नए वर्ष में व्यंग्यकारों के तारे-सितारे

अशोक मिश्र
नया साल व्यंग्यकारों के लिए बड़ा चौचक रहने वाला है। नए वर्ष में व्यंग्यकारों की कुंडली के सातवें घर में बैठा राहु पांचवें घर के बुध से राजनीतिक गठबंधन कर रहा है। अत: संभव है कि प्रधानमंत्री और देश के 66 फीसदी राज्यों के मुख्यमंत्री व्यंग्यकार हो जाएं या फिर राजनीतिक उठापटक के चलते व्यंग्यकार ही प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री हो जाएं। वैसे इनके व्यंग्यकार होने की संभावना सिर्फ 57 फीसदी ही है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों की कुंडली के नौवें घर में बैठा राहु दूसरे घर में बैठे केतु से मिल उलट-फेर करने के मूड में है। बस, यही गठबंधन उनके खिलाफ साजिश रच सकता है। ऐसे में यदि प्रधानमंत्री और सभी मुख्यमंत्री राज्य के दो दर्जन व्यंग्यकारों को अपने मंत्रिमंडल में शामिल कर लें या फिर उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा दे दें, तो राहु और केतु के गठबंधन के प्रभाव को कम किया जा सकता है। वैसे 43 फीसदी संभावना यह भी है कि नए वर्ष में व्यंग्यकारों को साहित्य से लेकर देश की राजनीति तक का कबाड़ा करने का मौका हासिल हो। इसके लिए उन्हें प्रति सप्ताह ‘सत्ता प्राप्ति महायज्ञ’ करना होगा।
अब तक जो संपादक व्यंग्य के नाम पर मुंह सिकोड़ लेते थे, उन्हें असाहित्यिक मानते थे, व्यंग्यकारों को समाज का सबसे निकम्मा व्यक्ति मानते थे, उनके मनोभावों में परिवर्तन होगा। ऐसा व्यंग्यकारों की कुंडली के पहले घर में बैठे शुक्र महाराज की कृपा के चलते होगा। शुक्र प्रबल होने के चलते पूरे वर्ष पुरुष व्यंग्यकारों पर ‘पत्नीयात पिटन योग’ (पत्नी से पीटे जाने का योग) प्रभावी रहेगा। इसलिए पुरुष व्यंग्यकारों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी चेलियों और प्रेमिकाओं से दो कोस दूर रहें। चेलियों या प्रेमिकाओं के आसपास भी पाए जाने पर पत्नी से पीटे जाने का खतरा पूरे वर्ष बना रहेगा।
पुरुष व्यंग्यकार जातक अपनी सालियों और सलहजों से चार फुट दूरी से बात करें, शिष्ट हास-परिहास की इजाजत नौवें घर में बैठे बृहस्पति महाराज दे रहे हैं, लेकिन जहां ज्यादा लल्लो-चप्पो की, तो ससुराल में ही पत्नी के क्रोध रूपी आरडीएक्स से मान-सम्मान के परखच्चे उड़ जाने का अंदेशा है। महिला व्यंग्यकार जातकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने देवरों, ननदोइयों और जीजाओं से बतियाने, हंसी-ठिठोली करने से नए वर्ष में परहेज करें, वरना पति के अविवाहित साली से प्रेम प्रदर्शित करने के प्रबल योग हैं। इस वर्ष उनकी कुंडली के नौवें घर में बैठा बृहस्पति चौथे घर में बैठे मंगल से ‘रहस्य उद्घाटक योग’ बना रहा है।
नए वर्ष में व्यंग्यकारों के तारे-सितारे इतने प्रबल हैं कि वे हर पत्रिका, अखबार, टीवी चैनलों तक पर पूरे वर्ष छाये रहेंगे। चैनलों पर चलने वाले बहस-मुबाहिसे में उन्हें राजनेताओं से ज्यादा रुतबा हासिल होगा। वे जो कुछ कह देंगे, वही फाइनल होगा। पत्र-पत्रिकाओं में तो उनके जो जलवे होंगे, उसका कहना ही क्या है। कुछ संपादक तो अपने संपादकीय पेज से लेख, चिट्ठी-पत्री और संपादकीय गायब करके सिर्फ व्यंग्य ही छापेंगे। नियमित व्यंग्य लिखने वालों को अग्रिम भुगतान ही नहीं करेंगे, बल्कि वे पत्र-पत्रिकाएं जो अब तक कम संसाधन और रुपये-पैसे की कमी का रोना रोकर व्यंग्यकारों को टरका देती थीं, वे भी सारे खर्चे रोककर पहले व्यंग्यकारों का मानदेय देंगी और उसके बाद छपाई का भुगतान करेंगी। देश में प्रकाशित होने वाले सभी भाषाओं के दैनिक समाचार पत्र पहले पेज पर व्यंग्य ही छापा करेंगे। देश की पत्रकारिता में नया वर्ष ‘व्यंग्य क्रांति’ की सूत्रपात करेगा। नया वर्ष व्यंग्यकारों के लिए इतना प्रबल है कि देश के जितने भी सरकारी-गैर सरकारी सम्मान हैं, उनके नाम बदल दिए जाएंगे। सारे सम्मान या तो व्यंग्यकारों के नाम पर दिए जाएं या फिर व्यंग्यकारों को ही दिए जाएंगे। व्यंग्यकारों को बस इतना एहतियात बरतना होगा कि वे फिलहाल साल भर एक दूसरे की टांग-खिंचाई अभियान को तत्काल स्थगित कर दें या फिर हमेशा के लिए विराम लगा दें।

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