लेखक परिचय

मयंक चतुर्वेदी

मयंक चतुर्वेदी

मयंक चतुर्वेदी मूलत: ग्वालियर, म.प्र. में जन्में ओर वहीं से इन्होंने पत्रकारिता की विधिवत शुरूआत दैनिक जागरण से की। 11 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय मयंक चतुर्वेदी ने जीवाजी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के साथ हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर, एम.फिल तथा पी-एच.डी. तक अध्ययन किया है। कुछ समय शासकीय महाविद्यालय में हिन्दी विषय के सहायक प्राध्यापक भी रहे, साथ ही सिविल सेवा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को भी मार्गदर्शन प्रदान किया। राष्ट्रवादी सोच रखने वाले मयंक चतुर्वेदी पांचजन्य जैसे राष्ट्रीय साप्ताहिक, दैनिक स्वदेश से भी जुड़े हुए हैं। राष्ट्रीय मुद्दों पर लिखना ही इनकी फितरत है। सम्प्रति : मयंक चतुर्वेदी हिन्दुस्थान समाचार, बहुभाषी न्यूज एजेंसी के मध्यप्रदेश ब्यूरो प्रमुख हैं।

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vibrant gujaratडॉ. मयंक चतुर्वेदी

दुनियाभर के उद्योगपतियों को एकत्र कर देश की आर्थिक दशा सुधारने की दिशा में जो यह वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन आरंभ हुआ, उसने आज भारतभर में यह संदेश दे दिया है कि अब देश के दिन बदल रहे हैं। भारत विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अर्थ, कृषि, औद्योगिक आदि सभी क्षेत्रों में विकास करने के लिए तेजी से  उद्यत हो उठा है। इस नए भारत का भविष्य दुनियाभर के कुल 353 देशों की सूची में श्रेष्ठता की ओर अग्रसर है। जिसके बाद कहा जा सकता है कि इस सदी में ही यह देश विकास के धरातल पर अपने उच्च स्तर को प्राप्त कर लेगा। वाइब्रेंट गुजरात वैश्विक निवेशक सम्मेलन (वाइब्रेंट समिट) ने आज बता दिया है कि दुनिया की भारत में काफी दिलचस्पी है और यह निरंतर बढ़ रही है।

 आखिर किसी भी देश के विकास के लिए सबसे जरूरी है क्या? यही कि उस देश में शांति का माहौल हो, नई सोच और सपने को हकीकत में बदलने के लिए सभी दिशाओं से मिलने वाली मदद हो, शासकीय-निजी स्तर पर सुविधाएं हों, परस्पर सहयोग का भाव हो और अंत में कहा जाए कि वहां सुपूर्ण माहौल ऐसा हो कि कोई भी अपना दैहिक, भौतिक एवं आद्यात्मिक विकास सहजता से कर सकने में स्वयं को सक्षम महसूस कर सके। इस संपूर्ण नजरिए से देखा जाय तो भारत इन दिनों पूरी दुनिया को सबसे अधिक आकर्षक जगह के रूप में नजर आ रहा है।

 यह वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन गांधीनगर में शुरू होने के साथ बहुत कुछ कह गया है, यदि इसी प्रकार देश में अलग-अलग राज्यों में इस प्रकार के आर्थिक विकास को लेकर वैश्विक सम्मेलन होते रहे, तो कहना होगा कि वह दिन दूर नहीं जब हम कह सकेंगे कि भारत आध्यात्मिक बल में तो दुनिया का गुरु है ही, वह आर्थिक क्षेत्र में भी वैश्विक शक्ति है। सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनियाभर के निवेशकों से जो वादा किया कि स्थिर कर व्यवस्था तथा भरोसेमंद, पारदर्शी और निष्पक्ष नीतिगत माहौल बनाकर भारत को कारोबार करने के हिसाब से ‘सबसे आसान’ देश बनाया जाएगा। देश में आर्थिक विकास तेज करने एवं रोजगार अवसर बढ़ाने के लिए विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत किया जाएगा एवं सभी प्रकार की परियोजनाओं की मंजूरी के लिए केंद्र तथा राज्य दोनों स्तरों पर एकल खिड़की मंजूरी व्यवस्था स्थापित की जा रही है। मोदी के कहनेभर से पूरी दुनिया में यह संदेश चला गया कि अब भारतभूमि उद्योग और आर्थिक विकास के लिए एक सफलतम-श्रेष्ठतम स्थान है।

 यह सर्वविदित है कि इस वक्त जितने भी विदेशी और देशी अंतर्राष्ट्रीय मानक के आर्थ‍िक फॉरम हैं, वे सभी एक साथ यही बता रहे हैं कि हिन्दुस्तान की अप्रैल 2014 से शुरू मौजूदा वित्त वर्ष की पहली दो तिमाही में विकास दर पिछले साल की तुलना में एक फीसद अधिक रही है। इतना ही नहीं, आईएमएफ ने आगामी वर्षों में भारत के दूसरे सबसे तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनने की भविष्यवाणी की है। ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) के अनुसार देखा जाय तब भी दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों में सिर्फ भारत ही इस साल अपनी विकास दर तेज बनाए रख सकने में कामयाब होता दिख रहा है।

