ए सनम ! तेरी याद में अब रोती नहीं हूँ मै


आर के रस्तोगी  

ए सनम ! तेरी याद में अब रोती नहीं हूँ मै
तेरे गम में अपनी आँखे भिगोती नहीं हूँ मै

ए पत्थर के सनम ! दिल को पत्थर बना लिया है मैंने 

Tasmania


जिसको माना था भगवान,उसको अब पूजती नहीं हूँ मै

बहाये थे जिन आँखों से आँसू,उनको बंद कर लिया है मैंने
अगर ख़ुदा भी आ जाये, उसके लिये भी खोलती नहीं हूँ मै

सोती नहीं थी जिसकी याद में,उन नैनो को समझा लिया है मैंने
ढूंढ ले कोई नया दिलवर,अब उनको खोजती नहीं हूँ मै

गमे-दर्द हद से गुजर चूका है,उसे दवा बना लिया है मैंने
इस गम के इलाज के लिये,किसी वैध हकीम को ढूँढती नहीं हूँ मै

किस आशिक के गम में ये हाल, बेहाल बना लिया है मैंने
लाख पूछे कोंई नाम उसका मुझ से,किसी को बताती नहीं हूँ मै

गमे-हालात देखकर,अब कुछ बयाँ कर दिया है “रस्तोगी” ने
पूछा सौ बार गमे-हालात सभी ने,किसी को बताती नहीं हूँ मै

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