पितृयज्ञ हर घर में होवे, चरण आचरण सायं प्रात|
सेवा शुश्रूषा कर श्रद्धा, पायें उनका आशीर्वाद||

1. चले गए जो इस दुनियाँ से, वंशावली वट वृक्ष बनायें|
उनके सुन्दर कार्यों से, बच्चों को अवगत करें सिखायें|
पूर्ण करें उनके कामों को, बच्चों को लेकर के साथ||
सेवा शुश्रूषा ……..

2. पूर्णिमा से अमावस्या तक, कोई भी दिन न छूटें|
पूरे वर्ष भर अनुव्रत रहकर, विमल मधुर अमृत लूटें|
उत्तम संतति बनकर उनकी, मानें सुन्दर सच्ची बात||
सेवा शुश्रूषा ……..

3. सीखें पूर्वजों से अपने, देखें चित्र चरित्रों को|
श्रीराम कृष्ण की जय हो जय, नमन श्रवण से पुत्रों को|
वीर शिवाजी जैसे सुत बन, धन्य करें अपने पितु मात||
सेवा शुश्रूषा ……..

4. श्राद्ध पक्ष की यही सफलता, 365 दिवस मनायें|
गए हुओं का मान बढ़ाएँ ,जीवित को नित शीश झुकायें|
त्याग, समर्पण, श्रद्धा- तर्पण की खुशबू से महका हाथ||
सेवा शुश्रूषा ……..

1 thought on “पितृयज्ञ

  1. जीवित माता-पिता की सेवा ३६५ दिन करने की प्रेरणा देने के लिए और इसे ही मृत पितरों के प्रति सम्मान बताने के लिए अभिनन्दन

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