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेशी और अप्रवासी भारतीयों के मन में जो भरोसे का बीजारोपण यह कहकर कर रहे हैं कि ‘अगर आप एक कदम चलते हैं, हम आपके लिए दो कदम चलेंगे।’ निश्चित ही इससे वातावरण शीघ्र ही वैश्विक क्षितिज पर भारत के पक्ष में बदला हुआ नजर आएगा। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बानकी मून, अमेरिका के विदेश मंत्री जॉन कैरी, भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोग्बे और मेसोडेनिया के प्रधानमंत्री निकोला ग्रुवस्की समेत 35 देशों के 829 प्रतिनिधियों के साथ ही देशी-विदेशी अन्य दिग्गज उद्योगपति और राजनयिकों के इस सम्मेलन में आने से यह बात आज तय हो गई है कि हमारी विश्वसनीयता और आवश्यकता पूरी दुनिया महसूस करने लगी है। भारत जो ‘बदलाव के रास्ते’ पर चल पड़ा है, इसे हम उसी के सार्थक परिणाम के रूप में भी देख सकते हैं।

 वस्तुत: भारत ने पिछले वर्षों की तुलना में तेजी से अपनी आर्थिक नीतियों में सुधार किया है। जहां कठोर नियम थे उनका सरलीकरण किया गया और व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के साथ उसे निरंतर पैचीदगियों से मुक्त किया जा रहा है। जिसके कारण दुनिया के सामने भारत में निवेश के नए अवसर पैदा हो गए हैं। खासतौर से पिछले महीनों में निर्माण क्षेत्र में एफडीआई को उदार बनाया गया है। रेलवे में 100 फीसद एफडीआई को मंजूरी दी गई है। रक्षा और बीमा क्षेत्रों के लिए एफडीआई की सीमा बढ़ाकर 49 फीसद की गई है। केंद्र तथा राज्य स्तरों पर एकल खिड़की मंजूरी (सिंगल विंडो क्लीयरेंस) की दिशा में काम शुरू किया गया है। इसके अलावा यहां निवेश की अपार संभावनाएं इसीलिए भी दिखाई देती हैं, क्योंकि हिन्दुस्तान 3-डी (डेमोक्रेसी, डेमोग्राफी तथा डिमांड) समेटे दुनिया का एकमात्र देश है। यहां कम लागत और उच्च गुणवत्ता वाले मानव संसाधन पर निर्माण की प्रचुर क्षमता मौजूद है। देश लगातार श्रम सुधारों की दिशा में काम कर रहा है जिससे कि उद्यमी यहां रोजगार का व्यापक बाजार खड़ा कर सकें। वहीं भूमि अधिग्रहण सुगम बनाने के लिए अध्यादेश लाया गया है।

वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव और विश्व बैंक के अध्यक्ष की मौजूदगी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की प्रगति और समृद्धि के लिए उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने उन्हें लेकर सही कहा है कि आपकी भागीदारी से 1.2 बिलियन भारतवासियों का मनोबल बढ़ा है। वास्तव में आज दुनिया के सामने जो सबसे बड़ी चिंता उभरी है वह है ग्लोबल इकॉनोमी। यहां इसे लेकर हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सही फरमाते हैं कि विश्व के सभी देशों को आज मिलकर ग्लोबल इकॉनोमी को मजबूत करने के लिए काम करना होगा। हमें मजबूत विकास के लिए काम करना होगा। सभी को स्थिर इकॉनोमी के लिए मिलकर काम करना होगा। भारत ने इन पर काम करना शुरू कर दिया है, अब अन्य देश भी आगे आए। मोदी कह रहे हैं, दुनिया में भारत को लेकर दिलचस्पी बढ़ रही है। कई देश हमारे साथ काम करने को लेकर आगे आ रहे हैं और हमारे साथ मिलकर दुनिया को आगे ले जाना चाहते हैं। हमारी सरकार देश में बदलाव लाने की कोशिश कर रही है। हमें यकीन है कि सोच में बदलाव के साथ ही बदलाव शुरू हो जाता है।

वस्तुत: यही कारण है कि आज स्वीकारोक्ति के साथ या मजबूरन ही सही सम्मेलन में पहुंचे अमरीका के विदेश मंत्री जॉन कैरी को भी भारत सरकार के नारे “सबका साथ, सबका विकास” की तारीफ करनी पड़ी है और कहना पड़ा कि इसे हम सभी को अपनाना चाहिए। आज उन्हें यह भी स्वीकार करना पड़ा है कि भारत एशिया भर में शांति बनाए रखने और विकास में काफी मददगार है। कैरी यह भी कह गए कि (भारत-अमरीका) संस्थापक दस्तावेज एक ही शब्द से शुरू होते हैं “वी द पीपल”। अगर हम साथ काम करें तो दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र और सबसे बड़ा लोकतंत्र मिलकर दुनिया से गरीबी मिटा सकते हैं। हम साथ मिलकर बहुत कुछ कर सकते हैं और हमें साथ मिलकर बहुत कुछ करना चाहिए। आज कैरी स्वयं को सम्मानित महसूस कर रहे हैं  कि अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत के 26 जनवरी गणतंत्र दिवस समारोह के मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में यहां आ रहे हैं।

