोग और आर्शीवाद के लिए मैं आभारी हूं….आपके प्रेम ने ही प्रवक्ता पर लिखे मेरे लेख को 900 से भी ज्यादा हिटस दिलवाई साथ 25 से ज्यादा जागरूक पाठकों के विचार मुझे मिलें ..
    एक बार पुनः आप सबको हार्दिक धन्यवाद

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  5. Kaushik

    Look in to these judges, and involved officers, financial conditions.
    They have sold the country. Hang these judges and politians/officers.

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  6. Manoj Singh

    ये वाकई में काफी पीड़ादायक है…और साथ ही ये जानकर तो और भी की खुद सरकार ने एंडरसन को भागने में मदद की….तो लब्बोलुआब यही है की उस वक्त भी कांग्रेस की सरकार थी और अभी भी, तो कैसे उम्मीद करें की जिस सरकार ने दोषी को भगाया उसे ही प्रत्यपर्पण करायेगी….और करा भी लेती है तो 89 साल के बूढ़े को क्या सजा मिलेगी……….ये अंधा कानून है………….

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  7. YOGENDRA PATEL

    ये तो इंडिया का कानून है एसा ही होता है एसा ही कसाब के साथ भी होगा.

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  8. mohit shrivastava

    keshav guru ke sath mujhe kam karne ka maouka mujhe mila tha unke pass shabdo ka bhandar hai(एंडरसन के) खिलाफ मामला बंद हो गया.’ गैस त्रासदी की भयावह घटना के करीब 26 साल बाद यूनियन कार्बाइड इंडिया के पूर्व अध्यक्ष केशव महिंद्रा और छह अन्य को सोमवार को दो साल कैद की सजा सुनायी गयी. इस मामले में 89 वर्षीय एंडरसन फरार है और भोपाल की अदालत के फैसले में उसके बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है.

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  9. menka naidu

    i m agree with ur opinion this is not a justice to victims? ek baar phir bhartiy nyay pradalee ki kamjoree samne aayee he ……………………..

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  10. nkushwah

    आपके लेख सच का आइना होते हैं……एक नई क्रांति की सुरुआत कैसे होती है यह आपसे सीखा जा सकता है……

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  11. sandeep

    aapke mat se ham sahmat hain. papa ne jo jawab diya hai usse seekhen !

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  12. ashish

    आपने जो लिखा है अमेरिका के बारे मै वो यथार्थ हैं …हमारी न्यायव्यवस्था का ये रूप सचमुच में पीड़ा दायक…चंद रूपयों से लोगों के आंसू नहीं पोछे जासकते है मैं आपके विचारों से पूर्ण सहमत हूं

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  13. jayshree

    हमारी न्याय व्यवस्था ने साबित कर दिया की “कानून अँधा है” उसकी
    आखों पर पट्टी बंधी है …………

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  14. shyam sundar goyal

    जब रहनुमा ही कातिल बन जाये तो फिर आस किसकी करे. ऐसा लगता है भारतीय न्याय प्रणाली उस शेर के सामान है जिसे एक बड़े से पिंजरे मैं बंद कर दिया गया है. और उसका मालिक अमेरिका बन गया है जो चाबुक से शेर को कण्ट्रोल कर रहा है. जय हो भारत………….

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  15. praveen

    hamri nanay vavstha ne in per ghor chot ki isi tarah k faslo se logi ka visvash kanon se uth jata hia …….is lekh k liye apko hardik dhanybad

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  16. डॉ. मधुसूदन

    डॉ. प्रो. मधुसूदन उवाच

    अमरिका में यदि ऐसा होता, तो प्रत्येक मृत व्यक्तिके परिवारको एक मिलियन डॉलरसे कम ना मिलता। और २५ वर्षका ब्याज भी जोड दिया जाता। कहीं न कहीं भ्रष्टाचार का संदेह है।

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  17. sunil patel

    केशव जी बिलकुल सही कह रहे है. हजारो मोतो के जिम्मेदारो को इतनी कम सजा. दो लोगो की आपसी लड़ाई में भी कई बार कई कई सालो की सजा मिल जाती है. सरकार सायद किसी दवाब में कम कर रही है. अगर यह गलती गलत FIR दर्जन करने की है जिसमे बेहद कमजोर धरा लगाईं गई है तो पिछले २५ वर्षो से कानून के नाम पर मजाक नहीं तो और क्या हो रहा था.
    हो सकता है एक दो सालो में फिर से यह कारखाना उसी जगह चालू हो जाये. बेहद शर्मनाक फैसला.

    अगर येही हादसा किसी यूरोप देश में होता तो प्रत्यक परिवार को करोडो रूपए मुआवजा मिलता किन्तु पीडितो को ठीक से प्राथमिक उपचार भी नहीं मिल सका. अभी एक गुंडे को फ़ासी की सजा मिली वह भी उसके अपराध करने के एक महीने के अन्दर, यहाँ तो २५ साल लग गए, वह भी…………….. जय को भारतीय न्याय व्यवस्था.

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  18. Ram Dulare

    bhopal gas kand par aapka lekh wakai logngo ko sochane par mazboor karta hai ki wo ek sachhai se humara samaj humare rajneta humari nayay pradali kitna door bhag rahe hai aur en sabke beech piss raha hai ek amm adami jo jisake aur keval ek aam adami jisake dam par hi ajj ye samaj khada hai………..

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  19. ratna chouhan

    keshav ji aapne bahut accha likha hein.well this is not only one case that you should be panic ,there are lots of cases where decision is still waiting.I think our law system ought to be strick towards criminals but corruption and blind law always panic for victims.Indian law system failure cause outbreak of many social issuses like birth of new naxalite.I want to say our blind law system increase mental depression to victim family but our indian government knows his personal profit and nothing else.Most of the victim people that are injustified in court later become anti-social element .Indian law authorities should think on justifying poor victim but lawyer modulate the case and criminals are free in society.World is thinking and made amendments for human rights but our nation never fulfill its fundamental duties towards citizen.Though our constitution established in 1950 but still our law system crush all fundamental rights with bleeding tears.plz never expect any justice from our law system because it already sold its sole of justice.Now kaw is only for corrupted and rich people .

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  20. Pankaj

    Ab to har mamle me yehi hote dekhkar, hum sochne par majbur hain ki, kya samvidhan ya kanun wakai nyay dilane me sksham hai? mujhe to naye vikalpon par vichar karne ki jarurat dikhti hai. amul chul privartan se darna thik nahi. bahut accha likha apne, dard to vakai taza ho gya. pehle sunta padhta tha, aj same city me rehte hue mehsus kar rha hau.

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  21. पंकज झा

    पंकज झा.

    बहुत सोचनीय पक्ष है…….काफी पीड़ा-दायक.

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  22. nandkishor kushwah

    bhopal gas kand par aapka lekh bhartiya nayay vyavasta ko sochne par majboor karta hai…..vastav me is faisle ne bata diya hai ki adalatein keval nirnay karti hain nyaye nahi…..ager nyaye hota to 25 saal ke dard par 25 hazar ka marham nahi rakha jata……….ye faishla gas haadse me mare gaye logon ko sacchi srdhanjali nahi hai…….

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  23. satish

    Same offence to take life of less than ten persons in an motor accident by a rich person of India can be converted into offence as Homicide not amounting to murder but an International Company can not be held guilty for thousands of life under that section.

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