आओ सजन , अब तो मेरे घर आओ सजन !
तेरे दर्शन को तरसे है ; मेरे भीगे नयन !
घर , दर सहित सजाया है ; अपने मन का आँगन !!
आओ सजन , अब तो मेरे घर आओ सजन !!!

तू नहीं तो जग , क्यों सूना सूना सा लगता है !
तू नहीं तो हर कोई , पराया सा नज़र आता है !
इतनी बड़ी दुनिया में कौन है यहाँ मेरा ; तेरे बिन !
आओ सजन , अब तो मेरे घर आओ सजन !!!

बहुत घूम चूका मैं ; मंदिर ,मस्जिद और गुरुद्वारे !
किसी अपने को न मिल पाया ; मैं किसी भी द्वारे…!
कहीं भी तू न मिला , भटके है हर जगह मेरा मन !!
आओ सजन , अब तो मेरे घर आओ सजन !!!

meeraजीवन में छाये है उदासी के साये बहुत गहरे !
सबने छला है मुझको तेरे नाम से ; प्रभु मेरे !
अब तो तेरे मेहर की बरसात हो मेरे सूने आँगन !!
आओ सजन , अब तो मेरे घर आओ सजन !!!

बुल्ले शाह ने कहा था ‘ रमज सजन दी होर ‘
आज समझा हूँ कि , क्यों खींचे तू मुझे अपनी ओर !
तू ही मेरा सजन ,बस तू ही मेरा सजन !
आओ सजन , अब तो मेरे घर आओ सजन !!!

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