 वास्तव में पाकिस्तान को आर्थिक मदद देने के मुद्दे पर हाल ही घिर चुके अमेरिका के विदेश मंत्री जॉन कैरी की इन बातों में आज बहुत दम है। यही दम भारत के भविष्य की ताकत का अंदाज बयां करती है। निश्चित ही आज कहा जा सकता है कि वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन के जरिए देश को विकास के धरातल पर एक नया अर्थ मिलना आरंभ हो गया है, जो यह बता रहा है कि यह सदी किसी और के दिग्विजय की नहीं हम भारतवंशियों की दुनिया में छा जाने की सदी बनकर उभरेगी। वाइब्रेंट गुजरात तो इस दिशा में एक शुभ संकेतभर है।



2 Responses to “वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन से देश को मिलता नया अर्थ”

  1. डॉ. मधुसूदन

    डॉ. मधुसूदन

    अर्थशास्त्री दो प्रकारके चक्र बताते हैं। एक हितकारी या अच्छा चक्र और दूसरा दुष्ट चक्र।
    अच्छा चक्र क्या होता है, और कैसे चलता है?

    अच्छा हितकारी अर्थ चक्र:
    (१)पूँजी निवेश बढाना—->(२)पूँजी निवेशसे उत्पादन बढाना—>(३) उत्पादन से बचत बढाना—->(१) बचत से फिर निवेश बढाना —->फिर उत्पादन बढाना —->
    आप इस चक्र को गतिमान करनेके लिए (१)पूँजी निवेश बढाकर ऐसा देश हितकारी चक्र गतिमान कर सकते हैं। गुजरात में यही हो रहा है। शासकीय भ्रष्टाचार शून्य बताया जाता है।

    गुजरात में “२६ लाख करोडका” निवेश घोषित हुआ।कांग्रेस के शासन में कभी ऐसा निवेश नहीं हुआ था।
    क्यों? क्यों कि गुजरात के शासन में निवेशकों को विश्वास है।

    ऐसे देशका हितकारी अर्थ-चक्र एक बार प्रारंभ हुआ तो फिर परम्परा बन जाएगा; और अनवरत घुमता ही रहेगा; तब तक, जब तक उसमें कोई विघ्न उत्पन्न ना हो।
    चक्र का प्रारंभ हमारी सामूहिक राष्ट्रीय सफलता की कुंजी है।इस लिए भा ज पा को शासन में लाना आवश्यक है।
    गुजरात के शासन में निवेशकों का विश्वास है।
    जब प. बंगाल का शासन निष्क्रिय रहा, तो, नैनो भागकर गुजरात आयी थी यह भूल न जाए।

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  2. sureshchandra karmarkar

    आदरणीय चतुर्वेदीजी व्हाई ब्रेंट गुजरात की सफलता या असफलता ५-१० सालों मैं मालूम पड़ेगी. सम्भावना की जा सकती है शांतिप्रिय और उद्योग जनित वातावरण मैं पर्याप्त निवेश के कारण यह सफल हो. हमारे मध्य प्रदेश मैं भी ऐसा ही कुछ पिछले २-४ वर्षों से चल रहा है. इंदौर भोपाल मैं जोर शोर से तैयारियां होती हैं. बड़ी बड़ी होटलें बुक होती हैं. सडकेंबनती हैं. देसी ,विदेशी उद्योगपतियों के खाने के व्यंजन तै होते हैं. अखबारों में ठहरने के स्थानो। भोजन के मेनू के बारे मैं खूब लिखा जाता है. इस वर्ष नवंबर मैं शायद यह जलसा इंदौर मैं हुआ था. उस दिन मैं किसी काम से इंदौर से वापस रतलाम लौट रहा था. ट्रैन मैं इस मीट मैं भाग लेकर कुछ युवा उद्यमी आ रहे था, उनकी चर्चा सुन रहा था. वे लोग भोजन की बड़ी तारीफ कर रहे थे ,उद्योग ,कारखाने ,निर्माण के बारे मैं उनकी चर्चा थी ही नही. मैंने उनसे पुछा की आप लोग नई नीति,कल कारखाने। के बारेमें बात नहीं कर रहे, वे बोले इस सरकार को मध्य प्रदेश मैं दस साल हो गए ,रतलाम मैं कोई कारखाना लगा क्या/रतलाम से आप अंदाज लगा ले पुरे मध्य प्रदेश मैं आनुपातिक दृष्टि से कितने कारखाने लगे होंगे/?चतुर्वेदीजी, हंगामा अधिक है.

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